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नेशनल हाईवे डी-नोटिफाई करने पर जवाब के लिए यूटी प्रशासन ने मांगा समय
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 19 Mar 2017 01:08 AM IST
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- फोटो : Demo Pic
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शराब के ठेके बंद होने से चंडीगढ़ यूटी प्रशासन को रेवेन्यू लॉस न हो इसके लिए एनएच-21 और माध्य मार्ग को छोड़ बाकी सभी मार्गों को डी-नोटिफाई करने को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। इस याचिका पर शनिवार को यूटी प्रशासन ने जवाब के लिए समय मांगा। प्रशासन ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के चलते होने वाले रेवेन्यू लॉस से बचने के लिए यह व्यवस्था की गई थी। साल 2017-18 की एक्साइज पॉलिसी भी प्रशासन नोटिफाई कर चुका है। प्रशासन ने हाईकोर्ट से अपील की है कि यदि उसे चार दिन का समय दिया जाए तो अगली सुनवाई पर मामले में बेहतर प्रस्ताव के साथ जानकारी दी जा सकती है। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस हरिंदर सिंह सिंधु की खंडपीठ ने प्रशासन की मांग को मान सुनवाई 21 मार्च तक स्थगित कर दी है।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शराब के ठेके नेशनल और स्टेट हाईवे से कम से कम 500 मीटर दूर रखना जरूरी है। इस फैसले के चलते चंडीगढ़ के ज्यादातर ठेकों पर ताला लगना निश्चित हो गया था। इसी बीच प्रशासन ने हाईवे डी-नोटिफाई करने का फैसला ले लिया और एनएच-21 और मध्य मार्ग को छोड़कर अन्य सभी वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कें, जो पहले स्टेट हाईवे थीं, उनका नाम बदलकर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया।
अराईव सेफ सोसाइटी की ओर से एडवोकेट रवि कमल गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उनकी याचिका पर सभी नेशनल और स्टेट हाईवे पर शराब के ठेके खोले जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई थी। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 15 दिसंबर को सरकार की इस अपील को खारिज कर सभी राज्यों को निर्देश देते हुए नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर क्षेत्र में शराब के ठेके खोले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के यह आदेश यूटी प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन गए, क्योंकि शहर के अधिकतर ठेके सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण बंद करना अनिवार्य हो गया था। चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इसका तोड़ निकाला और स्टेट हाईवे को डी-नोटिफाई कर उन्हें मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया था।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार शराब के ठेके नेशनल और स्टेट हाईवे से कम से कम 500 मीटर दूर रखना जरूरी है। इस फैसले के चलते चंडीगढ़ के ज्यादातर ठेकों पर ताला लगना निश्चित हो गया था। इसी बीच प्रशासन ने हाईवे डी-नोटिफाई करने का फैसला ले लिया और एनएच-21 और मध्य मार्ग को छोड़कर अन्य सभी वी-1, वी-2 और वी-3 सड़कें, जो पहले स्टेट हाईवे थीं, उनका नाम बदलकर मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया।
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अराईव सेफ सोसाइटी की ओर से एडवोकेट रवि कमल गुप्ता ने हाईकोर्ट को बताया कि उनकी याचिका पर सभी नेशनल और स्टेट हाईवे पर शराब के ठेके खोले जाने पर पूरी तरह पाबंदी लगाई गई थी। कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपील कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष 15 दिसंबर को सरकार की इस अपील को खारिज कर सभी राज्यों को निर्देश देते हुए नेशनल और स्टेट हाईवे के 500 मीटर क्षेत्र में शराब के ठेके खोले जाने पर पूरी तरह से पाबंदी लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट के यह आदेश यूटी प्रशासन के लिए परेशानी का सबब बन गए, क्योंकि शहर के अधिकतर ठेके सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के कारण बंद करना अनिवार्य हो गया था। चंडीगढ़ प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग ने इसका तोड़ निकाला और स्टेट हाईवे को डी-नोटिफाई कर उन्हें मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड घोषित कर दिया था।
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