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Chandigarh: सीवरेज सेस कम करने के प्रस्ताव पर राजी नहीं प्रशासन, निगम से पूछा-वित्तीय घाटा कैसे पूरा होगा

Fri, 02 Jun 2023 07:57 AM IST
निवेदिता वर्मा रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 02 Jun 2023 07:57 AM IST
सार

नगर निगम के प्रस्ताव पर प्रशासन ने कई आपत्तियां जताते हुए सवाल पूछे हैं। सबसे पहले कहा गया है कि सेस को कम करने से निगम को जो वित्तीय नुकसान होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी। साथ ही स्वच्छता रैंकिंग में एक स्कोर होता है जिसके तहत ऑपरेशन का 75 फीसदी पैसा रिकवर करना होता है।

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Chandigarh administration not in favor of reducing Sewerage cess
चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

चंडीगढ़ नगर निगम की 6 मार्च को हुई सदन की बैठक में सभी पार्षदों ने पानी के बिल में लगने वाले सीवरेज सेस को 30 फीसदी से 10 फीसदी करने का प्रस्ताव पास किया था। इसके बाद इसे मंजूरी के लिए प्रशासन को भेजा गया, लेकिन अब तक सेस कम नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार प्रशासन सेस कम करने के पक्ष में नहीं है। प्रशासन की तरफ से अब नगर निगम से कई सवाल पूछे गए हैं कि वह वित्तीय घाटे को कैसे पूरा करेंगे।

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ये मुद्दा मई माह में भी उठा था, जब लोगों के पास सीवरेस सेस 30 फीसदी जोड़कर पानी के बिल पहुंचे थे। शहरवासियों को मजबूरी में इन बिलों का भुगतान करना पड़ रहा है जबकि विपक्षी और सत्ता पक्ष के पार्षद इस पर चिंता जताते हुए इस पर जल्द निर्णय लेने की मांग कर रहे हैं। उधर, प्रशासन सेस को कम करने के पक्ष में नजर नहीं आ रहा है। 
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नगर निगम के प्रस्ताव पर प्रशासन ने कई आपत्तियां जताते हुए सवाल पूछे हैं। सबसे पहले कहा गया है कि सेस को कम करने से निगम को जो वित्तीय नुकसान होगा, उसकी भरपाई कैसे होगी। साथ ही स्वच्छता रैंकिंग में एक स्कोर होता है जिसके तहत ऑपरेशन का 75 फीसदी पैसा रिकवर करना होता है। अगर कोई शहर ऐसा नहीं कर पाता है तो उसका स्कोर कम होता है। ऐसी स्थिति में स्कोर गिरेगा तो उसका जिम्मेदार कौन होगा। नाम न छापने की शर्त पर प्रशासन एक अधिकारी ने बताया कि निगम की तरफ से जो प्रस्ताव आया है वह व्यावहारिक नहीं है। सेस कम करने से वित्तीय घाटा बढ़ेगा जिससे कुछ समय बाद लोगों को ही नुकसान होगा, क्योंकि पैसे नहीं होने से सेवाएं प्रभावित होंगी। इसके अलावा स्वच्छता रैंकिंग भी गिरेगी।


रैंकिंग में इंदौर अव्वल, वहां लगने वाले टैक्स की जानकारी मांगी
निगम की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव पर मुहर लगाने से पहले प्रशासन ने सीवरेज सेस की अन्य शहरों से तुलना करने के लिए विभिन्न शहरों में लगने वाले टैक्स की जानकारी मांगी है। नगर निगम की तरफ से पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में लगने वाले टैक्स की जानकारी दी गई थी, लेकिन बीते दिनों प्रशासन स्वच्छता रैंकिंग में अव्वल रहने वाले शहरों में लगने वाले टैक्स की जानकारी मांगी है ताकि उन शहरों से चंडीगढ़ की तुलना की जा सके। ये जानकारी आने के बाद ही प्रशासन की तरफ से सेस को कम करने या नहीं करने पर फैसला लिया जाएगा।

चुनावी साल, इसलिए संशोधन के साथ कुछ फीसदी सेस हो सकता है कम
अगले साल लोकसभा चुनाव है। ऐसे में बिजली और पानी के बिल हमेशा से लोगों से जुड़े होते हैं और यह चुनावी मुद्दा भी बनते हैं। सभी पार्टियां सीवरेज सेस को 30 फीसदी से कम करने के पक्ष में हैं। ऐसे में सूत्रों के अनुसार प्रशासन सीवरेज सेस को 10 फीसदी न कर 30 फीसदी से कुछ कम कर सकता है। हालांकि प्रशासन और नगर निगम के अधिकारी भी इसके पक्ष में होते नजर नहीं आ रहे हैं। जुलाई 2021 में जब पहली बार सदन ने सीवरेज सेस को 10 फीसदी करने का प्रस्ताव पास किया था तो उस समय के आयुक्त केके यादव ने प्रस्ताव पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी, जिसे बाद में प्रशासन को भेजा गया था। हालांकि बाद में पूर्व प्रशासक ने दामों के बढ़ने पर एक साल के लिए रोक लगा दी थी।

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