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अधिकारियों के विवाद के कारण सीएचबी बोर्ड की बैठक टली
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 20 Jul 2016 01:16 AM IST
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सीएचबी
- फोटो : DEMO Pics
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चंडीगढ़ में अधिकारियों के आपस में विवाद के कारण लोगों के काम प्रभावित हो रहे हैं। बुधवार को होने वाली बोर्ड की बैठक टाल दी गई है। इस बैठक में सिटीजन चार्टर पर मुहर लगनी थी। वहीं इस बैठक में पूर्व सीईओ दीपक कुमार पर सरकारी खजाने से 22 लाख रुपये का फर्नीचर और अन्य सामान खरीदे जाने के मामले पर कार्रवाई करने का निर्णय लिया जाना था।
पूर्व सीईओ दीपक कुमार की ओर से चेयरमैन पर सेलवेल कंपनी को फेवर करने का आरोप लगाने के बाद मंगलवार को मनिंदर बैंस ने सलाहकार परिमल राय के साथ बैठक की। चेयरमैन ने सलाहकार से पूर्व सीईओ के खिलाफ पर प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की। उधर अधिकारियों के बीच विवाद का मामला गवर्नर हाउस तक पहुंच गया है। सीएचबी चेयरमैन का कहना है कि डॉ. दीपक कुमार की ओर से लगाए गए आरोपों में सच्चाई नहीं है।
पूर्व सीईओ ने चेयरमैन पर लगाए हैं यह आरोप
पूर्व सीईओ दीपक कुमार ने सलाहकार को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस ने सेलवेल कंपनी को अनडयू फेवर की है। टेंडर में तथ्य छुपाने व सेलवेल के खिलाफ कार्रवाई न करके फाइल चेयरमैन कार्यालय में रोकने का आरोप लगाया है। दीपक कुमार ने पत्र में इस मामले में सीबीआई और विजिलेंस जांच की मांग की है।
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पूर्व सीईओ ने मोबाइल फोन किया वापस
पूर्व सीईओ डॉ. दीपक कुमार ने अपना सरकारी मोबाइल फोन भी सीएचबी में लौटा दिया है। इसके अलावा 22 लाख का जो फर्नीचर सरकारी आवास के लिए खरीदा था, उनमें से भी अधिकतर बोर्ड के पास पहुंचा गया है, बोर्ड की ओर से इसकी नीलामी की जाएगी। मालूम हो कि बोर्ड ने पिछले दिनों यह निर्णय लिया था कि अब किसी अधिकारी को सरकारी खर्चे से मोबाइल फोन भविष्य में नहीं दिया जाएगा। जिन अधिकारियों के पास इस समय मोबाइल फोन हैं, वह भी वापस करें। इसके साथ ही सभी अधिकारियों का मासिक फोन बिल भी तय कर दिए गए हैं। इस संबंध में बोर्ड के सचिव अड़प्पा कार्तिक एक पत्र अलग से सलाहकार परिमल राय को लिखा है।
सचिव और पूर्व सीईओ के बीच हुई बैठक
मंगलवार को पूर्व सीईओ दीपक कुमार और सचिव अड़प्पा कार्तिक की यूटी सचिवालय में बैठक हुई। अड़प्पा ने भी हाल ही में सलाहकार परिमल राय को पत्र लिखकर कहा है कि जब वह हर माह वेतन सीएचबी से लेते हैं तो टीए-डीए भी ले सकते हैं। हाल ही में बोर्ड ने यह फैसला लिया है कि बोर्ड के अधिकारी जिनके पास अन्य विभाग का चार्ज है, यदि वे अन्य विभाग के कामों के लिए बाहर जाते हैं तो बोर्ड की ओर से उन्हें टीए और डीए नहीं मिलेगा। इसके बाद सचिव अड़प्पा कार्तिक ने यह पत्र लिखा है।
बोर्ड तैयार कर रहा है रिपोर्ट
पूर्व सीईओ दीपक कुमार की ओर से सलाहकार को भेजे गए पत्र के बाद अब बोर्ड के चेयरमैन ने भी उन कार्यों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है, जो कार्य दीपक कुमार ने सीईओ के पद पर रहते हुए समय पर नहीं किए हैं।
चेयरमैन को बोर्ड के तीनों एक्स ऑफिशियल सदस्यों का समर्थन
चेयरमैन को बोर्ड के तीनों एक्स ऑफिशियल सदस्यों का समर्थन है। यह तीनों भाजपा के नेता हैं। बोर्ड के एक्स ऑफिशियल सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है कि जो सीईओ अपनी निजी सुविधाओं के लिए पद पर रहते हुए 22 लाख से ज्यादा का खर्चा अपने घर के फर्नीचर और लग्जरी आइटम पर खर्च कर रहा है। अब वह खुद ही चेयरमैन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है। उनका कहना है कि चेयरमैन मनिंदर बैंस ने हमेशा बोर्ड के वित्तीय हालत को सुधारने के लिए काम किया है।
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पूर्व सीईओ दीपक कुमार की ओर से चेयरमैन पर सेलवेल कंपनी को फेवर करने का आरोप लगाने के बाद मंगलवार को मनिंदर बैंस ने सलाहकार परिमल राय के साथ बैठक की। चेयरमैन ने सलाहकार से पूर्व सीईओ के खिलाफ पर प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की। उधर अधिकारियों के बीच विवाद का मामला गवर्नर हाउस तक पहुंच गया है। सीएचबी चेयरमैन का कहना है कि डॉ. दीपक कुमार की ओर से लगाए गए आरोपों में सच्चाई नहीं है।
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पूर्व सीईओ ने चेयरमैन पर लगाए हैं यह आरोप
पूर्व सीईओ दीपक कुमार ने सलाहकार को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि चेयरमैन मनिंदर सिंह बैंस ने सेलवेल कंपनी को अनडयू फेवर की है। टेंडर में तथ्य छुपाने व सेलवेल के खिलाफ कार्रवाई न करके फाइल चेयरमैन कार्यालय में रोकने का आरोप लगाया है। दीपक कुमार ने पत्र में इस मामले में सीबीआई और विजिलेंस जांच की मांग की है।
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पूर्व सीईओ ने मोबाइल फोन किया वापस
पूर्व सीईओ डॉ. दीपक कुमार ने अपना सरकारी मोबाइल फोन भी सीएचबी में लौटा दिया है। इसके अलावा 22 लाख का जो फर्नीचर सरकारी आवास के लिए खरीदा था, उनमें से भी अधिकतर बोर्ड के पास पहुंचा गया है, बोर्ड की ओर से इसकी नीलामी की जाएगी। मालूम हो कि बोर्ड ने पिछले दिनों यह निर्णय लिया था कि अब किसी अधिकारी को सरकारी खर्चे से मोबाइल फोन भविष्य में नहीं दिया जाएगा। जिन अधिकारियों के पास इस समय मोबाइल फोन हैं, वह भी वापस करें। इसके साथ ही सभी अधिकारियों का मासिक फोन बिल भी तय कर दिए गए हैं। इस संबंध में बोर्ड के सचिव अड़प्पा कार्तिक एक पत्र अलग से सलाहकार परिमल राय को लिखा है।
सचिव और पूर्व सीईओ के बीच हुई बैठक
मंगलवार को पूर्व सीईओ दीपक कुमार और सचिव अड़प्पा कार्तिक की यूटी सचिवालय में बैठक हुई। अड़प्पा ने भी हाल ही में सलाहकार परिमल राय को पत्र लिखकर कहा है कि जब वह हर माह वेतन सीएचबी से लेते हैं तो टीए-डीए भी ले सकते हैं। हाल ही में बोर्ड ने यह फैसला लिया है कि बोर्ड के अधिकारी जिनके पास अन्य विभाग का चार्ज है, यदि वे अन्य विभाग के कामों के लिए बाहर जाते हैं तो बोर्ड की ओर से उन्हें टीए और डीए नहीं मिलेगा। इसके बाद सचिव अड़प्पा कार्तिक ने यह पत्र लिखा है।
बोर्ड तैयार कर रहा है रिपोर्ट
पूर्व सीईओ दीपक कुमार की ओर से सलाहकार को भेजे गए पत्र के बाद अब बोर्ड के चेयरमैन ने भी उन कार्यों की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है, जो कार्य दीपक कुमार ने सीईओ के पद पर रहते हुए समय पर नहीं किए हैं।
चेयरमैन को बोर्ड के तीनों एक्स ऑफिशियल सदस्यों का समर्थन
चेयरमैन को बोर्ड के तीनों एक्स ऑफिशियल सदस्यों का समर्थन है। यह तीनों भाजपा के नेता हैं। बोर्ड के एक्स ऑफिशियल सदस्य प्रेम कौशिक का कहना है कि कितनी हैरानी की बात है कि जो सीईओ अपनी निजी सुविधाओं के लिए पद पर रहते हुए 22 लाख से ज्यादा का खर्चा अपने घर के फर्नीचर और लग्जरी आइटम पर खर्च कर रहा है। अब वह खुद ही चेयरमैन पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा रहा है। उनका कहना है कि चेयरमैन मनिंदर बैंस ने हमेशा बोर्ड के वित्तीय हालत को सुधारने के लिए काम किया है।