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इस राज्य के माथे लगा बाल विवाह का कलंक मिट नहीं पाया, आंकड़ों पर एक नजर

Wed, 01 Mar 2017 02:33 PM IST
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 01 Mar 2017 02:33 PM IST
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child marriage case increasing in haryana, sepcial report on scenerio
शादी
हरियाणा के दामन पर लगा बाल विवाह का कलंक मिट नहीं पाया है। राज्य में अब भी छोटी उम्र में नाबालिगों की शादियां बड़े पैमाने पर हो रही हैं। सरकार व राज्य महिला आयोग नारी सशक्तीकरण का लाख दम भरें, लेकिन उनकी कोशिशों के बावजूद साल दर साल बाल विवाह का आंकड़ा कम होने के बजाए बढ़ता जा रहा है।
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इसका खुलासा विधानसभा में सदन पटल पर महिला एवं बाल विकास मंत्री कविता जैन की ओर से रखे रिकार्ड से हुआ है। पलवल से कांग्रेस विधायक करण दलाल ने अतारांकित प्रश्न के तहत सरकार से नाबालिग बच्चियों की शादी के संबंध में जानकारी मांगी थी। महिला एवं बाल विकास विभाग की रिपोर्ट में दिए गए आंकड़े चौंकाने वाले हैं। साल 2016-17 में अब तक बाल विवाह के 362 केस प्रदेश में सामने आ चुके हैं।
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इन मामलों की विभाग को शिकायत भी की गई। विभाग का दावा है कि 28 शिकायतें आवश्यक कार्रवाई के लिए पुलिस को भेजी गईं। जबकि जांच के बाद 65 मामले झूठे निकले। जैन के अनुसार 230 बाल विवाह जानकारी मिलने के बाद बच्चियों के परिजनों को परामर्श देकर रोके गए। 38 विवाहों को कानून की मदद से रोकने में सफलता मिली है। एक मामला बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 की धारा तीन के तहत अदालत में दायर किया गया है।
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वर्ष 2015-16 में 11 केस अदालत में भेजे गए। कुल 315 शिकायतें आई थीं। 37 विवाह कानून की मदद व 182 परामर्श से रोके गए। जबकि 18 मामलों में पुलिस कार्रवाई कर रही है। 74 केस झूठे निकले। 2014-15 में नाबालिग बच्चियों की शादियों के 13 केस अदालत के सुपुर्द किए गए। कुल 246 मामले सामने आए थे। 48 विवाह कानून की मदद व 118 समझा-बुझाकर रोकने में सफलता मिली। 28 केस पुलिस को भेजे गए, जबकि 48 जांच के बाद असत्य निकले।

 
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