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पढ़ें, लायन सफारी में नवजन्मे शेरों के बच्चों का सच
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 11 Aug 2014 04:21 PM IST
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अब छतबीड़ जू में लायन सफारी में भाई और बहन की जोड़ियां किलोल करेंगी। छतबीड़ जू में शेरनी हैली ने चार शावकों को जन्म दिया है, उसमें से दो मादा और दो नर हैं। यह पुष्टि छतबीड़ के ही एक अधिकारी ने की। हालांकि अभी शेरनी और उसके शावकों के करीब कोई नहीं जा रहा है। मां हैली तो अपने बच्चों को लेकर इतनी बेताब है कि वह यदा कदा ही बच्चों को अकेला छोड़ती है। ध्यान रहे कि इन शावकों का जन्म चार जुलाई 2014 को हुआ। छतबीड़ में अब चार शेर और तीन शेरनियां हो जाएंगी।
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छतबीड़ जू के एक अधिकारी ने कहा कि शावकों के करीब जाना खतरे को दावत देना है। फिलहाल शेरनी को ही मीट दिया जाता है। वह भी काफी एतिहयात बरतते हुए। वह जब मीट खाने जाती है तो भी पलट-पलटकर अपने बच्चों की ओर देखती रहती है। अभी यह चारों शावक मां के दूध पर ही टिके हैं। छतबीड़ के सूत्रों ने कहा कि शेरनी को आफ डिस्पले रखा गया है, जिससे वह उग्र न हो। सिक्योरिटी की पूरी व्यवस्था है, ताकि कोई उसके करीब न जाए। जांच के लिए यहां सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिसकी लगातार मानीटरिंग की जा रही है।
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जेनेटिक डिसआर्डर से लायन सफारी सूना
छतबीड़ जू में जेनेटिक डिसआर्डर ने 100 से ज्यादा शेरों की जान ले ली थी। हैली ने 12 साल बाद एशियाई शेरों की वंशवृद्धि की है। हैली गुजरात से 2011 में यहां लाई गई थी और अभय जून 2013 में यहां लाया गया।
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नसबंदी भी की गई थी इनकी
वर्ष 1996 में फाइव ईयर प्रोग्राम के तहत इन शेरों की नसबंदी की गई, जिससे उनकी आबादी पर रोक लगाई गई। 2002 के बाद किसी मादा शेरनी ने यहां शावकों को जन्म नहीं दिया। वर्ष 2010 में रेणुका जू से शेरनी दिव्या लाई गई। उसकी छह महीने बाद ही मौत हो गई थी। वंश वृद्धि के लिए 2011 में मार्च में गुजरात से शुद्ध एशियाई शेरों का जोड़ा गगन और हैली लाया गया। वंशवृद्धि से पहले ही यहां शेर गगन की मौत हो गई थी।
एक्सचेंज भी कर सकेंगे अब
छतबीड़ जू में शेरों की वंशवृद्धि के साथ ही अब उनका एक्सचेंज भी किया जा सकेगा। इसके बदले में सफारी में शेरों की नई नस्ल भी आ सकेगी।