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रिपोर्ट बदलने का कारनामा : पीजीआई में आधे घंटे में निगेटिव से पॉजिटिव बनी थी रिपोर्ट, जांच में खुलासा
Thu, 01 Apr 2021 02:16 AM IST
पंचकुला ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Thu, 01 Apr 2021 02:16 AM IST
सार
- एक ही मरीज की जांच रिपोर्ट पहले निगेटिव, फिर आई पॉजिटिव
- पीजीआई में भेजे गए थे नमूने
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पीजीआई
विस्तार
चंडीगढ़ में एक मरीज की जो निगेटिव रिपोर्ट आधे घंटे में पॉजिटिव हो गई थी, वह पीजीआई का कारनामा था। चंडीगढ़ के जीएमएसएच-16 में कोरोना जांच कराने वाले एक मरीज की रिपोर्ट पहले निगेटिव और आधे घंटे बाद मरीज की पॉजिटिव रिपोर्ट देने के मामले में स्वास्थ्य निदेशक डा. मनदीप कंग ने बुधवार सुबह जांच का आदेश दिया था।
जांच में यह बात सामने आई कि मरीज के नमूने को आरटीपीसीआर जांच के लिए पीजीआई में भेजा गया था। पीजीआई से ही पहले निगेटिव और उसके बाद पॉजिटिव दोनों रिपोर्ट जीएमएसएच-16 में भेजी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां मरीज के परिजन और उसके दोस्त के परिजन इस बात से तनाव में हैं। वहीं, पीजीआई प्रशासन इसे जांच नमूनों की कमी के कारण होने वाली तकनीकी गड़बड़ी बता रहा है। सच्चाई जो भी हो लेकिन इस प्रकरण से एक बात तो साफ हो चुकी है कि कोविड जांच को लेकर सरकार तो बेहद गंभीर है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
ये है मामला
सेक्टर-15 निवासी डॉ. दविंदर ने 26 मार्च को सुबह 9:30 बजे जीएमएसएच-16 में कोरोना जांच के लिए नमूना दिया। 28 मार्च की दोपहर को उन्होंने अपने दोस्त भूपिंदर सिंह को रिपोर्ट लेने के लिए जीएमएसएच-16 भेजा, जहां उनके दोस्त को निगेटिव रिपोर्ट की कॉपी दी गई। उनके दोस्त घर आकर उनके साथ खाना खा रहे थे कि तभी अस्पताल से फोन आया कि आप तत्काल अस्पताल आकर अपनी रिपोर्ट ले लीजिए क्योंकि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यह सुनते ही डॉ. दविंदर और भूपिंदर दोनों परेशान हो गए।
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भूपिंदर ने तत्काल अस्पताल जाकर दूसरी रिपोर्ट ली, जिसमें डॉ. दविंदर को पॉजिटिव करार दिया गया था। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के स्टाफ को बताया कि महज आधे घंटे पहले वह उसी मरीज की निगेटिव की रिपोर्ट लेकर गए हैं। ऐसे में आधे घंटे में ही कैसे किसी की रिपोर्ट बदल सकती है। इस पर स्टाफ ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद वह पॉजिटिव व निगेटिव दोनों रिपोर्ट लेकर घर लौट आए।
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जांच में यह बात सामने आई कि मरीज के नमूने को आरटीपीसीआर जांच के लिए पीजीआई में भेजा गया था। पीजीआई से ही पहले निगेटिव और उसके बाद पॉजिटिव दोनों रिपोर्ट जीएमएसएच-16 में भेजी गई थी। चौंकाने वाली बात यह है कि एक तरफ जहां मरीज के परिजन और उसके दोस्त के परिजन इस बात से तनाव में हैं। वहीं, पीजीआई प्रशासन इसे जांच नमूनों की कमी के कारण होने वाली तकनीकी गड़बड़ी बता रहा है। सच्चाई जो भी हो लेकिन इस प्रकरण से एक बात तो साफ हो चुकी है कि कोविड जांच को लेकर सरकार तो बेहद गंभीर है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है।
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ये है मामला
सेक्टर-15 निवासी डॉ. दविंदर ने 26 मार्च को सुबह 9:30 बजे जीएमएसएच-16 में कोरोना जांच के लिए नमूना दिया। 28 मार्च की दोपहर को उन्होंने अपने दोस्त भूपिंदर सिंह को रिपोर्ट लेने के लिए जीएमएसएच-16 भेजा, जहां उनके दोस्त को निगेटिव रिपोर्ट की कॉपी दी गई। उनके दोस्त घर आकर उनके साथ खाना खा रहे थे कि तभी अस्पताल से फोन आया कि आप तत्काल अस्पताल आकर अपनी रिपोर्ट ले लीजिए क्योंकि रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। यह सुनते ही डॉ. दविंदर और भूपिंदर दोनों परेशान हो गए।
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भूपिंदर ने तत्काल अस्पताल जाकर दूसरी रिपोर्ट ली, जिसमें डॉ. दविंदर को पॉजिटिव करार दिया गया था। इस दौरान उन्होंने अस्पताल के स्टाफ को बताया कि महज आधे घंटे पहले वह उसी मरीज की निगेटिव की रिपोर्ट लेकर गए हैं। ऐसे में आधे घंटे में ही कैसे किसी की रिपोर्ट बदल सकती है। इस पर स्टाफ ने उन्हें कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद वह पॉजिटिव व निगेटिव दोनों रिपोर्ट लेकर घर लौट आए।
इनएडीक्वेट यानी नमूनों की संख्या कम होने पर ऐसा होने का खतरा होता है। ऐसी स्थिति में दोबारा जांच की जाती है। लेकिन आमतौर पर ऐसा नहीं होता। -प्रो जगतराम, निदेशक, पीजीआई