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चंडीगढ़ : निगम-कर्मचारी नेताओं के बीच फंसे कर्मचारी, घर-घर से कूड़ा लेने के लिए पंजीकरण की रफ्तार धीमी

Fri, 05 Feb 2021 10:39 AM IST
निवेदिता वर्मा नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 05 Feb 2021 10:39 AM IST
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Chandigarh : only 50 percent of the household garbage workers have registered themselves with corporation 
चंडीगढ़ नगर निगम। - फोटो : फाइल फोटो

चंडीगढ़ में घर-घर से कूड़ा लेने वाले 50 प्रतिशत कर्मचारियों ने ही निगम में अपना पंजीकरण करवाया है जबकि सूखे व गीले कूड़े को अलग-अलग लेने वाली गाड़ियां आने के बाद डोर टु डोर गारबेज कलेक्टर्स एसोसिएशन ने 1283 कर्मचारियों की सूची निगम को सौंपी थी। निगम और कर्मचारी नेताओं के बीच फंसे कर्मचारियों को समझ नहीं आ रहा है कि वह पंजीकरण करवाएं या नहीं। ऐसे में गाड़ियों के माध्यम से कूड़ा लेने की व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

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नगर निगम ने कूड़ा लेने वाली गाड़ियां मंगवाने से पहले कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों से घर-घर से कूड़ा उठाने वाले कर्मचारियों की सूची मांगी थी। इस दौरान पदाधिकारियों ने निगम को 1283 कर्मचारियों की सूची दी थी। निगम ने सभी कर्मचारियों के सत्यापन के लिए तीन माह पहले पंजीकरण शुरू कराया था।
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इस दौरान कुछ यूनियन के नेताओं ने गाड़ियों का विरोध शुरू कर दिया, वहीं कुछ नेता निगम के अधिकारियों से बातचीत के बाद मान गए। अब कर्मचारी असमंजस में हैं कि पंजीकरण करवाएं या नहीं। जिस यूनियन से अधिकारियों का तालमेल ठीक रहा उसके समर्थन के कर्मचारियों ने पंजीकरण करवा लिया, शेष अब भी विवाद के निस्तारण का इंतजार कर रहे हैं।

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निगम के पास पहुंची 150 गाड़ियां, 90 ही चलीं 

निगम ने पहले चरण में एक से लेकर सेक्टर-30 तक गाड़ियों से कूड़ा उठवाने की व्यवस्था बनाई थी। 22 दिसंबर को प्रशासक वीपी सिंह बदनौर ने गाड़ियों को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी कर दिया। उसी दौरान विरोध के स्वर उठने लगे थे। उस समय निगम के पास 97 गाड़ियां पहुंच गई थीं। अब निगम के पास कुल 150 गाड़ियां पहुंच गईं हैं, लेकिन यह व्यवस्था अन्य सेक्टरों में शुरू नहीं हो सकी है। फिलहाल केवल 90 गाड़ियां ही चलाई जा रही हैं।

बहुमंजिला इमारतों के लिए भी थी योजना
निगम आयुक्त केके यादव ने गाड़ियों के संचालन से पहले बताया था कि प्रत्येक गाड़ी पर एक चालक व एक सहयोगी रहेगा। जहां दो मंजिला घर हैं, वहां दो सहयोगी होंगे। इस तरह लगभग एक हजार कर्मचारी गाड़ियों पर तैनाती के लिए चाहिए, लेकिन एक मंजिल व दो मंजिल वाले घरों में शिकायत आने लगी कि कर्मचारी ऊपर आने को तैयार ही नहीं हैं। वहीं शेष कर्मचारियों को मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी सेंटर पर तैनात करने की योजना थी, लेकिन विवाद के कारण कर्मचारियों ने पंजीकरण करवाया ही नहीं।

पार्षदों में भी इस मुद्दे पर मतभेद
कर्मचारियों का मुद्दा जनवरी माह की सदन की बैठक में उठा था। मनोनीत पार्षद सचिन लोहटिया और राजेश कालिया में इसे लेकर विवाद छिड़ गया। लोहटिया ने कहा कि एक कमेटी बनाकर धरना देने वाले कर्मचारियों की बात को सुनना चाहिए। इस पर राजेश कालिया ने कहा कि 70 प्रतिशत कर्मचारी गाड़ियों पर चल रहे हैं। कुछ कर्मचारी राजनीति से प्रेरित होकर काम में बाधा डाल रहे हैं। उनके साथ मेयर व अधिकारियों ने बात भी कर ली है जो बात मानने योग्य नहीं सब उसी पर अड़े हैं।

जो कर्मचारी हमारे पास आ रहे हैं, उनका पंजीकरण कर रहे हैं। उनका ड्राइविंग टेस्ट भी लिया जा रहा है। जो गाड़ी चला सकते हैं, उन्हें चालक के रूप में रखेंगे, शेष सहयोगी हो जाएंगे। कर्मचारी नेताओं से भी बैठक कर रहे हैं, ताकि व्यवस्था जल्द बेहतर हो जाए।  - केके यादव, निगम आयुक्त

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