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Chandigarh News: पराली जलाने से रोकने के लिए ब्लाॅक स्तर पर बनेगी कमेटी

Tue, 24 Sep 2024 09:36 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 24 Sep 2024 09:36 PM IST
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Committee will be formed at block level to stop stubble burning.
चंडीगढ़। हरियाणा में सभी हॉट स्पॉट की पहचान कर पराली जलाने से रोकने के लिए ब्लाॅक स्तर पर चार सदस्यीय कमेटी बनेगी। कमेटी में एसडीएम, बीडीओ, तहसीलदार, कृषि अधिकारी, पुलिस विभाग का एक अधिकारी और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार से सदस्य होंगे। ये सदस्य रोजाना समिति को हर रोज शाम पांच बजे तक विस्तृत रिपोर्ट देगी। यह निर्देश मुख्य सचिव डॉ. टीवीएसएन प्रसाद ने बुधवार को फतेहाबाद, जींद, कैथल, अंबाला, सिरसा, कुरुक्षेत्र, करनाल, हिसार, सोनीपत और यमुनानगर के मंडल आयुक्तों, उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों के साथ एक वर्चुअल बैठक के दौरान दिए हैं।
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मुख्य सचिव ने कहा कि वह रोजाना स्थिति की निगरानी करेंगे। पराली जलाने से रोकने में अच्छा प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों को सम्मानित किया जाएगा। उपायुक्तों को किसानों से जुड़कर प्रोत्साहन योजना के बारे में बताने के निर्देश दिए। उन्होंने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए रात में गश्त करने की आवश्यकता भी जताई। इसमें आढ़तियों को शामिल करने पर जोर दिया।
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मुख्य सचिव ने कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी के प्रयोग बढ़ाने से पराली जलाने की घटनाओं में कमी आई है। उन्होंने कहा कि 2024 के शुरू कृषि चक्र में राज्य में धान की खेती 15.73 लाख हेक्टेयर हो गया है। इससे बासमती व गैर-बासमती किस्मों के धान की पराली के उत्पादन में वृद्धि हुई है। वर्ष 2024 में बासमती धान की पराली का उत्पादन 4.06 मिलियन टन तक पहुंचा है। गैर-बासमती धान की पराली का उत्पादन 4.04 मिलियन टन हुआ है। अब धान की पराली का कुल उत्पादन 8.10 मिलियन टन है। विभिन्न क्षेत्रों में औद्योगिक उपयोग के लिए कुल 2.54 मिलियन टन धान की पराली आवंटित की गई है।
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एक्स-सीटू के प्रमुख क्षेत्रों में औद्योगिक बॉयलर और भट्टियां शामिल हैं, जिनमें 1.03 मिलियन टन पराली और बायोमास-आधारित बिजली उत्पादन में 0.83 मिलियन टन का उपयोग हुआ है। संपीड़ित बायोगैस (सीबीजी) संयंत्रों ने भी 0.1 मिलियन टन के अनुप्रयोग के साथ धान की पराली का उपयोग शुरू हुआ है, जबकि 2जी बायो-इथेनॉल संयंत्रों ने 0.2 मिलियन टन का उपयोग किया है। थर्मल पावर प्लांट (टीपीपी) में को-फायरिंग में 0.28 मिलियन टन और ईंट भट्टों और विविध उद्योगों में 0.10 मिलियन टन का उपयोग किया गया।

बैठक में पर्यावरण, वन एवं वन्य प्राणी विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव आनंद मोहन शरण, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पी. राघवेंद्र राव और बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. राजा शेखर वुंडरू और सीसीएचएयू हिसार के कुलपति प्रो. बीआर कंबोज भी वर्चुअल माध्यम से बैठक में जुड़े थे।
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