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आरटीआई से खुलासा: कर्मचारियों के खिलाफ केस लड़ने पर कितना पैसा खर्च किया, चंडीगढ़ के लॉ विभाग को पता ही नहीं

Wed, 15 Nov 2023 03:01 PM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 15 Nov 2023 03:01 PM IST
सार

आरटीआई में बताया कि विभाग के पास कानून फीस देने के लिए कोई अलग से बजट नहीं है। हालांकि, दो साल में 43466 रुपये खर्च गए हैं। विभाग के जवाब से कई लोग हैरान हैं क्योंकि विभिन्न मामलों में पैरवी के लिए प्रशासन वकील भेजता है और उन्हें हजारों-लाखों में रुपये दिए जाते हैं।

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Chandigarh Law Department does not have information about expenditure on cases related to employees
सूचना का अधिकार - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ प्रशासन के लगभग हर विभाग में कर्मचारियों के जुड़े दर्जनों केस विभिन्न अदालतों में लंबित हैं। कर्मचारियों के खिलाफ केस लड़ने के लिए लाखों रुपये वकीलों को दिए जा रहे हैं लेकिन लॉ विभाग के पास खर्च की कोई जानकारी नहीं है। न पैनल है, न बजट है। 
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में केस लड़ने के लिए कुछ वकील हैं लेकिन उन्हें पैसे कितने दिए गए हैं, यह जानकारी नहीं है। हैरानी की बात है कि दूसरों को कानूनी राय देने वाले विभाग का पिछले तीन साल से ऑडिट भी नहीं हुआ है।
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आरटीआई के जवाब में दी जानकारी
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग और एक अन्य आरटीआई के जवाब में प्रशासन के कानून एवं अभियोजन विभाग ने कहा है कि पिछले साल में प्रशासन के विभिन्न विभागों में कर्मचारियों से संबंधित कितने केस, किन अदालतों में लंबित हैं, उनके पास इसकी जानकारी नहीं है। न ही ये पता है कि कर्मचारियों के खिलाफ केस लड़ने में कितने रुपये खर्चे गए हैं।

विभाग ने कहा कि उनके पास वकीलों का पैनल भी नहीं है। आरटीआई में बताया कि विभाग के पास कानून फीस देने के लिए कोई अलग से बजट नहीं है। हालांकि, दो साल में 43466 रुपये खर्च गए हैं। विभाग के जवाब से कई लोग हैरान हैं क्योंकि विभिन्न मामलों में पैरवी के लिए प्रशासन वकील भेजता है और उन्हें हजारों-लाखों में रुपये दिए जाते हैं। आरटीआई में बताया गया है कि विभाग का सुप्रीम कोर्ट में कोई केस लंबित नहीं है।

इस तरह के केसों में प्रशासन तैनात करता है वकील
प्रमोशन, ठेकेदार से संबंधित मामले, पे-पैरिटी (कम वेतन), रोस्टर का पालन न करने को लेकर, रिटायरमेंट बेनिफिट, इंक्रीमेंट, ट्रांसफर आदेश के खिलाफ केस, भर्ती से संबंधित, आउटसोर्स कर्मियों से संबंधित मामले, किसी कर्मी के टर्मिनेशन को चुनौती, पे-प्रोटेक्शन नहीं देने के खिलाफ, पे-ग्रेड, ड्राइवर-कंडक्टर के एक्सीडेंटल केस, विजिलेंस केस, गबन के मामले, पुलिसकर्मियों के केस समेत अन्य हैं। इसके अलावा कई केस होते हैं, जिनमें अदालतें प्रशासन को पार्टी बनाती हैं। प्रशासन के कर्मचारियों से संबंधित 99 फीसदी केस कैट में जाते हैं, जहां पहली सुनवाई तक पहुंचने में ही छह महीने से एक साल लग जाते हैं।

झूठ बोल रहा है विभागः आरके गर्ग
आरटीआई एक्टिविस्ट आरके गर्ग ने कहा कि प्रशासन का कानून विभाग झूठ बोल रहा है। ऐसा नहीं है कि वकीलों को फीस देने के लिए विभाग के पास बजट न हो। जवाब में कहा गया है कि दो साल में सिर्फ 43466 रुपये खर्च किए गए हैं। ये जानकारी भी सही नहीं है। गर्ग ने कहा कि यह चिंता की बात है कि जो विभाग दूसरों को राय देता है, उसके पास खुद ही कोई पैनल नहीं है। न ही ऑडिट हुआ है। ऐसे कैसे हो सकता है कि प्रशासन का कानून विभाग के पास हाईकोर्ट में केस लड़ने के लिए वकील हैं, लेकिन उन्हें पैसे कितने दिए गए इसकी जानकारी न हो। गर्ग ने कहा कि विभाग के जवाब से वह इस कदर आहत हुए कि अपील भी फाइल नहीं की, क्योंकि कोई भी विभाग इतना झूठ कैसे बोल सकता है। उन्होंने कहा कि विभाग में व्यापक स्तर पर बदलाव की जरूरत है और पारदर्शिता होनी चाहिए।


 
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