फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Claims of better treatment failed... lack of medicines in government hospitals

अमर उजाला पड़ताल: सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज के दावे फेल, जीवन रक्षक दवाओं का भी टोटा

Mon, 17 Oct 2022 02:21 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Mon, 17 Oct 2022 02:21 AM IST
सार

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। दवाओं के साथ ही डस्टबिन में लगाए जाने वाले प्लास्टिक की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इससे पैरामेडिकल स्टाफ को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

विज्ञापन
Claims of better treatment failed... lack of medicines in government hospitals
दवाएं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर इलाज देने के दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। स्थिति यह है कि जीएमएसएच-16 समेत सभी सिविल अस्पतालों में दवाओं की भयंकर किल्लत बनी हुई है। मौजूदा समय में वहां जीवन रक्षक दर्जनों दवाओं के साथ ही पैरासिटामोल सिरप तक की कमी है। इस कारण अस्पतालों में प्रतिदिन आने वाले हजारों मरीजों को बाहर से महंगी दवाएं खरीदनी पड़ रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इस संबंध में आला अधिकारियों को जानकारी तक नहीं है जबकि वॉर्ड, इमरजेंसी व ओपीडी से प्रतिदिन इसके स्टॉक उपलब्ध न होने की सूचना दी जा रही है। 

विज्ञापन


एक तरफ सरकारी अस्पतालों में ज्यादा से ज्यादा दवा की दुकानें खोलकर मरीजों को सस्ती दवाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है जबकि दूसरी तरफ अस्पतालों के अंदर उपलब्ध होने वाली सरकारी दवाएं ही उपलब्ध नहीं है। लोगों का कहना है कि सस्ते इलाज के नाम पर सिर्फ जनता को फुसलाने का काम किया जा रहा है। 
विज्ञापन


अस्पतालों से डस्टबिन का पैकेट भी गायब
सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था चरमरा गई है। दवाओं के साथ ही डस्टबिन में लगाए जाने वाले प्लास्टिक की आपूर्ति भी बंद कर दी गई है। इससे पैरामेडिकल स्टाफ को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है। मरीजों के इलाज में प्रयोग किए जाने वाले बायो मेडिकल वेस्ट को डस्टबिन में खुले में रखना पड़ रहा है। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


हमें बोला, दवा बाहर से ले लो
सेक्टर-22 के सिविल अस्पताल में अपने एक साल के बच्चे का इलाज कराने आए सेक्टर-34 निवासी धर्मवीर ने बताया कि बच्चे को तीन दिन से बुखार आ रहा था। डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने नेबुलाइज किया और बाहर से एक दवा खरीदने को कह दिया। बाहर की दुकान से पेरासिटामोल का सिरप लिया है जिसे बच्चे को हर चार घंटे के बाद देना है। 

इन दवाओं की आपूर्ति है बंद
- इंजेक्शन एविल (फेनीरामिन मैलिएट) : ड्रग एलर्जी, फूड एलर्जी, मधुमक्खी के डंक
- इंजेक्शन एफकॉर्लिन (हाइड्रोकोर्टिसन) : सूजन, एलर्जी , गठिया, अस्थमा और ल्यूपस।
- इंजेक्शन नॉरएड्रेनालाइन : इमरजेंसी में लो रक्तचाप को बढ़ाने के लिए।
- इंजेक्शन एड्रेनलाइन : इमरजेंसी जैसे कीट के काटने या डंक, खाद्य पदार्थ और दवाओं की जानलेवा एलर्जी।
- इंजेक्शन सोडा बाइकार्बोनेट :  मेटाबोलिक एसिडोसिस। 
- इंजेक्शन ऑन्डनसेट्रोन:  मिचली और उल्टी
- इंजेक्शन कैल्शियम ग्लूकोनेट : हाइपरक्लेमिया, हाइपोकैल्सीमिया
- इंजेक्शन इटोफिलिन: अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज 
- इंजेक्शन डोपामाइन : हार्ट अटैक, संक्रमण, हार्ट की सर्जरी या चोट के कारण होने वाले निम्न रक्तचाप (लो ब्लड प्रेशर) के इलाज
- इंजेक्शन डोबुटामाइन : हार्ट अटैक

बेहोशी के लिए दी जाने वाली दवाएं भी खत्म
-इंजेक्शन फेंटानील 
-इंजेक्शन वेकुरोनियम ब्रोमाइड
-इंजेक्शन एट्राक्युरियम बेसिलेट
-इंजेक्शन वैसोप्रेसिन
-इंजेक्शन प्रोपोफॉल
 

मैंने निदेशक स्वास्थ्य से इस संबंध में जानकारी ली है। उनका कहना है कि दवाओं की कमी जैसी स्थिति नहीं है। -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed