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शहरवासी सीधे चुनें मेयर, पांच साल हो कार्यकाल... कानून में करवाएंगे संशोधन : तिवारी

Fri, 07 Jun 2024 04:35 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 07 Jun 2024 04:35 AM IST
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Citizens should directly elect the mayor, tenure should be five years... will get the law amended: Tiwari
चंडीगढ़। चंडीगढ़ियों को खुद अपना मेयर चुनने का हक मिलना चाहिए। मेरा पूरा जोर रहेगा कि अगले नगर निगम में शहरवासी सीधे मेयर के लिए वोट डालें और जो भी मेयर चुना जाए वह पांच साल तक शहर का मेयर रहे। इसके लिए वह संसद में आवाज उठाएंगे और म्यूनिसिपल एक्ट में संशोधन कराएंगे। यह बात शहर के नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी ने अमर उजाला से खास बातचीत में कही।
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कड़े मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी संजय टंडन को हराकर दस साल बाद चंडीगढ़ लोकसभा की सीट कांग्रेस की झोली में डालने वाले सांसद मनीष तिवारी ने विशेष बातचीत में अपनी प्राथमिकताएं गिनाईं। शहर के पार्षदों पाला बदलने के मामले पर उन्होंने दल-बदल विरोधी कानून लाने की भी बात कही। साथ ही कहा कि अब पूरे पांच साल तक चंडीगढ़ के मुद्दे दिल्ली में गूंजेंगे। चंडीगढ़ में अब तक जितने भी सांसद रहे, सभी ने ब्यूरोक्रेसी के हावी रहने की बात कही है, वो कैसे तालमेल बिठाएंगे। इस पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। पेश है सांसद तिवारी से बातचीत के प्रमुख अंश-
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सवाल : सांसद बनने के बाद अब चंडीगढ़ के लिए आपकी प्राथमिकताएं क्या रहेंगी?
जवाब : चंडीगढ़ में मेट्रो लाना प्राथमिकता सूची में है। जो वादे शहर की जनता से किए हैं, उन सभी को पूरा करना है। कॉलोनियों का विकास, लाल डोरे को बढ़ाना, डड्डूमाजरा के डंपिंग ग्राउंड को हटाना, ये सभी प्राथमिकता में हैं। अभी केंद्र ने बनने जा रही सरकार पर नजर है। इसके बाद चंडीगढ़ के मुद्दों को पुरजोर तरीके से उठाएंगे।
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सवाल : ब्यूरोक्रेट्स के साथ कैसे तालमेल बिठाएंगे?
जवाब : यह बात सही है कि चंडीगढ़ ब्यूरोक्रेसी कंट्रोल्ड सिटी है। मेरी कोशिश होगी कि नीति निर्माण में प्रशासन के अधिकारियों के साथ लोगों की भी भागीदारी बढ़ाई जाए। फैसले लेने में लोगों की राय को भी ज्यादा से ज्यादा शामिल किया जाए तभी चंडीगढ़ को और ज्यादा ब्यूटीफुल बनाया जा सकेगा।

सवाल : आपने मेयर का कार्यकाल पांच साल करने का वादा किया था। पूरा होगा?
जवाब : कई ऐसे प्रस्ताव सदन से पारित हो जाते हैं लेकिन प्रशासन खारिज कर देता है। मेरी कोशिश है कि अगले नगर निगम चुनाव से पहले एमसी एक्ट में संशोधन कर मेयर का चुनाव भी सीधे जनता से करवाया जाए और मेयर का कार्यकाल पांच साल का किया जा, ताकि मेयर चुनाव में हर साल होने वाला वार्षिकोत्सव बंद हो सके। मेयर को अतिरिक्त शक्तियां मिलनी चाहिए। मेरा मानना है और यह मेरी मांग भी है कि अगर कोई उम्मीदवार चुनाव किसी पार्टी के सिंबल पर लड़ता है तो उस पर दल-बदल विरोधी कानून भी लागू होना चाहिए।

सवाल : नगर निगम की सदन की बैठकों में शामिल होंगे?
जवाब : लोकसभा क्षेत्र की समस्याओं को उठाना सांसद का एक काम है लेकिन मुख्य कार्य देश के लिए कानून बनाना होता है। चंडीगढ़ एक बहुत ही अलग तरह का शहर है। यहां नगर निगम भी है। सदन में एक कुर्सी सांसद की भी होती है। मैं सुपर काउंसलर नहीं बनना चाहूंगा लेकिन अगर कोई ऐसा एजेंडा जिससे शहरवासी प्रभावित होंगे तो उस पर मेरी नजर रहेगी। चर्चा में भी शामिल होकर अपनी राय दूंगा लेकिन वार्डों के काम में मेरा कोई दखल नहीं रहेगा।

सवाल : दिल्ली में चंडीगढ़ के मुद्दे हल कैसे होंगे?
जवाब : मैंने तो श्री आनंदपुर साहिब से सांसद रहते हुए भी चंडीगढ़ के मुद्दों को संसद में उठाया है। चाहे तो बिजली विभाग के निजीकरण का मुद्दा हो या डेपुटेशन का। अब तो मैं चंडीगढ़ का प्रतिनिधित्व करूंगा। अब शोर खूब मचेगा। पूरे पांच साल दिल्ली में चंडीगढ़ के मुद्दे गूंजेंगे।


सवाल : आपके चुनाव जीतने की प्रमुख वजह क्या रही?
जवाब : जीत के कारणों का अभी विश्लेषण नहीं किया है। अभी डाटा को कंपाइल कर रहे हैं। अभी जो अखबार में जीत के कारण छापे गए हैं, उन्हीं को पढ़ रहा हूं। बहुत ही नजदीकी मुकाबला रहा है। चुनाव प्रचार के दौरान हमारी किन बातों ने काम किया, किन बातों ने काम नहीं किया, यह अभी कहना मुश्किल है।
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