चंडीगढ़: अब एकांतवास में मरीजों को नहीं मिलेगा पल्स ऑक्सीमीटर, बाजार में भी किल्लत
अचानक से बढ़ी मांग के कारण बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर की कमी हो गई है। साथ ही उसके रेट में भी बढ़ोतरी हो गई है।
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चंडीगढ़ में कोरोना के बढ़ते मामलों के चलते शहर के स्वास्थ्य विभाग ने एकांतवास में रह रहे मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर देना बंद कर दिया है। निदेशक स्वास्थ्य का कहना है कि एक साथ हजारों मरीजों को पल्स ऑक्सीमीटर देना संभव नहीं है।
वहीं दूसरी तरफ अचानक से बढ़ी मांग के कारण बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर की कमी हो गई है। साथ ही उसके रेट में भी बढ़ोतरी हो गई है। होलसेल विक्रेताओं का कहना है कि पहले जहां 10 पल्स ऑक्सीमीटर की जरूरत पड़ती थी, वहीं अब 10 हजार की मांग हो रही है। खपत के अनुरूप आपूर्ति सुनिश्चित न होने से कालाबाजारी जैसी स्थिति उत्पन्न होने लगी है। फिलहाल लोग कोरोना से बचाव के लिए घर पर ही दिनभर में कई बार ऑक्सीजन का स्तर चेक कर रहे हैं।
ऐसे बढ़ी कीमत
700 से 800 रुपये कीमत थी शुरुआती दौर में
अब दो से ढाई हजार तक पहुंच गई कीमत
ऐसे करें ऑक्सीमीटर का उपयोग
- ऑक्सीमीटर का उपयोग करने से पहले उंगली को साफ कर लें।
- उंगली पर नेलपॉलिश या रंग आदि न लगा हो।
- ऑक्सीमीटर को पूरे एक मिनट तक उंगली पर लगाकर रखें।
- जब रीडिंग थम जाएं तब उस रीडिंग को देखें।
- यदि ऑक्सीमीटर में रीडिंग नहीं थम रही है तो स्वस्थ व्यक्ति पर उसे उपयोग करके देखें।
ऐसे करता है काम
जीएमएसएच- 16 में कोविड के नोडल ऑफिसर डॉ. हनी साहनी ने बताया कि कोरोना पीड़ित मरीज के खून में ऑक्सीजन की कमी होने पर मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। पल्स ऑक्सीमीटर मरीज के हाथ की उंगली में लगाया जाता है। ऑक्सीमीटर में लगे सेंसर बताते हैं कि खून में मौजूद ऑक्सीजन का प्रवाह कैसा है। ऑक्सीजन के प्रवाह की रीडिंग SpO2 में आती है। यह रीडिंग ऑक्सीमीटर की डिजिटल स्क्रीन पर दिखाई देती है।
किस उंगली में लगाएं पल्स ऑक्सीमीटर
डॉ. साहनी ने बताया कि अधिकतर डॉक्टर पल्स ऑक्सीमीटर को हाथ की बीच की या तर्जनी (अंगूठे के पास वाली) उंगली में लगाते हैं। वैसे इसे हाथ या पैर, दोनों में से किसी भी उंगली या अंगूठे में लगाकर ऑक्सीजन लेवल की जांच की जा सकती है।
कितनी बार लें पल्स ऑक्सीमीटर से रीडिंग
पल्स ऑक्सीमीटर से ऑक्सीजन लेवल की एक बार रीडिंग लेना काफी नहीं होता। जीएमएसएच- 16 के फिजिशियन डॉ. मुनीश चुग ने बताया कि कम से कम तीन बार लगातार रीडिंग लेनी चाहिए ताकि सही रिजल्ट का पता चल सके। लगातार तीन बार रीडिंग लेने में करीब 10 मिनट का समय लगेगा। इस तरह दिन में 3 बार (सुबह, दोपहर और शाम) रीडिंग लेनी चाहिए। हर बार की रीडिंग को एक चार्ट बनाकर लिखकर रख लें ताकि डॉक्टर को दिखाया जा सके।
बाजार में ब्लूटूथ पल्स ऑक्सीमीटर भी मौजूद
डॉ. मनीष ने बताया कि अब बाजार में ब्लूटूथ पल्स ऑक्सीमीटर भी मौजूद हैं। इसका एप होता है, जिसे स्मार्टफोन में इंस्टॉल करते हैं। फिर एप के जरिए स्मार्टफोन का पल्स ऑक्सीमीटर से कनेक्ट कर देते हैं। पल्स ऑक्सीमीटर में जो रीडिंग आती है वह एप में रिकॉर्ड हो जाती है।
कितना होना चाहिए ऑक्सीजन लेवल
एक सामान्य शख्स के खून में ऑक्सीजन का लेवल या कहें कि SpO2 का लेवल 94 प्रतिशत से 100 प्रतिशत के बीच और हार्ट रेट 60 से 100 बीट प्रति मिनट तक होना चाहिए। अगर किसी शख्स के खून में ऑक्सीजन का लेवल 94 प्रतिशत (पूरे दिन की तीनों रीडिंग) से कम है तो उसे डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। वहीं ऑक्सीजन का लेवल 90 प्रतिशत या इससे कम हो जाता है तो मरीज को अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत होती है।
इन बातों का रखें ध्यान
- पल्स ऑक्सीमीटर को ऑन करें। इसके बाद उसमें कोई बॉलपेन या पेंसिल लगाएं और चेक करें। अगर रीडिंग आए तो समझ लें कि वह पल्स ऑक्सीमीटर बेकार है।
- अगर बॉलपेन या पेंसिल लगाने पर कोई रीडिंग न आए तो उसे अपने हाथ की बीच की उंगली में लगाएं और रीडिंग चेक करें। अगर आप पूरी तरह से स्वस्थ हैं तो आपके खून में ऑक्सीजन का लेवल (SpO2) 94 से 100% के बीच होना चाहिए।
- इसी तरह कम से कम तीन बार रीडिंग लें। अगर ऑक्सीजन का लेवल 94 से 100 प्रतिशत के बीच रहे तो उस पल्स ऑक्सीमीटर को सही माना जा सकता है।
शुरुआती दौर में जब एक्टिव केस कम थे, तब स्वास्थ्य विभाग होम आइसोलेशन किट में पल्स ऑक्सीमीटर भी देता था ताकि मरीज घर पर अपने ऑक्सीजन की जांच करते रहे। मौजूदा समय में 8000 से ज्यादा एक्टिव केस हो चुके हैं। ऐसे में प्रत्येक मरीज को पल्स ऑक्सीमीटर देना संभव नहीं है। -डॉ. अमनदीप कंग, निदेशक स्वास्थ्य
अचानक से बढ़ी डिमांड से बाजार में पल्स ऑक्सीमीटर की कमी हो गई है। पहले महीने भर में 10 पल्स ऑक्सीमीटर बिकते थे। अब यह संख्या 10 हजार से ज्यादा हो गई है। इसके कारण उसकी कीमत भी तेजी से बढ़ रही है। - जे के सेठी, होल सेलर( मेडिकल)