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चंडीगढ़ सेवा का अधिकार आयोग ने सेक्टर-34 थाना प्रभारी को जारी किया नोटिस
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ सेवा का अधिकार आयोग ने सेक्टर-34 थाना प्रभारी देविंदर सिंह को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 30 दिनों की निर्धारित समय सीमा के भीतर महिला को अश्लील इशारे और अभद्र टिप्पणी करने की शिकायत के मामले में कार्रवाई नहीं करने पर जारी किया है। आयोग ने देविंदर को 29 दिसंबर को मामले के पूरे रिकॉर्ड के साथ व्यक्तिगत रूप से पेश होने का भी निर्देश दिया है।
अपनी शिकायत में सेक्टर-45 निवासी शिकायतकर्ता ने 6 अक्तूबर को सेक्टर- 45 निवासी विनय शर्मा और मनीष शर्मा के खिलाफ एसएसपी पब्लिक विंडो सेक्टर- 9 में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी आपस में भाई हैं और उनके पड़ोस में रहते हैं। दोनों ने उनकी पत्नी को 29 सितंबर को कथित तौर पर अश्लील इशारे किए, अभद्र भाषा और अभद्र टिप्पणियां कीं। शिकायतकर्ता ने यह दावा भी किया कि उसने पुलिस को आरोपी व्यक्ति के खिलाफ सबूत भी उपलब्ध कराए थे, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। एसएसपी ने इस शिकायत की जांच का जिम्मा सेक्टर- 34 थाने को सौंपी। शिकायतकर्ता थाना प्रभारी और एएसपी साउथ डिवीजन से भी मुलाकात की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने या उन पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, यह उनकी निजता के उल्लंघन है। यूटी पुलिस दबाव में काम कर रही है क्योंकि आरोपियों के एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल से संबंध हैं। जब शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने एसडीएम को शिकायत दी। एसडीएम ने पुलिस को रिमाइंडर जारी किया था, लेकिन पुलिस ने फिर भी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद शिकायतकर्ता सेवा का अधिकार आयोग के पास पहुंचा। आयोग ने शिकायत की जांच पड़ताल कर थाना प्रभारी सेक्टर-34 दविंदर सिंह को 29 दिसंबर को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा है। आयोग ने कहा कि अगर थाना प्रभारी पेश नहीं होते है तो माना जाएगा कि उन्होंने इस मामले में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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अपनी शिकायत में सेक्टर-45 निवासी शिकायतकर्ता ने 6 अक्तूबर को सेक्टर- 45 निवासी विनय शर्मा और मनीष शर्मा के खिलाफ एसएसपी पब्लिक विंडो सेक्टर- 9 में शिकायत दी थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि आरोपी आपस में भाई हैं और उनके पड़ोस में रहते हैं। दोनों ने उनकी पत्नी को 29 सितंबर को कथित तौर पर अश्लील इशारे किए, अभद्र भाषा और अभद्र टिप्पणियां कीं। शिकायतकर्ता ने यह दावा भी किया कि उसने पुलिस को आरोपी व्यक्ति के खिलाफ सबूत भी उपलब्ध कराए थे, लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। एसएसपी ने इस शिकायत की जांच का जिम्मा सेक्टर- 34 थाने को सौंपी। शिकायतकर्ता थाना प्रभारी और एएसपी साउथ डिवीजन से भी मुलाकात की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
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शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उनकी गतिविधियों को रिकॉर्ड करने या उन पर नजर रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए हैं, यह उनकी निजता के उल्लंघन है। यूटी पुलिस दबाव में काम कर रही है क्योंकि आरोपियों के एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल से संबंध हैं। जब शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उसने एसडीएम को शिकायत दी। एसडीएम ने पुलिस को रिमाइंडर जारी किया था, लेकिन पुलिस ने फिर भी कार्रवाई नहीं की। इसके बाद शिकायतकर्ता सेवा का अधिकार आयोग के पास पहुंचा। आयोग ने शिकायत की जांच पड़ताल कर थाना प्रभारी सेक्टर-34 दविंदर सिंह को 29 दिसंबर को आयोग के सामने पेश होने के लिए कहा है। आयोग ने कहा कि अगर थाना प्रभारी पेश नहीं होते है तो माना जाएगा कि उन्होंने इस मामले में कुछ नहीं कहना है। इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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