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वर्दी पर रिश्वत के दाग को लेकर चंडीगढ़ प्रशासन गंभीर, दी नसीहत- पुलिस कर्मियों को ईमानदारी सिखाओ
Tue, 25 Jun 2019 03:50 PM IST
खुशबू गोयल
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 25 Jun 2019 03:50 PM IST
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फाइल फोटो
खाकी पर रिश्वत के दाग को यूटी प्रशासन ने गंभीरता से लिया है। महकमे को बदनामी से बचाने और घूसखोर पुलिस कर्मियों पर शिकंजा कसने को प्रशासन ने कड़े निर्देश दिए हैं। भ्रष्टाचार में संलिप्त कर्मियों के खिलाफ प्रभावी और कड़े कदम उठाए जाने की बात कही जा रही है। बताते चलें कि हॉल ही में जिस प्रकार से रिश्वत लेने के मामले में कई पुलिस कर्मियों को सीबीआई ने रंगे हाथ पकड़ा है, उससे यूटी प्रशासन की छवि को धक्का लगा है। इससे आहत प्रशासन ने अब घूसखोर पुलिस कर्मियों पर नकेल कसने के लिए ठोस रणनीति बनाने के की बात कही है।
यूटी प्रशासक और पंजाब के गर्वनर वीपी सिंह बदनौर अपनी बेदाग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से पुलिस महकमे में जिस प्रकार से घूसखोरी के मामले सामने आ रहे हैं, उससे यूटी प्रशासन को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ है। कई मामलों में तो सीबीआई ने रंगे हाथ पुलिस कर्मियों को घूस लेते हुए गिरफ्तार भी किया है। हैरानी की बात यह है कि विभाग केआलाधिकारी भी घूसखोर पुलिस कर्मियों पर अब तक कोई कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। यही वजह है कि अब प्रशासन ने खुद ही भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस विभाग को कहा है।
प्रशासन ने पुलिस महकमे के आलाधिकारियों से साफ-साफ कहा है कि पुलिस कर्मियों को ईमानदारी से काम करने की नसीहत दें। अगर विभाग ऐसा नहीं कर पा रहा है तो इसकी वजह बताएं। इसके लिए हॉल ही में प्रशासक ने यूटी प्रशासन और पुलिस विभाग के अफसरों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग बुलाई थी, जिसमें घूसखोर पुलिस कर्मियों की कैसे पहचान की जाए और फिर इनसे कैसे निपटा जाए, इस पर प्रशासक की ओर से ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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यूटी प्रशासक और पंजाब के गर्वनर वीपी सिंह बदनौर अपनी बेदाग कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं, लेकिन बीते कुछ दिनों से पुलिस महकमे में जिस प्रकार से घूसखोरी के मामले सामने आ रहे हैं, उससे यूटी प्रशासन को बड़ी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ है। कई मामलों में तो सीबीआई ने रंगे हाथ पुलिस कर्मियों को घूस लेते हुए गिरफ्तार भी किया है। हैरानी की बात यह है कि विभाग केआलाधिकारी भी घूसखोर पुलिस कर्मियों पर अब तक कोई कार्रवाई करने में नाकाम रहे हैं। यही वजह है कि अब प्रशासन ने खुद ही भ्रष्टाचारियों पर नकेल कसने के लिए पुलिस विभाग को कहा है।
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प्रशासन ने पुलिस महकमे के आलाधिकारियों से साफ-साफ कहा है कि पुलिस कर्मियों को ईमानदारी से काम करने की नसीहत दें। अगर विभाग ऐसा नहीं कर पा रहा है तो इसकी वजह बताएं। इसके लिए हॉल ही में प्रशासक ने यूटी प्रशासन और पुलिस विभाग के अफसरों की एक उच्चस्तरीय मीटिंग बुलाई थी, जिसमें घूसखोर पुलिस कर्मियों की कैसे पहचान की जाए और फिर इनसे कैसे निपटा जाए, इस पर प्रशासक की ओर से ठोस रणनीति बनाने के निर्देश दिए गए हैं।
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इस घटना के बाद जागा प्रशासन
11 जून की दोपहर सेक्टर 34 में चेक बाउंस के एक मामले में कार्रवाई नहीं करने के एवज में पीओ सेल के हवलदार दलबीर सिंह को सीबीआई ने रंगे हाथ घूस लेते पकड़ा। घूसखोर हवलदार का मामला सामने आते ही यूटी प्रशासन हरकत में आ गया है। यूटी प्रशासक ने भ्रष्ट कर्मियों से कैसे निपटा जाए, इसके लिए प्रशासन के आलाधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद कड़े निर्देश जारी हुए। बैठक में एडवाइजर मनोज परिदा, डीजीपी संजय बेनीवाल, प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी अरुण कुमार गुप्ता सहित यूटी प्रशासन के आलाधिकारी मौजूद रहे।
केस- एक
28 जनवरी 2019 को मौली जागरां थाने के पूर्व एसएचओ बलजीत सिंह को सीबीआई ने 43 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
केस- दो
सेक्टर-31 के थाने के एडिशनल एसएचओ सब इंस्पेक्टर राजबीर सिंह को 4 जनवरी 2018 को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा था।
केस - तीन
अक्तूबर 2017 में सीबीआई ने सेक्टर-31 पुलिस स्टेशन में तत्कालीन सब इंस्पेक्टर मोहन को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
केस- एक
28 जनवरी 2019 को मौली जागरां थाने के पूर्व एसएचओ बलजीत सिंह को सीबीआई ने 43 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था।
केस- दो
सेक्टर-31 के थाने के एडिशनल एसएचओ सब इंस्पेक्टर राजबीर सिंह को 4 जनवरी 2018 को 10 हजार रुपये की रिश्वत लेने के मामले में सीबीआई ने पकड़ा था।
केस - तीन
अक्तूबर 2017 में सीबीआई ने सेक्टर-31 पुलिस स्टेशन में तत्कालीन सब इंस्पेक्टर मोहन को 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।