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सरकारी स्कूल में बाल मजदूरी, भारी-भरकम चौगाठ उठाकर लाए बच्चे, डीईओ का अजीबोगरीब बयान

Fri, 09 Aug 2019 11:52 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नडाला(कपूरथला)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नडाला(कपूरथला) Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 09 Aug 2019 11:52 AM IST
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child labour in government school of kapurthala, punjab
बाल मजदूरी - फोटो : अमर उजाला
सरकारी स्कूल में बच्चों से मजदूरी कराए जाने का मामला सामने आया है। बच्चे दुकान से स्कूल तक भारी-भरकम लोहे की चौगाठ उठाकर ला रहे थे। मामला पंजाब के कपूरथला का है। पंजाब का श्रम विभाग साल में दो बार बाल मजदूरी रोकने के लिए व्यापक तौर पर दुकानों, ढाबों और रेहड़ियों पर छापामारी करता है। इस टीम का हिस्सा शिक्षा विभाग के अधिकारी भी होते हैं।
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लेकिन सरकारी स्कूलों में बच्चों से सरेआम लेबर पर जिला शिक्षा अधिकारी सेकेंडरी के दोहरे मापदंड सामने आ रहे हैं। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल नडाला में बाल मजदूरी कराए जाने का मामला का सामने आया है। दो दिन पहले स्कूल से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर स्थित वेल्डिंग की दुकान से स्कूल के ही पांच-छह बच्चे पैदल एक लोहे की भारी-भरकम चौगाठ उठाकर स्कूल लाए।
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डीईओ सेकेंडरी मस्सा सिंह ने भी सफाई देते हुए अजीब बयान दिया, बोले कि बच्चों से तो हम घर भी काम करवाते हैं, बच्चों को स्ट्रांग बनाना चाहिए। वैसे उनके पास कोई शिकायत नहीं आई है। मीडिया से ही पूछने लगे कि किसी बच्चे के चोट तो नहीं लगी ना, फिर तो शुक्र है। वैसे प्रिंसिपल आशा रानी का तबादला हो गया है। अब भी अगर शिकायत आती है तो वह उस पर जरूर कार्रवाई करेंगे। इसके बाद डीईओ ने सफाई देते हुए कहा कि वैसे बच्चो से लेबर नहीं करवाई जा सकती है।
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स्कूल में दो दिन पहले डीईओ सेकेंडरी की ओर से इंस्पेक्शन की जानी थी। जिसके चलते स्कूल की कमियों को दूर करने के लिए प्रिंसिपल आशा रानी ने नौंवी- दसवीं कक्षा के पांच-छह बच्चों को करीब एक किलोमीटर दूर अड्डा नडाला स्थित वेल्डिंग की दुकान पर लोहे की चौगाठ लाने के लिए भेज दिया।

बच्चे बिना चपरासी और अध्यापक के अकेले ही एक किलोमीटर दूर से लोहे की भारी-भरकम चौगाठ उठाकर स्कूल ले आए। बच्चों को चिलचिलाती धूप में इस तरह भारी-भरकम चौगाठ उठाकर लाते देखकर स्थानीय लोगों ने विरोध जताया। लोगों ने कहा कि यह आरटीई एक्ट का उल्लंघन है। बाल मजदूरी है।

लोगों ने ही इसकी सूचना मीडिया तक पहुंचाई। पत्रकारों को जैसे ही पता चला वे स्कूल पहुंचे। मामला बढ़ता देखकर प्रिंसिपल आशा रानी ने कहा कि स्कूल में समारोह होना था, जिसकी तैयारी की जा रही थी। वह अपनी गलती मानती हैं, लेकिन आगे से ऐसा नहीं होगा।
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