मेयर बनते ही राजबाला ने साफ किए इरादे, बोलीं- विपक्षी पार्षद साथ दें, जन सुझाव से होंगे काम
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चंडीगढ़ की नवनिर्वाचित मेयर राजबाला मलिक ने कहा कि शहर के विकास के लिए अगर कोई टैक्स लगाने की जरूरत होगी तो वह शहरवासियों के सुझाव लेकर उसे लागू करेंगी। उनकी प्राथमिकता रहेगी कि सफाई के मामले में चंडीगढ़ को एक बार फिर से कैसे नंबर वन बनाया जाए। उन्होंने सभी को साथ लेकर चलने की बात कही।
मेयर बनने के बाद सदन में राजबाला मलिक ने कहा कि सभी के सहयोग से ही वह मेयर चुनी गई हैं। उन्होंने सांसद किरण खेर का खासतौर पर धन्यवाद किया। कहा कि भाजपा के सभी पार्षदों का सहयोग मिला है और उम्मीद करती हैं कि आगे भी मिलता रहेगा। कहा कि वह पहले भी मेयर रह चुकी हैं, लेकिन यह कार्यकाल उनके लिए एक नया अनुभव साबित होगा।
इस मौके पर उन्होंने अपने लक्ष्यों के बारे में भी बात की। कहा कि वह शहर में कोई भी प्रस्ताव शहरवासियों के सुझाव के बिना नहीं लाएंगी। नगर निगम की सदन की गरिमा को बढ़ाने का काम करेंगी। नगर निगम वित्तीय संकट में न पड़े, इसके लिए प्रशासन के साथ पूरा सहयोग किया जाएगा और फंड जुटाने के नए साधन खोजे जाएंगे।
राजबाला मलिक ने नगर निगम के कार्य में पारदर्शिता लाने की भी बात कही। साथ ही उन्होंने कहा कि वह शहर को एक बार फिर से सफाई में नंबर वन बनाएंगी। उन्होंने कहा कि सभी इंदौर की बातें करते हैं लेकिन उनका लक्ष्य है कि चंडीगढ़ एक बार फिर से स्वच्छता के मामले में नंबर वन बने। राजबाला मलिक ने कहा कि शहर की तर्ज पर ही गांवों का विकास होगा। सभी पार्षद उनकी टीम हैं, क्योंकि बिना टीम के कोई कैप्टन नहीं होता।
मेयर चुनाव की झलकियां
जब मोबाइल जमा कराने पर कांग्रेस ने उठाए सवाल
मेयर चुनाव के लिए मतदान से पहले कहा गया कि सभी पार्षद अपने मोबाइल और इलेक्ट्रिक गैजेट जमा करा दें। एक-एक कर सभी पार्षदों ने अपने मोबाइल जमा कराए। इसके बाद कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि भाजपा के कई पार्षदों के पास दो-दो मोबाइल हैं, लेकिन उन्होंने जमा नहीं कराए हैं। ऐसे में मतदान गुप्त कैसे रहेगा। इसके बाद पार्षद आशा जसवाल और दलीप शर्मा ने मोबाइल जमा कराया। इसके बाद सभी पार्षदों के पेन भी जमा करा लिए गए।
दर्शकदीर्घा में बैठे संजय टंडन पार्षदों को देतेे रहे संकेत
दर्शकदीर्घा में बैठे भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और संगठन महामंत्री दिनेश कुमार की नजरें पूरी तरह से भाजपा पार्षदों पर रहीं। टंडन की तरफ से पार्षदों को संकेत दिए जाते रहे। सदन में एक बार ओपन मतदान की मांग की जाने लगी। इस पर टंडन ने पार्षदों की ओर इशारा किया कि सभी पार्षद हाथ उठाकर ओपन वोटिंग के पक्ष में वोट दें। हालांकि चुनाव अधिकारी की तरफ से कहा गया कि मतदान को गुप्त रखा जाएगा।
चंद्रावती शुक्ला ने वोट दिया तो सदन में बजने लगीं तालियां
मेयर चुनाव के मतदान में सभी चिंतित दिखाई दे रहे थे। भाजपा के नेता भले ही अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे, लेकिन क्रास वोटिंग का डर उनके चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा था। इस बीच मतदान शुरू हुआ। सबसे पहला वोट सांसद किरण खेर ने दिया। इसके बाद वार्ड नंबर-1 के पार्षद ने वोट देना शुरू किया। पार्षद चंद्रावती शुक्ला ने अपने बैलेट पेपर को हवा में लहराया और फिर बॉक्स में पर्ची को डाला। इसके बाद सदन में तालियां बजने लगीं। चंद्रावती शुक्ला सामने बैठी राजबाला मलिक से जाकर मिलीं और फिर अपनी सीट पर जाकर बैठ गईं।
जीत के बाद बबला ने अपनी शॉल राजबाला मलिक को पहनाई
मेयर चुनाव के दिन कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला की शॉल खूब चर्चा में रही। सांसद किरण खेर ने भी बबला की शॉल की तारीफ की। मतदान से पहले राजबाला मलिक ने भी बबला के शॉल की तारीफ की। मतदान के बाद राजबाला मलिक मेयर चुनी गईं। इसके बाद देवेंद्र सिंह बबला अपनी कुर्सी से उठे और राजबाला मलिक के पास जाकर उन्हें अपनी शॉल ओढ़ा दी। बबला के इस कदम की सबने सराहना की।
सदन में भारत माता की जय के लगे नारे
राजबाला मलिक के जीत के ऐलान के साथ ही सदन भारत माता की जय के नारों से गूंज उठा। नतीजों की घोषणा के साथ ही भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समेत सभी नेताओं ने राहत की सांस ली। इसके बाद सांसद किरण खेर अपनी सीट से उठीं और राजबाला मलिक को गले लगा लिया। सांसद खेर राजबाला मलिक को मेयर की कुर्सी तक छोड़ने के लिए खुद भी गईं।
मनोनीत पार्षदों पर कसा तंज- वोट के बिना कुछ नहीं
मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए हो रहे मतदान के समय सभी मनोनीत पार्षद चुपचाप बैठे रहे। यह देखकर कांग्रेस पार्षद देवेंद्र सिंह बबला ने कहा कि मनोनीत पार्षदों को देखकर पता लगता है कि वोट के बिना कुछ भी नहीं है। यह सुनकर मनोनीत पार्षद मुस्कुराते रहे।
राजबाला के मेयर बनते ही निगम में लौटी ‘शाही कुर्सी’
इसके बाद पूरे साल यह लाल कुर्सी मेयर दफ्तर से गायब रही लेकिन नई मेयर के साथ ही इस कुर्सी की दोबारा निगम में वापसी हो गई। राजेश कालिया ने उस वक्त कहा था कि मेयर की यह कुर्सी किसी राजा की कुर्सी की तरह शाही लगती है जबकि वह शहर के सेवक हैं, कोई राजा नहीं इसलिए वह इस पर नहीं बैठेंगे।
कालिया ने कहा था कि इस कुर्सी पर बैठकर मन में अहंकार आने का भी भय है। ऐसे में वह साधारण कुर्सी पर ही बैठेंगे। इसके बाद मेयर की ‘शाही’ कुर्सी को हटाकर दूसरी कुर्सी लगाई गई थी। राजेश कालिया पूरे साल साधारण कुर्सी पर ही बैठे। राजबाला मलिक के चुनाव जीतने के तुरंत बाद जब वह सदन से बाहर आकर मेयर दफ्तर में पहुंचीं तो लाल कुर्सी की वापसी हो चुकी थी।
वह उसी कुर्सी पर बैठीं और उन्होंने सभी अभिवादन स्वीकार किया। इस बारे जब राजेश कालिया से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि सभी की अपनी-अपनी मर्जी है। मेयर जिस कुर्सी पर बैठना चाहे, बैठ सकती हैं। वह नगर सेवक थे, हैं और रहेंगे इसलिए उन्होंने इस कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया था।
मेयर आवास को बनाऊंगी कैंप ऑफिस : मलिक
मेयर को मिलने वाले मोबाइल पर कहा कि उन्हें एप्पल के मोबाइल की जरूरत ही नहीं है, उनके पास पहले से ही कई एप्पल के मोबाइल मौजूद हैं। गौरतलब है कि राजेश कालिया के मेयर चुने जाने के बाद उन्होंने एप्पल के मोबाइल की डिमांड की थी, जिसको लेकर वह काफी चर्चा में रहे। कई लोगों ने उनकी आलोचना भी की।
इसके तुरंत बाद मेयर के सरकारी आवास में शिफ्ट होने के बाद उन्होंने सरकारी फंड से लाखों खर्च कर घर में काम कराया, इसकी वजह से भी उन्हें काफी आलोचना झेलनी पड़ी। जानकारी के अनुसार राजेश कालिया 15 जनवरी को मेयर के सरकारी आवास को खाली करेंगे, जिसके बाद राजबाला मलिक की तरफ से वहां पर मेयर का कैंप ऑफिस बनाया जाएगा।