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चंडीगढ़ नगर निगम के फायर ब्रिगेड के ट्रेनिंग सेंटर प्रोजेक्ट पर लगी ब्रेक, प्रशासन ने जताई आपत्ति
Tue, 25 Feb 2020 02:38 PM IST
खुशबू गोयल
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
नवदीप मिश्रा, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Feb 2020 02:38 PM IST
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नगर निगम चंडीगढ़
- फोटो : अमर उजाला
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चंडीगढ़ नगर निगम के फायर ब्रिगेड के ट्रेनिंग सेंटर के प्रस्ताव को प्रशासन ने ठुकरा दिया है। चीफ आर्किटेक्ट ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ट्रेनिंग सेंटर के निर्माण पर खर्च होने वाली राशि निगम दिखाए। यदि निगम सदन में एजेंडा लेकर आया है तो फिर निगम के पास अपनी भी काफी जमीन है, वहां बना सकता है।
हाल ही में बजट मीटिंग में मेयर राजबाला मलिक ने अपने भाषण में कहा था कि फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण केलिए नागपुर की तर्ज पर ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा। वहां चंडीगढ़ के साथ ही हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
इसके अलावा शहर के विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों के बच्चों को भी समय-समय पर विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की योजना है। निगम ने इसके लिए प्रशासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। चीफ आर्किटेक्ट ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है निगम नियमानुसार ट्रेनिंग सेंटर नहीं बना रहा है, इसलिए इसके लिए अनुमति नहीं दी जा सकती।
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ज्ञात रहे कि गुजरात और नागपुर में पार्षदों के स्टडी टूर के दौरान इस प्रोजेक्ट के बारे में विचार हुआ था। तब से लेकर अब तक यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है।
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हाल ही में बजट मीटिंग में मेयर राजबाला मलिक ने अपने भाषण में कहा था कि फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को बेहतर प्रशिक्षण केलिए नागपुर की तर्ज पर ट्रेनिंग सेंटर खोला जाएगा। वहां चंडीगढ़ के साथ ही हिमाचल, पंजाब व हरियाणा के फायर ब्रिगेड कर्मचारियों को भी प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।
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इसके अलावा शहर के विभिन्न स्कूलों व कॉलेजों के बच्चों को भी समय-समय पर विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण देने की योजना है। निगम ने इसके लिए प्रशासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा था। चीफ आर्किटेक्ट ने इस पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है निगम नियमानुसार ट्रेनिंग सेंटर नहीं बना रहा है, इसलिए इसके लिए अनुमति नहीं दी जा सकती।
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ज्ञात रहे कि गुजरात और नागपुर में पार्षदों के स्टडी टूर के दौरान इस प्रोजेक्ट के बारे में विचार हुआ था। तब से लेकर अब तक यह प्रोजेक्ट लटका हुआ है।
50 लाख की आबादी पर बनता है सेंटर
चीफ आर्किटेक्ट ने बताया कि इस प्रकार के ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए शहर की आबादी 50 लाख तक होना अनिवार्य है। वहीं, निगम ने इस ट्रेनिंग सेंटर के लिए 25 करोड़ रुपये मांगे हैं। निगम अपना रेवेन्यू बताए कि कहां से इतने रुपये लाएगा। पहले ही निगम के पास फंड की कमी है। सड़क बनाने के लिए भी अभी फंड नहीं है। ऐसी स्थिति में कैसे इतनी बड़ी राशि खर्च करेगा।
फायर विभाग ने कहा था कि गोवा में 18.02 लाख की आबादी है, इसके बावजूद वहां ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है। इस पर चीफ आर्किटेक्ट ने कहा है कि 2011 की जनगणना के अनुसार चंडीगढ़ की जनसंख्या 10.54 लाख है, इस हिसाब से 2031 में 16 लाख तक जनसंख्या हो सकेगी। नियमानुसार 50 लाख की जनसंख्या होनी चाहिए, इसलिए प्रस्ताव मंजूर को नहीं किया जा सकता है।
मनीमाजरा में काफी बड़ी भूमि है निगम के पास
चीफ आर्किटेक्ट ने कहा कि निगम को लगता है कि सेंटर बनाना जरूरी है तो उसके पास अपनी भूमि है मनीमाजरा में। इसके अलावा भी निगम के पास काफी जमीन है। वहां निगम अपनी राशि खर्च करके सेंटर का निर्माण करा सकता है। निगम प्रस्ताव बनाकर भेजे हम मंजूरी देने को तैयार हैं।
हाल ही में हुए हादसे के बाद बढ़ी थी जागरूकता की मांग
हाल ही में सेक्टर 32 में हुए हादसे में जागरूकता की कमी उजागर हुई थी। दो लड़कियों डर कर बाथरूम में बंद हो गई थीं, जबकि एक लड़की बेड के नीचे छिप गई थी। फायरकर्मियों का कहना यदि छात्राओं को प्रशिक्षण मिला होता तो वह बेहतर तरीके से अपना बचाव कर पातीं। उसके बाद शहर में आग से बचाव के लिए जागरूकता की मांग उठने लगी थी।
फायर विभाग ने कहा था कि गोवा में 18.02 लाख की आबादी है, इसके बावजूद वहां ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया है। इस पर चीफ आर्किटेक्ट ने कहा है कि 2011 की जनगणना के अनुसार चंडीगढ़ की जनसंख्या 10.54 लाख है, इस हिसाब से 2031 में 16 लाख तक जनसंख्या हो सकेगी। नियमानुसार 50 लाख की जनसंख्या होनी चाहिए, इसलिए प्रस्ताव मंजूर को नहीं किया जा सकता है।
मनीमाजरा में काफी बड़ी भूमि है निगम के पास
चीफ आर्किटेक्ट ने कहा कि निगम को लगता है कि सेंटर बनाना जरूरी है तो उसके पास अपनी भूमि है मनीमाजरा में। इसके अलावा भी निगम के पास काफी जमीन है। वहां निगम अपनी राशि खर्च करके सेंटर का निर्माण करा सकता है। निगम प्रस्ताव बनाकर भेजे हम मंजूरी देने को तैयार हैं।
हाल ही में हुए हादसे के बाद बढ़ी थी जागरूकता की मांग
हाल ही में सेक्टर 32 में हुए हादसे में जागरूकता की कमी उजागर हुई थी। दो लड़कियों डर कर बाथरूम में बंद हो गई थीं, जबकि एक लड़की बेड के नीचे छिप गई थी। फायरकर्मियों का कहना यदि छात्राओं को प्रशिक्षण मिला होता तो वह बेहतर तरीके से अपना बचाव कर पातीं। उसके बाद शहर में आग से बचाव के लिए जागरूकता की मांग उठने लगी थी।