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चंडीगढ़ कोर्ट का फैसला: पंचकूला में 2017 में हुए दंगों के मामले में छह डेरा अनुयायी बरी, ये रहा कारण
Tue, 18 Mar 2025 07:34 AM IST
निवेदिता वर्मा
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Tue, 18 Mar 2025 07:34 AM IST
सार
हरियाणा के रहने वाले छह लोगों पर पंचकूला में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद चंडीगढ़ में हिंसा की योजना बनाने का आरोप था।
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Gurumeet ram rahim
- फोटो : ANI
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विस्तार
2017 में पंचकूला व आसपास हुए दंगों के मामलों में चंडीगढ़ जिला कोर्ट ने गवाहों के बयानों में विरोधाभास व सबूतों के अभाव में डेरा सिरसा के छह अनुयायियों को बरी कर दिया।
मामले में मनीमाजरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इन पर पंचकूला में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद चंडीगढ़ में हिंसा की योजना बनाने का आरोप था। बरी किए गए लोगों में मनिंदर सिंह, रंजीत कुमार, धर्मिंदर, कृष्ण पाल, अनूप सिंह और सुखविंदर सिंह शामिल हैं। ये हरियाणा के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। 25 अगस्त 2017 को एसआई रोहित के बयानों पर मनीमाजरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
एफआईआर में कहा गया था कि मनसा देवी रोड, ढिल्लों बैरियर और हाउसिंग बोर्ड लाइट पॉइंट पर तीन पुलिस चौकियां अस्थाई तौर पर बनाई गई थीं, ताकि डेरा मुखी की विशेष सीबीआई अदालत पंचकूला में पेशी के दौरान कानून और व्यवस्था बनाई रखी जा सके। उसे दोषी ठहराए जाने के बाद सफारी सूट पहने छह निजी सुरक्षा गार्डों ने कथित तौर पर हिंसा भड़काने के इरादे से जिप्सी के साथ चंडीगढ़ में जबरन घुसने का प्रयास किया। इनकी तलाशी ली तो 7.65 एमएम की पिस्तौल, 25 कारतूस, लोहे की रॉड और अन्य संदिग्ध वस्तुएं बरामद हुईं थीं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि हिंसा में ये आरोपी शामिल थे।
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मामले में मनीमाजरा थाने में एफआईआर दर्ज हुई थी। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप साबित करने में विफल रहा। इन पर पंचकूला में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को दोषी ठहराए जाने के बाद चंडीगढ़ में हिंसा की योजना बनाने का आरोप था। बरी किए गए लोगों में मनिंदर सिंह, रंजीत कुमार, धर्मिंदर, कृष्ण पाल, अनूप सिंह और सुखविंदर सिंह शामिल हैं। ये हरियाणा के अलग-अलग जिलों के रहने वाले हैं। 25 अगस्त 2017 को एसआई रोहित के बयानों पर मनीमाजरा थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी।
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एफआईआर में कहा गया था कि मनसा देवी रोड, ढिल्लों बैरियर और हाउसिंग बोर्ड लाइट पॉइंट पर तीन पुलिस चौकियां अस्थाई तौर पर बनाई गई थीं, ताकि डेरा मुखी की विशेष सीबीआई अदालत पंचकूला में पेशी के दौरान कानून और व्यवस्था बनाई रखी जा सके। उसे दोषी ठहराए जाने के बाद सफारी सूट पहने छह निजी सुरक्षा गार्डों ने कथित तौर पर हिंसा भड़काने के इरादे से जिप्सी के साथ चंडीगढ़ में जबरन घुसने का प्रयास किया। इनकी तलाशी ली तो 7.65 एमएम की पिस्तौल, 25 कारतूस, लोहे की रॉड और अन्य संदिग्ध वस्तुएं बरामद हुईं थीं। शिकायतकर्ता का आरोप था कि हिंसा में ये आरोपी शामिल थे।
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