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मेयर पर दर्ज केस खारिज करने के लिए याचिका दायर, जानिए पूरा मामला
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 28 Mar 2017 01:09 AM IST
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चंडीगढ़ की मेयर आशा जसवाल
- फोटो : File Photo
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मेयर आशा जसवाल, पार्षद रविकांत और राजेश कुमार समेत उनके समर्थकों की ओर से फरवरी में स्नेहालय में ट्रेसपासिंग और कुकर्म पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करने के मामले में मलोया थाना पुलिस ने अदालत में एफआईआर खारिज करने की याचिका दाखिल की है। इस पर अदालत ने शिकायतकर्ता सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की डायरेक्टर निशु सिंघल और पीड़ित के पिता को नोटिस भेजे थे।
सोमवार को अदालत में दोनों के बयान दर्ज हुए। डायरेक्टर सिंघल ने अदालत में दिए बयान में कहा कि वह पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहती हैं। साथ ही पुलिस की ओर से केस को खारिज करने की याचिका को मंजूर करने की अपील करती हैं। वहीं उन्होंने इस बयान को बिना किसी दबाव में दर्ज कराने की भी बात कही।
वहीं मामले में जिस कुकर्म पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर होने के आरोप थे, उसके पिता के भी बयान हुए। उन्होंने भी अदालत को बताया कि वह पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और केस में आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहते हैं। सिविल जज की कोर्ट ने दोनों की गवाही दर्ज होने के बाद मामले में फैसले के लिए मंगलवार की तारीख तय की है। संभवत: अदालत मलोया थाने में दर्ज इस एफआईआर को लेकर फैसला ले सकती है।
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सोमवार को अदालत में दोनों के बयान दर्ज हुए। डायरेक्टर सिंघल ने अदालत में दिए बयान में कहा कि वह पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं चाहती हैं। साथ ही पुलिस की ओर से केस को खारिज करने की याचिका को मंजूर करने की अपील करती हैं। वहीं उन्होंने इस बयान को बिना किसी दबाव में दर्ज कराने की भी बात कही।
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वहीं मामले में जिस कुकर्म पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर होने के आरोप थे, उसके पिता के भी बयान हुए। उन्होंने भी अदालत को बताया कि वह पुलिस की जांच से संतुष्ट हैं और केस में आगे किसी तरह की कार्रवाई नहीं चाहते हैं। सिविल जज की कोर्ट ने दोनों की गवाही दर्ज होने के बाद मामले में फैसले के लिए मंगलवार की तारीख तय की है। संभवत: अदालत मलोया थाने में दर्ज इस एफआईआर को लेकर फैसला ले सकती है।
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ये है मामला
मेयर आशा जसवाल
- फोटो : अमर उजाला
ये है मामला
तीन फरवरी को मेयर दो पार्षदों और समर्थकों के साथ मलोया स्थित स्नेहालय गई थीं। वहां उन्होंने बच्चों में मिठाइयां बांटीं। आरोप के अनुसार बाद में मेयर ने पार्षद और समर्थकों के साथ एक कुकर्म पीड़ित बच्चे से बंद कमरे में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने उस बच्चे के साथ मीडिया की मौजूदगी में फोटो भी खिंचवाई। इससे कुकर्म पीड़ित नाबालिग की पहचान उजागर हो गई थी। इसके बाद चार फरवरी को पुलिस ने सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की डायरेक्टर निशू सिंघल की शिकायत पर मेयर पार्षद आशा जसवाल, दो पार्षदों रविकांत और राजेश कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। वहीं उनके समर्थकों पर ट्रेसपासिंग की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।
प्रशासक और गृहमंत्री तक पहुंच गया था मामला
सता में होने के बावजूद मेयर आशा जसवाल सहित तीन भाजपा पार्षदों पर आपराधिक मामला दर्ज होने से पार्टी की काफी किरकिरी हुई थी। पार्टी भी मेयर के बचाव में उतर गई थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब सता में रहते हुए किसी सिटिंग मेयर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया हो। मामला मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद पहले यह मामला प्रशासक वीपी सिंह बदनौर तक पहुंचा। इसके बाद मामला दिल्ली पहुंच गया। वहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक को इसके बारे में अवगत कराया गया। मामला ऊपर तक पहुंचने से पहले पुलिस इसमें काफी सख्त नजर आ रही थी, लेकिन मामला दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस के भी तेवर नरम पड़ गए थे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने संबंधित एसएचओ के खिलाफ गृहमंत्री, प्रशासक और एडवाइजर परिमल राय से सख्त कदम उठाने को कहा था। क्योंकि एसएचओ ने बिना सीनियर अधिकारियों की राय के मेयर और पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज किया था।
तीन फरवरी को मेयर दो पार्षदों और समर्थकों के साथ मलोया स्थित स्नेहालय गई थीं। वहां उन्होंने बच्चों में मिठाइयां बांटीं। आरोप के अनुसार बाद में मेयर ने पार्षद और समर्थकों के साथ एक कुकर्म पीड़ित बच्चे से बंद कमरे में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने उस बच्चे के साथ मीडिया की मौजूदगी में फोटो भी खिंचवाई। इससे कुकर्म पीड़ित नाबालिग की पहचान उजागर हो गई थी। इसके बाद चार फरवरी को पुलिस ने सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट की डायरेक्टर निशू सिंघल की शिकायत पर मेयर पार्षद आशा जसवाल, दो पार्षदों रविकांत और राजेश कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं में केस दर्ज किया था। वहीं उनके समर्थकों पर ट्रेसपासिंग की धारा के तहत केस दर्ज किया गया था।
प्रशासक और गृहमंत्री तक पहुंच गया था मामला
सता में होने के बावजूद मेयर आशा जसवाल सहित तीन भाजपा पार्षदों पर आपराधिक मामला दर्ज होने से पार्टी की काफी किरकिरी हुई थी। पार्टी भी मेयर के बचाव में उतर गई थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब सता में रहते हुए किसी सिटिंग मेयर पर पुलिस ने मामला दर्ज किया हो। मामला मीडिया में सुर्खियों में आने के बाद पहले यह मामला प्रशासक वीपी सिंह बदनौर तक पहुंचा। इसके बाद मामला दिल्ली पहुंच गया। वहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह तक को इसके बारे में अवगत कराया गया। मामला ऊपर तक पहुंचने से पहले पुलिस इसमें काफी सख्त नजर आ रही थी, लेकिन मामला दिल्ली पहुंचने के बाद पुलिस के भी तेवर नरम पड़ गए थे। भाजपा कार्यकर्ताओं ने संबंधित एसएचओ के खिलाफ गृहमंत्री, प्रशासक और एडवाइजर परिमल राय से सख्त कदम उठाने को कहा था। क्योंकि एसएचओ ने बिना सीनियर अधिकारियों की राय के मेयर और पार्षदों के खिलाफ केस दर्ज किया था।