चैत्र नवरात्र : इस बार 500 साल बाद बन रहा गजब संयोग, ग्रहों की दशा से मिल सकती है कोरोना से राहत
- इस बार नवरात्र में बन रहा सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग
- पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को की जाएगी घट स्थापना
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चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्र में सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहा है। इस बार सूर्य और चंद्र की एक साथ मेष राशि में उपस्थित हैं। अश्विनी नक्षत्र और सर्वार्थ और अमृत सिद्धि योग की उपस्थिति में ऐसा संयोग 500 साल के बाद बन रहा है। चंडीगढ़ सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास की शुक्ल पक्ष प्रतिपदा से नवरात्रि पर्व का प्रारंभ माना जाता है। इस साल चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 12 अप्रैल को सुबह आठ बजकर दो मिनट से 13 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 18 मिनट तक रहेगी। उदयातिथि मान्य होने से नवरात्रि व्रत 13 अप्रैल से प्रारंभ होंगे।
नवमी 21 अप्रैल को होगी। उन्होंने कहा कि 13 अप्रैल को प्रथम नवरात्रि के दिन सूर्य रात्रि दो बजकर 21 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा, जबकि चंद्र का गोचर पहले से ही मेष राशि में रहेगा। अश्विनी नक्षत्र भी 12 अप्रैल को 10 बजकर 30 मिनट पर प्रारंभ होकर 13 अप्रैल को रात्रि 8 बजकर 44 मिनट तक रहेगा।
कोरोना महामारी से मिल सकती है कुछ राहत
पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि नवरात्रि पर्व का शुभारंभ अश्विनी नक्षत्र में हो रहा है, जिसका ग्रह केतु और स्वामी अश्विनी कुमार हैं। अश्विनी कुमार आरोग्य के देवता हैं और देवों के वैद्य हैं, इसलिए इस समय में कोरोना महामारी से कुछ राहत मिलने की संभावना है। अमृत एवं सर्वार्थ सिद्धि योग की उपस्थिति सुख एवं संपत्ति का प्रदाता बनाता है। शक्ति उपासना का यह महापर्व 20 अप्रैल तक चलेगा।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, 13 अप्रैल को घट स्थापना की जाएगी। घट स्थापना का मुहूर्त सुबह पांच बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। बीरेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि नवमी 21 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 45 मिनट पर प्रारंभ होगी। 22 अप्रैल को सुबह 12 बजकर 37 मिनट तक रहेगी।
उन्होंने कहा कि देवी व्रत में कुमारी पूजन बेहद आवश्यक है। यदि सामर्थ्य हो तो नवरात्र भर अन्यथा समाप्ति के दिन 9 कन्याओं के चरण धोकर देवीरूप का गंध पुष्प आदि से अर्चन कर आदर सहित मिष्ठान और भोजन कराना चाहिए और वस्त्र आदि से सत्कृत करना चाहिए।