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1029 सूखे पेड़ों से पब्लिक को खतरा, हाईकोर्ट ने लगाई प्रशासन को फटकार
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 03 Aug 2017 12:47 AM IST
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Chandigarh Trees
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जिस सूखे पेड़ ने एक युवती की टांग छीन ली थी, ऐसे ही 1029 सूखे पेड़ चंडीगढ़ में नागरिकों की जान के लिए खतरा बने हैं। यह बात नगर निगम के चीफ इंजीनियर द्वारा सौंपे गए हलफनामे से सामने आई है।
हलफनामे में बताया गया है कि शहर में 1 लाख 65 हजार 497 पेड़ हैं, जिनमें से 1029 पेड़ सूख चुके हैं। इनमें से अभी सिर्फ 602 को हटाए जाने की ही अनुमति मिली है बाकी बचे 427 को हटाने के लिए अनुमति का इंतजार है। प्रशासन द्वारा दी गई इस जानकारी पर जस्टिस राजन गुप्ता ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सूखे हुए पेड़ जो आम लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं, उन्हें हटाए जाने के लिए भी अनुमति ली जाती है।
आखिर क्यों इस प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है। बरसात और आंधी में गिरे हुए पेड़ों को हटाने के लिए भी क्या इसी तरह इजाजत ली जाती है। इस पर प्रशासन ने हाई कोर्ट को बताया कि उन्हें तो पेड़ों की छंटाई के लिए भी इजाजत लेनी पड़ती है। इतना ही नहीं कुछ पेड़ निगम के तहत हैं और कुछ प्रशासन के। हाईकोर्ट ने कहा की यह बेहद ही संशय की स्थिति है लिहाजा मामले की अगली सुनवाई पर प्रशासक के सलाहकार ही अब इस बारे में स्थिति स्पष्ट करें।
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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को पीड़ित युवती के मुआवजे के बारे में भी अगली सुनवाई पर जवाब देने के आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और अदालत के सहयोग के लिए अमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाएगी। हाईकोर्ट ने ही पिछली कहा था कि शहर में ऐसे सूखे हुए पेड़ हैं, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के चीफ इंजीनियर को हाईकोर्ट तलब कर शहर के सभी सूखे पेड़ों सहित सड़कों के गड्डों और खुले पड़े मैनहोल्स के पूरा रिकॉर्ड के साथ हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दे दिए थे।
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हलफनामे में बताया गया है कि शहर में 1 लाख 65 हजार 497 पेड़ हैं, जिनमें से 1029 पेड़ सूख चुके हैं। इनमें से अभी सिर्फ 602 को हटाए जाने की ही अनुमति मिली है बाकी बचे 427 को हटाने के लिए अनुमति का इंतजार है। प्रशासन द्वारा दी गई इस जानकारी पर जस्टिस राजन गुप्ता ने प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि सूखे हुए पेड़ जो आम लोगों के लिए खतरा बन चुके हैं, उन्हें हटाए जाने के लिए भी अनुमति ली जाती है।
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आखिर क्यों इस प्रक्रिया को जटिल बनाया गया है। बरसात और आंधी में गिरे हुए पेड़ों को हटाने के लिए भी क्या इसी तरह इजाजत ली जाती है। इस पर प्रशासन ने हाई कोर्ट को बताया कि उन्हें तो पेड़ों की छंटाई के लिए भी इजाजत लेनी पड़ती है। इतना ही नहीं कुछ पेड़ निगम के तहत हैं और कुछ प्रशासन के। हाईकोर्ट ने कहा की यह बेहद ही संशय की स्थिति है लिहाजा मामले की अगली सुनवाई पर प्रशासक के सलाहकार ही अब इस बारे में स्थिति स्पष्ट करें।
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सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन को पीड़ित युवती के मुआवजे के बारे में भी अगली सुनवाई पर जवाब देने के आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है और अदालत के सहयोग के लिए अमिकस क्यूरी की नियुक्ति की जाएगी। हाईकोर्ट ने ही पिछली कहा था कि शहर में ऐसे सूखे हुए पेड़ हैं, जो आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए हैं। लिहाजा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम के चीफ इंजीनियर को हाईकोर्ट तलब कर शहर के सभी सूखे पेड़ों सहित सड़कों के गड्डों और खुले पड़े मैनहोल्स के पूरा रिकॉर्ड के साथ हाईकोर्ट में पेश होने के निर्देश दे दिए थे।