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हिंदी भाषा का रंग होली के रंगों से अधिक गहरा हैः गुरमीत बेदी
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चंडीगढ़। प्रधान निदेशालय रक्षा संपदा पश्चिमी कमान के तत्वाधान में वीरवार को हिंदी पखवाड़े का समापन किया गया। कार्यक्रम में हिमाचल साहित्य अकादमी अवार्ड से पुरस्कृत गुरमीत बेदी मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा का रंग होली के रंगों से अधिक गहरा है।
कोरोना के कारण कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से निदेशालय के तहत आने वाली सभी छावनियों के मुख्य अधिशासी अधिकारी और रक्षा संपदा अधिकारियों को जोड़ा गया था। गुरमीत बेदी ने कहा कि हिंदी की डोर पूरे राष्ट्र को जोड़े हुए है। हिंदी हमारे राष्ट्रीय गौरव की भाषा ही नहीं, हमारी अस्मिता , हमारा स्वाभिमान, हमारी अभिव्यक्ति और हमारी धमनियों में दौड़ता हुआ रक्त है। इसलिए हिंदी का संसार निरंतर फैल रहा है और हिंदी अब हिंदुस्तान की सरहदें लांघ कर एक ग्लोबल भाषा बनने की ओर अग्रसर है। आज दुनिया के कई देशों के विश्वविद्यालयों में अब हिंदी पढ़ाई जा रही है और विदेशियों में भी हिंदी सीखने की ललक बढ़ रही है। हिंदी हमारी बोलचाल की नहीं, हमारी अभिव्यक्ति की भाषा भी है और हमारी जीवन शैली भी है। इस अवसर पर हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित की गई हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्रधान निदेशक रक्षा संपदा पश्चिमी कमान कमलजीत सिंह चौहान ने भी विचार साझे किए। कार्यक्रम में इस संयुक्त निदेशक के. लोवुम , उपनिदेशक राजभाषा विजय कुमार भाटिया, रक्षा संपदा अधिकारी चंडीगढ़ मोहम्मद समीर, सहायक संपदा अधिकारी भूपिंदर सिंह और अनुवादक डॉक्टर विनोद कुमार सहित कई अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे ।
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कोरोना के कारण कार्यक्रम में वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से निदेशालय के तहत आने वाली सभी छावनियों के मुख्य अधिशासी अधिकारी और रक्षा संपदा अधिकारियों को जोड़ा गया था। गुरमीत बेदी ने कहा कि हिंदी की डोर पूरे राष्ट्र को जोड़े हुए है। हिंदी हमारे राष्ट्रीय गौरव की भाषा ही नहीं, हमारी अस्मिता , हमारा स्वाभिमान, हमारी अभिव्यक्ति और हमारी धमनियों में दौड़ता हुआ रक्त है। इसलिए हिंदी का संसार निरंतर फैल रहा है और हिंदी अब हिंदुस्तान की सरहदें लांघ कर एक ग्लोबल भाषा बनने की ओर अग्रसर है। आज दुनिया के कई देशों के विश्वविद्यालयों में अब हिंदी पढ़ाई जा रही है और विदेशियों में भी हिंदी सीखने की ललक बढ़ रही है। हिंदी हमारी बोलचाल की नहीं, हमारी अभिव्यक्ति की भाषा भी है और हमारी जीवन शैली भी है। इस अवसर पर हिंदी पखवाड़े के दौरान आयोजित की गई हिंदी प्रतियोगिताओं के विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। प्रधान निदेशक रक्षा संपदा पश्चिमी कमान कमलजीत सिंह चौहान ने भी विचार साझे किए। कार्यक्रम में इस संयुक्त निदेशक के. लोवुम , उपनिदेशक राजभाषा विजय कुमार भाटिया, रक्षा संपदा अधिकारी चंडीगढ़ मोहम्मद समीर, सहायक संपदा अधिकारी भूपिंदर सिंह और अनुवादक डॉक्टर विनोद कुमार सहित कई अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित थे ।
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