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Chandigarh News: कोयला कारोबारी की कोठी पर फायरिंग में आतंकी गोल्डी बराड़ के 8 गुर्गों पर आरोप तय
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चंडीगढ़। सेक्टर-5 पॉश इलाके में रहने वाले कोयला कारोबारी कुलदीप सिंह मक्कड़ के घर पर फायरिंग के मामले में वीरवार को एनआईए की विशेष अदालत में सुनवाई हुई। इस मामले में आतंकी गोल्डी बराड़ के गिरफ्तार आठ गुर्गों पर अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। इनमें छह के खिलाफ आईपीसी, यूएपीए के तहत जबकि दो गुर्गों पर आर्म्स एक्ट व अन्य धाराओं में केस चलेगा। हालांकि, इस मामले में नामजद आतंकी गोल्डी बराड़ व यूरोप में बसे गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी राजपुरा पर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की ओर से 10-10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
बता दें कि जनवरी 2024 में सेक्टर-5 निवासी कारोबारी मक्कड़ ब्रदर्स की कोठी पर तड़के चार बजे अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग की थी। उस वक्त कुलदीप सिंह मक्कड़ अपने घर पर सोए हुए थे। इससे पहले उन्हें विदेशी नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बताते हुए पहले दो करोड़ और फिर तीन करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। सेक्टर-3 थाने में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में सीसीटीवी फुटेज के जरिए जांच टीमों ने सबसे पहले मोहाली जिले के मुल्लांपुर के नजदीक गांव करतारपुर निवासी गुरविंद्र सिंह उर्फ लाडी को गिरफ्तार किया, जिसने रिमांड के दौरान कई खुलासे किए। कड़ियां जोड़ते हुए जांच पुलिस ने एक-एक कर मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें गुरविंद्र सिंह उर्फ लाडी के अलावा शुभम कुमार गिरि उर्फ पंडित, सरबजीत उर्फ शरभू, अमृतपाल उर्फ गुज्जर, कमलप्रीत सिंह, काशी सिंह उर्फ हैप्पी, प्रेम सिंह और गगनदीप सिंह उर्फ गोल्डी शामिल हैं। इस मामले की जांच गृह मंत्रालय ने एनआईए को सौंप दी थी जिसके बाद जांच टीम ने सभी गिरफ्तार आरोपियों का अदालत से रिमांड लेकर पूछताछ की थी. जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे।
क्यूआर कोड से बराड़ को होती थी फंडिंग
एनआईए ने कुछ महीने पहले अदालत में खुलासा किया था कि मामले में गिरफ्तार अमृतपाल और कमलप्रीत आतंकी गोल्डी बराड़ के पैसों का हिसाब किताब रखते थे। अमृतपाल फोन के जरिए गोल्डी बराड़ के साथ संपर्क में रहता था। बकायदा इन दोनों की संलिप्तता आतंकी गतिविधियों सहित नशा तस्करी के बड़े मामलों में भी थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ गुज्जर के मुताबिक गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ढिल्लों उसे नशीले पदार्थों की आय का कुछ हिस्सा जमा करने के निर्देश के साथ क्यूआर कोड और बैंक खाता भेजता था। इसके अलावा वह आतंकी फंड और नशीले पदार्थों की आय को चैनलाइज करने के लिए आरोपी गोल्डी बराड़ की ओर से सुझाए गए बैंक खाते में धनराशि जमा करने के लिए अपने दोस्त के बैंक खाते का इस्तेमाल करवाता था।
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हवाला के जरिए भी विदेश में होती थी फंडिंग
एनआईए की जांच में सामने आया था कि कमलप्रीत सिंह आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ गुज्जर के साथ नशीली दवाओं व नशीले पदार्थों से अर्जित आय के मैनेजमेंट का काम करते थे। यह दोनों बड़ी रकम को क्यूआर कोड या बैंक खाते के अलावा हवाला के जरिए भी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ तक पहुंचाने का काम करते थे। इसी कारण एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने अब जांच रिपोर्ट के आधार पर बुड़ैल जेल में बंद गुरविंदर सिंह लाडी, सरबजीत सिंह उर्फ सरबू, शुभम कुमार गिरि उर्फ पंडित, अमृतपाल उर्फ गुज्जर, कमलप्रीत सिंह, काशी सिंह उर्फ हैप्पी, प्रेम सिंह और गगनदीप सिंह पर आईपीसी की धारा 120बी, 307, 384, यूएपीए की धारा 16, 18, 18-बी, 20, शस्त्र अधिनियम की धारा 25(1ए), शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1एए), 25 (1बी) और 27(2) के तहत आरोप तय किए हैं लेकिन इस मामले में गोल्ड़ी बराड़ के अलावा उसका एक अन्य साथी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी राजपुरा भी फरार है और वह यूरोप में कहीं छिपा हुआ है। इन मामले में अब 22 नवंबर से ट्रायल शुरू होगा।
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बता दें कि जनवरी 2024 में सेक्टर-5 निवासी कारोबारी मक्कड़ ब्रदर्स की कोठी पर तड़के चार बजे अज्ञात बाइक सवार बदमाशों ने फायरिंग की थी। उस वक्त कुलदीप सिंह मक्कड़ अपने घर पर सोए हुए थे। इससे पहले उन्हें विदेशी नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने खुद को गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बताते हुए पहले दो करोड़ और फिर तीन करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। सेक्टर-3 थाने में पुलिस ने अज्ञात आरोपियों पर केस दर्ज किया था। इस मामले में सीसीटीवी फुटेज के जरिए जांच टीमों ने सबसे पहले मोहाली जिले के मुल्लांपुर के नजदीक गांव करतारपुर निवासी गुरविंद्र सिंह उर्फ लाडी को गिरफ्तार किया, जिसने रिमांड के दौरान कई खुलासे किए। कड़ियां जोड़ते हुए जांच पुलिस ने एक-एक कर मामले में कुल आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनमें गुरविंद्र सिंह उर्फ लाडी के अलावा शुभम कुमार गिरि उर्फ पंडित, सरबजीत उर्फ शरभू, अमृतपाल उर्फ गुज्जर, कमलप्रीत सिंह, काशी सिंह उर्फ हैप्पी, प्रेम सिंह और गगनदीप सिंह उर्फ गोल्डी शामिल हैं। इस मामले की जांच गृह मंत्रालय ने एनआईए को सौंप दी थी जिसके बाद जांच टीम ने सभी गिरफ्तार आरोपियों का अदालत से रिमांड लेकर पूछताछ की थी. जिसमें कई चौंकाने वाले खुलासे हुए थे।
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क्यूआर कोड से बराड़ को होती थी फंडिंग
एनआईए ने कुछ महीने पहले अदालत में खुलासा किया था कि मामले में गिरफ्तार अमृतपाल और कमलप्रीत आतंकी गोल्डी बराड़ के पैसों का हिसाब किताब रखते थे। अमृतपाल फोन के जरिए गोल्डी बराड़ के साथ संपर्क में रहता था। बकायदा इन दोनों की संलिप्तता आतंकी गतिविधियों सहित नशा तस्करी के बड़े मामलों में भी थी। जांच के दौरान यह भी सामने आया था कि आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ गुज्जर के मुताबिक गैंगस्टर गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ढिल्लों उसे नशीले पदार्थों की आय का कुछ हिस्सा जमा करने के निर्देश के साथ क्यूआर कोड और बैंक खाता भेजता था। इसके अलावा वह आतंकी फंड और नशीले पदार्थों की आय को चैनलाइज करने के लिए आरोपी गोल्डी बराड़ की ओर से सुझाए गए बैंक खाते में धनराशि जमा करने के लिए अपने दोस्त के बैंक खाते का इस्तेमाल करवाता था।
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हवाला के जरिए भी विदेश में होती थी फंडिंग
एनआईए की जांच में सामने आया था कि कमलप्रीत सिंह आरोपी अमृतपाल सिंह उर्फ गुज्जर के साथ नशीली दवाओं व नशीले पदार्थों से अर्जित आय के मैनेजमेंट का काम करते थे। यह दोनों बड़ी रकम को क्यूआर कोड या बैंक खाते के अलावा हवाला के जरिए भी गैंगस्टर गोल्डी बराड़ तक पहुंचाने का काम करते थे। इसी कारण एनआईए की स्पेशल कोर्ट ने अब जांच रिपोर्ट के आधार पर बुड़ैल जेल में बंद गुरविंदर सिंह लाडी, सरबजीत सिंह उर्फ सरबू, शुभम कुमार गिरि उर्फ पंडित, अमृतपाल उर्फ गुज्जर, कमलप्रीत सिंह, काशी सिंह उर्फ हैप्पी, प्रेम सिंह और गगनदीप सिंह पर आईपीसी की धारा 120बी, 307, 384, यूएपीए की धारा 16, 18, 18-बी, 20, शस्त्र अधिनियम की धारा 25(1ए), शस्त्र अधिनियम की धारा 25 (1एए), 25 (1बी) और 27(2) के तहत आरोप तय किए हैं लेकिन इस मामले में गोल्ड़ी बराड़ के अलावा उसका एक अन्य साथी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोल्डी राजपुरा भी फरार है और वह यूरोप में कहीं छिपा हुआ है। इन मामले में अब 22 नवंबर से ट्रायल शुरू होगा।