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Chandigarh : पानी पर सैनी को सभी दलों का समर्थन, मान सरकार ने नहीं माना केंद्र का फरमान

Sun, 04 May 2025 06:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 04 May 2025 06:30 AM IST
सार

दूसरी तरफ, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक दिन पहले केंद्र की ओर से हरियाणा को पानी देने के निर्देश को नहीं माना और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की बोर्ड बैठक का भी बहिष्कार कर दिया। 

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Chandigarh: All parties support Saini on water issue, Mann government did not accept Centre's order
भगवंत मान और नायब सैनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाखड़ा बांध से पानी को लेकर जारी विवाद के बीच हरियाणा सरकार की ओर से बुलाई गई बैठक में कांग्रेस, इनेलो, जजपा, आप समेत अन्य दलों ने एकजुट होकर पानी के मुद्दे पर हरियाणा सरकार को समर्थन दिया।

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दूसरी तरफ, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने एक दिन पहले केंद्र की ओर से हरियाणा को पानी देने के निर्देश को नहीं माना और भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) की बोर्ड बैठक का भी बहिष्कार कर दिया। 
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पंजाब सरकार ने शनिवार दोपहर बीबीएमबी चेयरमैन को पत्र लिखा कि बोर्ड बैठक निर्धारित करने से पहले रेगुलेशन 1976 की धारा-7 के तहत 7 दिन पहले नोटिस देना आवश्यक है, इसलिए बैठक स्थगित कर दी जाए।
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साथ ही तर्क दिया कि सोमवार को होने वाले पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र में बीबीएमबी की ओर से हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने के निर्णय पर चर्चा की जाएगी। राज्य सरकार विशेष सत्र की तैयारी में जुटी है। 

पंजाब और हिमाचल के बिना एक घंटे तक चली बोर्ड बैठक में तय किया गया है कि बीबीएमबी चेयरमैन पंजाब सरकार के साथ समन्वय करेंगे और नंगल बांध से पंजाब का नियंत्रण हटाने का अनुरोध करेंगे। साथ ही बीबीएमबी पंजाब सरकार से हरियाणा को 4500 क्यूसेक अतिरिक्त पानी देने की मांग भी दोहराएगा। यह भी तय हुआ है कि भाखड़ा बांध को भरने के दौरान पंजाब को भी अतिरिक्त पानी दिया जाएगा। 

उधर, हरियाणा की सर्वदलीय बैठक में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास करके पंजाब सरकार से अनुरोध किया गया कि 23 अप्रैल को बीबीएमबी की तकनीकी समिति और 30 अप्रैल को बीबीएमबी बोर्ड बैठक में लिए गए फैसलों को बिना शर्त लागू किया जाए। साथ ही हरियाणा को मिलने वाले पानी के हिस्से पर लगाई गई अमानवीय, अनुचित, अवैध और असांविधानिक रोक को तुरंत हटाया जाए।

पानी की समस्या के स्थायी निदान के लिए एसवाईएल का जल्द से जल्द निर्माण कराने की मांग भी की गई। कहा कि सभी कानूनी लड़ाई लड़ने व केंद्र के स्तर पर हरसंभव राजनीतिक प्रयास करने के लिए हरियाणा सरकार के साथ सभी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। 
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मान का रुख देखने के बाद उठाएंगे कदम, हरियाणा व राजस्थान का पानी पी रहा पंजाब : सीएम सैनी
बैठक के बाद सीएम सैनी ने कहा कि दिल्ली में हुई हार का बदला लेने के लिए पंजाब की आप सरकार ने हरियाणा के हक के लोगों का पानी रोका है। बीबीएमबी की बैठक और पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र का रुख देखने के बाद राज्य सरकार अगला कदम उठाएगी। यदि जरूरत पड़ी तो विधानसभा का विशेष सत्र बुलाएंगे और प्रधानमंत्री से मुलाकात करेंगे। उन्होंने दोनों राज्यों की जनता से शांति बनाए रखने की अपील की। 

17 फीसदी कम पानी मिल रहा...
सीएम सैनी ने दावा किया कि पंजाब आवंटित क्षमता से ज्यादा पानी इस्तेमाल कर रहा है। हरियाणा और राजस्थान का पानी भी पंजाब पी रहा है। हरियाणा के लिए कुल आवंटित क्षमता 12.55 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) है। मगर हरियाणा को 10.67 एमएएफ ही मिल रहा है। 1.88 एमएएफ रावी ब्यास का पानी एसवाईएल न बनने के कारण हरियाणा को नहीं मिल रहा है। वहीं, पंजाब के लिए कुल आवंटित क्षमता 14.67 एमएएफ है। मगर पंजाब 17.15 एमएएफ पानी का इस्तेमाल कर रहा है, हरियाणा को अपने आवंटित हिस्से से 17 फीसदी पानी कम मिल रहा है।

सात जिलों में सिर्फ 15 फीसदी पानी बचा...
सीएम ने कहा कि अतिरिक्त पानी नहीं मिलने से सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, कैथल, कुरुक्षेत्र, जींद और भिवानी में पेयजल संकट पैदा हो गया है। इन सात जिलों में 4931.9 करोड़ लीटर पेयजल चाहिए, मगर केवल 764.8 करोड़ लीटर पानी ही उपलब्ध है, जो मांग का मात्र 15.5 फीसदी है। 

मान की नसीहत, पानी  के लिए कत्ल हो जाते हैं 
जालंधर में एक कार्यक्रम में पंजाब के सीएम भगवंत मान ने कहा, पानी के लिए पंजाब में कत्ल हो जाया करते हैं, इसलिए पंजाब से एक भी बूंद पानी किसी को नहीं दिया जाएगा। जब वह खेतों में पानी लगाने जाते थे तो हमारी बारी 12.15 पर खत्म हो जाती थी। हमारे बगल वाला किसान अपनी तरफ पानी मोड़ने के लिए फावड़ा और कस्सी लेकर आता था। एक बार उससे किसी ने पूछा ऐसा क्यों करते हो, तो उसने बताया कि अगर पानी देरी से शुरू किया तो कस्सी तुम्हारे लिए इस्तेमाल होगी।

हिमाचल भी कूदा... सुक्खू ने कहा-हिमाचल के हक पर मिलकर लें फैसला
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने एक बार फिर से रॉयल्टी का मामला उठाया है। कहा, पंजाब-हरियाणा हमारे भाई हैं और इन्हें आपसी विवाद मिल-बैठकर सुलझाना चाहिए। बिजली प्रोजेक्टों की मुफ्त रॉयल्टी के मामले में हिमाचल को नीति के हिसाब से हक मिलना चाहिए।

सीएम बोले- दोनों राज्य जब बीबीएमबी की बैठक में आते हैं तो हमारे अधिकार भी संरक्षित रहें, इसलिए हिमाचल के हक पर दोनों राज्य मिलकर फैसला लें। नई दिल्ली में उन्होंने कहा कि जब हमने पानी से आय बढ़ानी की सोची तो दोनों राज्यों ने इसका विरोध किया। ऐसा नहीं करना चाहिए।

जहां तक कि बीबीएमबी की बात है तो वह केवल इतना कहना चाहते हैं कि जो पानी आता है, उसका अधिकतम बंटवारा हरियाणा, पंजाब और राजस्थान को होता है। जब हम बीबीएमबी से हक की बात करते हैं तो हमें उसमें अपना अधिकार नहीं मिलता है। उनका आपसी विवाद मिल-बैठकर सुलझना चाहिए। 

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