{"_id":"5a1e950d4f1c1b87698beabb","slug":"chandigarh-court-punished-two-boys-in-different-way","type":"story","status":"publish","title_hn":"बिना लाइसेंस के बेच रहे थे खाना, कोर्ट ने दो को सुनाई अनोखी सजा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बिना लाइसेंस के बेच रहे थे खाना, कोर्ट ने दो को सुनाई अनोखी सजा
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 29 Nov 2017 04:38 PM IST
विज्ञापन
कोर्ट
- फोटो : सांकेतिक चित्र
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बिना फूड लाइसेंस खाना सर्व करने के मामले में चंडीगढ़ जिला अदालत ने दो लोगों को अनोखी सजा सुनाई और जुर्माना भी लगाया। सेक्टर-26 स्थित ब्रयू इस्टेट (माइक्रोब्यूरी) के जनरल मैनेजर (जीएम) नरेंद्र कुमार और ब्रयू मास्टर मनमोहन सिंह को कोर्ट की कार्रवाई चलने तक कोर्ट रूम में खड़ा रहने की सजा (टिल द राइजिंग कोर्ट) सुनाई। साथ ही दोनों पर 20-20 हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
अदालत ने यह कार्रवाई फूड सेफ्टी विभाग की ओर से दायर शिकायत पर फैसला सुनाते हुए की। शिकायत के अनुसार विभाग की टीम ने फूड सेफ्टी आफिसर (एफएसओ) भारत कन्नौजिया के नेतृत्व में सेक्टर-26 स्थित रॉक एंड स्ट्राम हॉस्पिटेलिटी की यूनिट ब्रयू इस्टेट में निरीक्षण किया था। उस वक्त माइक्रोब्यूरी में काफी ग्राहक थे। उन्हें खाना जैसे दाल, चावल, चपाती, पास्ता, पिज्जा आदि सर्व किया जा रहा था।
विभाग ने माइक्रोब्यूरी से फूड लाइसेंस दिखाने को कहा था तो जनरल मैनेजर नरेंद्र कुमार और ब्रयू मास्टर मनमोहन सिंह कोई लाइसेंस नहीं दिखा सके। फूड सेफ्टी आफिसर ने उनका चालान किया था। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि चालान के वक्त विभाग की ओर से कोई इंडिपेंडेंट विटनेस नहीं बनाया गया था। इसके अलावा एफएसओ ने खाने या रॉ मैटिरियल के कोई सैंपल नहीं लिए थे। उन्होंने पूरे केस को झूठा बताया था।
विज्ञापन
कहा कि ऐसी कोई रेड या निरीक्षण नहीं किया गया था। उनका कहना था कि उनके पास 4 अगस्त 2016 तक फूड लाइसेंस की छूट थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई।
दया की अपील की थी
दोषियों की ओर से अदालत से उनके खिलाफ सजा सुनाए जाने से पहले दया बरतने की अपील की गई थी। उनका कहना था कि वह अपने-अपने घर में कमाने वाले अकेले शख्स हैं। उन्हें इससे पहले कभी किसी मामले में कोई सजा नहीं सुनाई गई है इसलिए उन्हें सजा सुनाए जाते वक्त नरमी बरती जाए।
विज्ञापन
अदालत ने यह कार्रवाई फूड सेफ्टी विभाग की ओर से दायर शिकायत पर फैसला सुनाते हुए की। शिकायत के अनुसार विभाग की टीम ने फूड सेफ्टी आफिसर (एफएसओ) भारत कन्नौजिया के नेतृत्व में सेक्टर-26 स्थित रॉक एंड स्ट्राम हॉस्पिटेलिटी की यूनिट ब्रयू इस्टेट में निरीक्षण किया था। उस वक्त माइक्रोब्यूरी में काफी ग्राहक थे। उन्हें खाना जैसे दाल, चावल, चपाती, पास्ता, पिज्जा आदि सर्व किया जा रहा था।
विज्ञापन
विभाग ने माइक्रोब्यूरी से फूड लाइसेंस दिखाने को कहा था तो जनरल मैनेजर नरेंद्र कुमार और ब्रयू मास्टर मनमोहन सिंह कोई लाइसेंस नहीं दिखा सके। फूड सेफ्टी आफिसर ने उनका चालान किया था। वहीं बचाव पक्ष ने दलील दी कि चालान के वक्त विभाग की ओर से कोई इंडिपेंडेंट विटनेस नहीं बनाया गया था। इसके अलावा एफएसओ ने खाने या रॉ मैटिरियल के कोई सैंपल नहीं लिए थे। उन्होंने पूरे केस को झूठा बताया था।
विज्ञापन
कहा कि ऐसी कोई रेड या निरीक्षण नहीं किया गया था। उनका कहना था कि उनके पास 4 अगस्त 2016 तक फूड लाइसेंस की छूट थी। इसके बावजूद उनके खिलाफ चालान की कार्रवाई की गई।
दया की अपील की थी
दोषियों की ओर से अदालत से उनके खिलाफ सजा सुनाए जाने से पहले दया बरतने की अपील की गई थी। उनका कहना था कि वह अपने-अपने घर में कमाने वाले अकेले शख्स हैं। उन्हें इससे पहले कभी किसी मामले में कोई सजा नहीं सुनाई गई है इसलिए उन्हें सजा सुनाए जाते वक्त नरमी बरती जाए।