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Chandigarh News: पीडियाट्रिक वार्ड ऑपरेशनल होने का दावा फेल, बिजली का काम अभी भी बाकी

Tue, 16 Dec 2025 02:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 16 Dec 2025 02:26 AM IST
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Claims that the pediatric ward is operational prove false; electrical work is still incomplete
मोहाली। फेज-6 स्थित एम्स में 50 बेड के जिस नए पीडियाट्रिक वार्ड (बाल चिकित्सा वार्ड) का उद्घाटन बाल दिवस (14 नवंबर) पर बड़े तामझाम से किया गया था, वह एक महीने बीत जाने के बाद भी पूरी तरह से ऑपरेशनल नहीं हो पाया है। सोमवार को भी इस वार्ड में काम पूरा नहीं हो सका, और अब बिजली का काम मंगलवार को पूरा होने की बात कही जा रही है। एसडीओ दिनेश कुमार ने शनिवार को आश्वासन दिया था कि वार्ड सोमवार तक पूरी तरह चालू हो जाएगा, लेकिन सोमवार को भी ग्राउंड रिपोर्टिंग में पता चला कि सिर्फ बिजली का काम बाकी है।
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सोमवार को भी नहीं हो सका बिजली का काम
निर्माण कार्य में देरी की नई वजह सामने आई है। बिजली और अन्य आवश्यक कार्य के लिए रविवार को शटडाउन की अनुमति नहीं मिली, जिसके चलते सोमवार को भी नया वार्ड चालू नहीं हो सका। अब अस्पताल प्रशासन ने यह काम मंगलवार को पूरा करने की अनुमति मांगी है। नए वार्ड के अधूरेपन का असर निचले फ्लोर के मौजूदा वार्डों पर भी पड़ने लगा है। निर्माण कार्य के चलते, तीसरी मंजिल पर स्थित कमरा नंबर 317 और 318 को बंद कर दिया गया है। कमरा नंबर 317 से तो बेड भी बाहर निकाल दिए गए हैं और उस पर ताला लगा दिया गया है, जबकि 318 में कुछ ही बेड रखे गए हैं।
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स्टाफ ने बताया कि ऊपर काम चलने की वजह से कमरों में दिक्कत आ रही थी, जिससे मरीजों को असुविधा हो रही थी, इसलिए इन कमरों को बंद करना पड़ा। हालांकि उनका कहना है कि मरीज कम होने के कारण फिलहाल एडजस्टमेंट हो रही है, लेकिन मरीजों की संख्या बढ़ने पर इन कमरों को जल्द इस्तेमाल में लाने की जरूरत पड़ेगी। इस पर एसडीओ दिनेश कुमार ने कहा कि अगर ऐसी कोई दिक्कत आ रही है तो हम इसे देख लेते हैं।
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गायनी वार्ड में अत्यधिक भीड़
पीडियाट्रिक वार्ड : इमारत की पहली और दूसरी मंजिल पर स्थित पुराने 22 और 18 बेड के वार्डों में बच्चों के साथ-साथ बड़ों के मरीज भी भर्ती हैं, जिससे जगह की भारी किल्लत है।

गायनी वार्ड : दूसरे फ्लोर पर स्थित गायनी वार्ड के हालात तो और भी ख़राब हैं। यहां एक बेड पर दो-दो मरीज हैं, यानी दो मां और उनके दो नवजात बच्चे, साथ ही सभी के साथ एक-एक तीमारदार। कमरे में अत्यधिक भीड़ के कारण सर्दी के मौसम में भी गर्मी और उमस जैसा माहौल बना हुआ है, जो मरीजों के लिए तनावपूर्ण है। इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बना हुआ है। प्रशासन की यह लचरता न केवल बच्चों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीदों को धूमिल कर रही है, बल्कि मौजूदा मरीजों को भी भारी असुविधा में डाल रही है।
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