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चंडीगढ़ मेयर चुनावः भाजपा के अंदर गुटबाजी और बगावत का पुराना इतिहास, डालिए एक नजर

Thu, 09 Jan 2020 10:44 AM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 09 Jan 2020 10:44 AM IST
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Chandigarh Mayor Election History with BJP and Groupism
संजय टंडन
चंडीगढ़ मेयर चुनाव के समय भाजपा के अंदर गुटबाजी और बगावत का पुराना इतिहास है। उम्मीदवार की घोषणा के बाद बगावत के सुर पार्टी के अंदर से उठते ही हैं। एक समय ऐसा भी आया था जब मेयर चुनाव के समय वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर शहर के पूर्व सांसद सत्यपाल जैन भारी पड़ गए थे। बात दिसंबर 1998 की है। पूरे शहर में मेयर चुनाव की चर्चाएं खूब गरम थीं। सत्यपाल जैन उस समय शहर के सांसद थे और नरेंद्र मोदी प्रदेश भाजपा प्रभारी थे। उस समय नगर निगम में 20 पार्षद और 9 मनोनीत पार्षद हुआ करते थे।
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सांसद के पास मेयर चुनाव में वोट करने का अधिकार प्राप्त नहीं था। 23 दिसंबर को मेयर चुनाव होना था और भाजपा ने आधिकारिक तौर पर पार्षद राजिंदर कुमार (स्वर्गीय) के नाम का एलान किया। सत्यपाल जैन इस फैसले से संतुष्ट नहीं थे और उन्होंने केवल कृष्ण आदिवाल का मेयर पद के लिए नामांकन भरवा दिया। जैन के कहने पर सीनियर डिप्टी मेयर के पद पर कन्हैया लाल और डिप्टी मेयर के पद पर बचन सिंह ने नामांकन भर दिया। पार्टी के अंदर हुई बगावत को लेकर तत्कालीन प्रदेश प्रभारी नरेंद्र मोदी नाराज हो गए।
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नगर निगम में 20 में से 13 पार्षद भाजपा के थे। हरमोहन धवन की पार्टी से तीन पार्षद थे, अकाली दल के दो पार्षद, एक पार्षद कांग्रेस का और एक आजाद पार्षद था। 23 दिसंबर को चुनाव हुए तो केवल कृष्ण आदिवाल को 12 वोट मिले। कांग्रेस के उम्मीदवार को 10 वोट मिले जबकि भाजपा के आधिकारिक उम्मीदवार राजिंदर सिंह तीसरे नंबर पर रहे। केवल कृष्ण आदिवाल 8 वोट से जीतकर शहर के तीसरे मेयर बने। इस पूरे प्रकरण से नरेंद्र मोदी और सत्यपाल जैन के बीच तल्खियां बढ़ गईं थीं।
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हालांकि अब समय बदल गया है सत्यपाल जैन अब एडिशनल सॉलिसिटर जनरल हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ दायर किए गए कई केसों में उनकी पैरवी करते हैं। कई मामलों में जैन मोदी को राहत भी दिला चुके हैं।
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