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Chandigarh Court Firing: गैंगस्टरों के खिलाफ केस लड़ने वाले सरकारी वकीलों को भी सताने लगा जान का खतरा
Wed, 07 Aug 2024 09:52 PM IST
अंकेश ठाकुर
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: अंकेश ठाकुर
Updated Wed, 07 Aug 2024 09:52 PM IST
सार
चंडीगढ़ जिला अदालत में हुए गोलीकांड के बाद सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी वकीलों को भी अपनी जान का खतरा सता रहा है। क्योंकि सरकारी अधिवक्ता गैंगस्टरों के खिलाफ केस लड़ते हैं।
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चंडीगढ़ जिला कोर्ट में फायरिंग
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
चंडीगढ़ जिला अदालत परिसर में बीते शनिवार को हुए गोलीकांड के बाद लगातार सुरक्षा पर सवाल उठ रहे हैं। जिला अदालत पब्लिक प्रॉसिक्यूटर एसोसिएशन ने घटना पर दुख जताते हुए सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है। वकीलों का कहना है कि अदालत में कई खूंखार अपराधियों व गैंगस्टरों के केस लग रहे हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम बेहद जरूरी हैं।
पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू ने फैमिली कोर्ट में अपने दामाद हरप्रीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एसोसिएशन ने घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अदालत में पुलिस सुरक्षा होने के बावजूद कोई व्यक्ति हथियार लेकर कैसे पहुंच गया, जबकि अदालत परिसर की चारों मंजिलों (ग्राउंड से थर्ड फ्लोर) की एंट्री गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सुरक्षा में चूक की वजह से यह घटना हुई है। अदालत परिसर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो सके और वकीलों व आम लोगों की सुरक्षा बनी रही।
एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट हुक्म सिंह ने कहा कि अदालत में कई खूंखार अपराधियों व गैंगस्टरों के केस चल रहे हैं। सरकारी वकील अपराधियों के खिलाफ केस लड़ते हैं। गैंगस्टरों के गुर्गे भी पेशी के लिए आते रहते हैं। अगर सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं होंगे तो इससे सरकारी वकीलों को भी खतरा है। वहीं, सरकारी वकीलों का कहना है कि सुरक्षा में जो भी खामियां हैं, उनमें जल्द सुधार होना चाहिए।
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इन अपराधियों के चल रहे केस
जिला अदालत में कई खूंखार अपराधियों के मामले लंबित हैं। इसके अलावा कई गैंगस्टरों के खिलाफ केस चल रहे हैं। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, संपत नेहरा, गोल्डी बराड़, आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा, राजन भट्टी, गौरव पटियाल उर्फ लक्की, नीरज गुप्ता उर्फ चस्का, दीपक मान, दीपक बनूड़, हेरी चड्ढा, सौरभ पटियाल जैसे अपराधियों का नाम शामिल है।
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पंजाब पुलिस के पूर्व एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू ने फैमिली कोर्ट में अपने दामाद हरप्रीत सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। एसोसिएशन ने घटना पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिला अदालत में पुलिस सुरक्षा होने के बावजूद कोई व्यक्ति हथियार लेकर कैसे पहुंच गया, जबकि अदालत परिसर की चारों मंजिलों (ग्राउंड से थर्ड फ्लोर) की एंट्री गेट पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं। एसोसिएशन का कहना है कि सुरक्षा में चूक की वजह से यह घटना हुई है। अदालत परिसर की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की घटना न हो सके और वकीलों व आम लोगों की सुरक्षा बनी रही।
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एसोसिएशन के प्रधान एडवोकेट हुक्म सिंह ने कहा कि अदालत में कई खूंखार अपराधियों व गैंगस्टरों के केस चल रहे हैं। सरकारी वकील अपराधियों के खिलाफ केस लड़ते हैं। गैंगस्टरों के गुर्गे भी पेशी के लिए आते रहते हैं। अगर सुरक्षा के कड़े इंतजाम नहीं होंगे तो इससे सरकारी वकीलों को भी खतरा है। वहीं, सरकारी वकीलों का कहना है कि सुरक्षा में जो भी खामियां हैं, उनमें जल्द सुधार होना चाहिए।
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इन अपराधियों के चल रहे केस
जिला अदालत में कई खूंखार अपराधियों के मामले लंबित हैं। इसके अलावा कई गैंगस्टरों के खिलाफ केस चल रहे हैं। इनमें गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, संपत नेहरा, गोल्डी बराड़, आतंकी हरविंदर सिंह रिंदा, राजन भट्टी, गौरव पटियाल उर्फ लक्की, नीरज गुप्ता उर्फ चस्का, दीपक मान, दीपक बनूड़, हेरी चड्ढा, सौरभ पटियाल जैसे अपराधियों का नाम शामिल है।