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Hindi News ›   Chandigarh ›   Chief Justice said, I am from Ayodhya where Ram had gone to forest for father

बाप-बेटे को केस लड़ता देख चीफ जस्टिस बोले- अयोध्या से हूं जहां पिता के लिए वन चले गए थे राम

Tue, 11 Dec 2018 09:29 AM IST
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 11 Dec 2018 09:29 AM IST
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Chief Justice said, I am from Ayodhya where Ram had gone to forest for father
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo

पिता द्वारा प्रॉपर्टी से निकाले जाने के खिलाफ दाखिल बेटे की अपील पर सुनवाई के दौरान पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने कहा कि इस प्रकार की याचिकाओं से बेहद आहत हूं। उन्होंने कहा कि मैं अयोध्या से हूं, जहां पिता के कहने पर राम वन चले गए, लक्ष्मण बिना कहे राम के साथ हो लिए और राज पाने वाले भरते ने बड़े भाई के लिए गद्दी 14 साल खाली रखी। कोर्ट ने कहा कि आज जिस प्रकार की स्थिति बनी है, इसे देखकर वे बेहद आहत हैं।

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याचिका दाखिल करते हुए मोहाली निवासी याचिकाकर्ता ने पिता द्वारा घर से निकाले जाने के आदेश को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि जिस मकान से उसके पिता ने उसे निकाला है, वह असल में उसने खरीदा था और ऐसे में उसे मकान से नहीं निकाला जा सकता। इस पर कोर्ट ने कहा कि सबसे पहले यह बताया जाए कि इस प्रॉपर्टी का टाइटल किसके नाम पर है। 

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Chief Justice said, I am from Ayodhya where Ram had gone to forest for father
Punjab And Haryana Highcourt - फोटो : File Photo

इस पर याची ने बताया कि मकान के मालिक के तौर पर उसके पिता का नाम दर्ज है। हालांकि याची ने कहा कि यह प्रॉपर्टी उसने खरीदी थी और इसलिए यह उसकी है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि प्रापर्टी का विवाद सिविल सूट दाखिल कर निपटाया जाए। कोर्ट को बताया गया कि पहले ही सिविल सूट दाखिल किया जा चुका है जो फिलहाल लंबित है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यह परिवार के बीच का विवाद है और इसे निचली अदालत में सिविल सूट के माध्यम से ही निपटाया जा सकता है।

 इस मामले में हाईकोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं दी जा सकती। हालांकि कोर्ट ने कहा कि वह बाप-बेटे को प्रॉपर्टी के लिए लड़ते देख कर और आज के समाज की स्थिति को देखकर आहत हैं। चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी ने कहा कि वह अयोध्या से आएं हैं, जहां पिता के कहने पर राम बिना कुछ पूछे 14 साल के लिए वन चले गए थे, लक्ष्मण उनके साथ निस्वार्थ हो लिए थे तथा बड़े भाई के सम्मान में 14 साल तक भरत ने राज सिंहासन नहीं संभाला। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज कर दिया। 

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