पीजीआई चंडीगढ़ में कोरोना वैक्सीन का मानव परीक्षण शुरू, तीन वालिंटियर्स को दी गई खुराक
- छह महीने तक किया जाएगा वालिंटियर्स का फॉलोअप, इसके बाद होगा वैक्सीन का आकलन
- पीजीआई ने वालिंटियर्स को फोन नंबर भी दिया, आवश्यकता पड़ने पर कभी भी कर सकते कॉल
- देशभर के 17 संस्थानों में 100 वालिंटियर्स पर होगा ट्रायल, पुणे ने पूरा किया परीक्षण
विस्तार
पीजीआई चंडीगढ़ में शुक्रवार को ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन कोविड शील्ड का मानव परीक्षण शुरू हुआ। पहले दिन तीन वालिंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई। पीजीआई प्रशासन के अनुसार वालिंटियर्स के चयन और उन्हें डोज देने की प्रक्रिया लगातार जारी रहेगी। छह माह तक उनका फॉलोअप करने के बाद वैक्सीन के परिणाम का आकलन किया जाएगा कि वह कोरोना के इलाज में कितनी कारगर है। देश के 17 संस्थानों में इसका ट्रायल हो रहा है। पहले फेज में हर संस्थान में 100 वालिंटियर्स पर इसका ट्रायल किया जाएगा।
वालिंटियर्स डायरी में नोट करेंगे छोटे से छोटे बदलाव
पीजीआई प्रशासन के अनुसार जिन तीन वालिंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई है उन्हें घर भेज दिया गया है। उन्हें एक एक डायरी दी गई है। इसमें उन्हें आने वाले छोटे से छोटे बदलाव को नोट करने को कहा गया है। इसके साथ ही उन्हें पीजीआई का फोन नंबर भी दिया गया है। जिस पर उन्हें 24 घंटे में कभी भी आवश्यकता पड़ने पर कॉल करने को कहा गया है।
28 दिन बाद फिर लगेगी दूसरी डोज
जिन वालिंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई है उन्हें 28वें दिन फिर पीजीआई बुलाया गया है। 28वें दिन उन्हें इसकी दूसरी डोज दी जाएगी। इसके बाद फिर 28वें दिन उन्हें फॉलोअप के लिए बुलाया जाएगा। उस दिन उनसे ब्लड सैंपल लेकर उसका परीक्षण किया जाएगा। जानकारी के अनुसार उनके खून के नमूने लेकर उसमें एंटीबॉडीज की स्थिति का आंकलन किया जाएगा। उसके बाद ट्रायल की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसमें अलग-अलग बिंदुओं पर उन वालिंटियर्स का परीक्षण कर वैक्सीन की सफलता जांच की जाएगी।
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सफलता के बाद सबकी पहुंच में होगी वैक्सीन
पीजीआई के डिपार्टमेंट ऑफ कम्युनिटी मेडिसिन एंड स्कूल ऑफ पब्लिक एंड हेल्थ की प्रो. मधु गुप्ता ने बताया देश के 17 संस्थानों में इसका ट्रायल हो रहा है। पहले फेज में हर संस्थान में 100 पर इसका ट्रायल किया जाएगा। पुणे के इंस्टीट्यूट में 100 वालिंटियर्स पर इसका ट्रायल पूरा हो चुका है।
जिन वॉलिंटियर्स को यह वैक्सीन दी गई है उन्हें इससे कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसलिए उम्मीद की जा रही है कि वैक्सीन के नतीजे अच्छे होंगे। डॉ. मधु गुप्ता ने बताया कि यह वैक्सीन सीरम इंस्टीट्यूट की ओर से आत्मनिर्भर मिशन के तहत भारत में ही बनाई जा रही है। इसलिए यह सस्ती होगी और आम आदमी की पहुंच में होगी।
डाटा सेफ्टी एंड मॉनिटरिंग ऑफ बोर्ड करेगा विश्लेषण
जिन लोगों पर इस वैक्सीन का ट्रायल होगा उन वालिंटियर्स का सारा रिकॉर्ड डाटा सेफ्टी एंड मॉनिटरिंग बोर्ड के पास भेजा जा रहा है। बोर्ड इन वॉलिंटियर्स की सेहत को लेकर एनालिसिस करेगा। इसके आधार पर वैक्सीन की सफलता का आकलन किया जाएगा।
ऐसे वालिंटियर्स को किया ट्रायल में शामिल
इसमें 18 साल से ऊपर के वे लोग शामिल किए गए हैं जिन्हें कोरोना नहीं हुआ, न ही परिवार में किसी को हुआ हो। वह पूरी तरह से स्वस्थ हो। ट्रायल के दौरान अगर किसी भी वालिंटियर्स को किसी भी तरह की कोई स्वास्थ्य संबंधित समस्या हुई तो पीजीआई में उनका इलाज किया जाएगा।
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