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पीजीआई में पूर्व पंजीकरण वाले मरीजों के लिए फिजिकल ओपीडी शुरू
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चंडीगढ़। पीजीआई में टेलीकंसल्टेशन और वेबसाइट पर ऑनलाइन के पूर्व पंजीकरण वाले मरीजों को सोमवार को फिजिकल ओपीडी में देखा गया। हालांकि, अभी काउंटर पर पंजीकरण नहीं किया जा रहा है। पंजाब-हरियाणा समेत अन्य राज्यों से भारी संख्या में मरीज पहुंचे। ओपीडी खुलने के बाद पहले दिन पीजीआई में मरीजों की लंबी कतार दिखी। पीजीआई ओपीडी के सामने मल्टीलेवल पार्किंग में सुबह 6 बजे से ही लोग टोकन लेने के लिए लाइनों में खड़े हो गए।
अभी पीजीआई में टेलीकंसल्टेशन और वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही डॉक्टर मरीजों को फोन कर बात कर रहे हैं। डॉक्टर को बीमारी बताने के बाद उन्हें आवश्यक होने पर ही बुलाया जा रहा है या अप्वाइंटमेंट मिल सकता है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर मरीज को समय और दिन तय कर बताएंगे, जिसके बाद तय दिन पर मरीजों को ओपीडी आना होगा। सोमवार को टोकन देने के बाद मरीजों को डॉक्टर के पास जाने की अनुमति दी गई। कोरोना के चलते काफी समय से फिजिकल ओपीडी बंद थी। मरीज हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर दवाइयां ले रहे थे। मल्टीलेवल पार्किंग हाल मरीजों से भरा दिखाई दिया। टोकन के लिए दो से तीन घंटे लग गए। हालांकि, जिनकी हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें पहले डॉक्टर के पास भेज दिया गया।
दो घंटे लाइन में खड़े होकर मिला टोकन
मेरी मां हरभजन कौर कैंसर से पीड़ित हैं। उनका 2017 से पीजीआई में इलाज चल रहा है। 18 मार्च का अप्वाइंटमेंट दिया गया था, लेकिन उसके बाद कुछ जरूरी जांच करवाने को कहा गया। दोबारा फोन करने पर 21 जून की तारीख मिली। दो घंटे लाइन में खड़े होने के बाद टोकन मिला। काफी समस्या झेलनी पड़ी।
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-अमरीक, लुधियाना पंजाब
मरीज ज्यादा होने से तीन घंटे बाद आया नंबर
मेरे घुटने की पिछली साइड में रसोली की समस्या है। 6 महीने पहले से यहां इलाज पर चल रहा है। डॉक्टर ने घुटने के आपरेशन के लिए कहा है। ओपीडी बंद होने से इलाज आगे नहीं बढ़ पाया। कोरोना के कारण बंद ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहे थे। सुबह 8 बजे आए थे। मरीज ज्यादा होने के कारण तीन घंटे बाद नंबर आया है।
-हरदीप कुमार, लुधियाना पंजाब
तीन महीने से दर्द से हूं परेशान
लगभग 3 महीने से ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहा हूं। मेरे पैर में काफी समस्या है, जिससे चल नहीं पाता हूं। कई बार फोन किया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिली। पढ़ा-लिखा नहीं हूं। ऑनलाइन संपर्क करने की जानकारी नहीं है। कल पता चला कि पीजीआई में इलाज शुरू हो गया है, इसलिए इलाज कराने पहुंचा हूं। तीन महीने से दर्द से काफी परेशान हूं।
-राजपाल, हरियाणा
दो महीने से इलाज करवाने की थी प्रतीक्षा
दो महीने पहले टांग में रॉड डाली गई थी। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि मुझे कैंसर है। उसके बाद से ओपीडी खुलने का इंतजार कर रही थी। दो महीने से काफी तनाव है। मेरे साथ-साथ बच्चों को भी काफी तनाव था। डॉक्टर से बात करके आज चेकअप कराने आए हैं। टोकन लेने के लिए काफी समस्या हुई।
-हरप्रीत कौर, माछीवाड़ा पंजाब
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अभी पीजीआई में टेलीकंसल्टेशन और वेबसाइट पर ऑनलाइन पंजीकरण के बाद ही डॉक्टर मरीजों को फोन कर बात कर रहे हैं। डॉक्टर को बीमारी बताने के बाद उन्हें आवश्यक होने पर ही बुलाया जा रहा है या अप्वाइंटमेंट मिल सकता है। डॉक्टर जरूरत पड़ने पर मरीज को समय और दिन तय कर बताएंगे, जिसके बाद तय दिन पर मरीजों को ओपीडी आना होगा। सोमवार को टोकन देने के बाद मरीजों को डॉक्टर के पास जाने की अनुमति दी गई। कोरोना के चलते काफी समय से फिजिकल ओपीडी बंद थी। मरीज हेल्पलाइन नंबर पर फोन कर दवाइयां ले रहे थे। मल्टीलेवल पार्किंग हाल मरीजों से भरा दिखाई दिया। टोकन के लिए दो से तीन घंटे लग गए। हालांकि, जिनकी हालत ज्यादा गंभीर थी, उन्हें पहले डॉक्टर के पास भेज दिया गया।
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दो घंटे लाइन में खड़े होकर मिला टोकन
मेरी मां हरभजन कौर कैंसर से पीड़ित हैं। उनका 2017 से पीजीआई में इलाज चल रहा है। 18 मार्च का अप्वाइंटमेंट दिया गया था, लेकिन उसके बाद कुछ जरूरी जांच करवाने को कहा गया। दोबारा फोन करने पर 21 जून की तारीख मिली। दो घंटे लाइन में खड़े होने के बाद टोकन मिला। काफी समस्या झेलनी पड़ी।
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-अमरीक, लुधियाना पंजाब
मरीज ज्यादा होने से तीन घंटे बाद आया नंबर
मेरे घुटने की पिछली साइड में रसोली की समस्या है। 6 महीने पहले से यहां इलाज पर चल रहा है। डॉक्टर ने घुटने के आपरेशन के लिए कहा है। ओपीडी बंद होने से इलाज आगे नहीं बढ़ पाया। कोरोना के कारण बंद ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहे थे। सुबह 8 बजे आए थे। मरीज ज्यादा होने के कारण तीन घंटे बाद नंबर आया है।
-हरदीप कुमार, लुधियाना पंजाब
तीन महीने से दर्द से हूं परेशान
लगभग 3 महीने से ओपीडी खुलने का इंतजार कर रहा हूं। मेरे पैर में काफी समस्या है, जिससे चल नहीं पाता हूं। कई बार फोन किया, लेकिन प्रतिक्रिया नहीं मिली। पढ़ा-लिखा नहीं हूं। ऑनलाइन संपर्क करने की जानकारी नहीं है। कल पता चला कि पीजीआई में इलाज शुरू हो गया है, इसलिए इलाज कराने पहुंचा हूं। तीन महीने से दर्द से काफी परेशान हूं।
-राजपाल, हरियाणा
दो महीने से इलाज करवाने की थी प्रतीक्षा
दो महीने पहले टांग में रॉड डाली गई थी। ऑपरेशन के दौरान पता चला कि मुझे कैंसर है। उसके बाद से ओपीडी खुलने का इंतजार कर रही थी। दो महीने से काफी तनाव है। मेरे साथ-साथ बच्चों को भी काफी तनाव था। डॉक्टर से बात करके आज चेकअप कराने आए हैं। टोकन लेने के लिए काफी समस्या हुई।
-हरप्रीत कौर, माछीवाड़ा पंजाब