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चंडीगढ़ आएं और इस स्टाल पर चना भटूरा न खाएं तो समझ लो कुछ नहीं किया
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 14 May 2017 03:21 PM IST
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स्टाल पर चना भटूरा
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स्ट्रीट फूड के लिए चंडीगढ़ फेमस है। ऐसे में अगर आप यहां आए और इस स्टॉल पर चना भटूरा न खाएं तो समझ लो टूर पूरा ही नहीं हुआ। क्वालिटी और क्वांटिटी के साथ किफायती दामों में चना भटूरा और चना राइस देने वाला एक ऐसा ही एक नाम है श्याम बाबू एंड ब्रदर्स का। इन तीन भाइयों द्वारा तैयार किए गए चना भटूरा और चना राइस का दीवाना अब पूरा ट्राइसिटी हो चुका है।
इसकी खूबी है कि 40 साल बीते पर स्वाद नहीं बदला। इंडस्ट्रियल एरिया सिटी इंपोरियम के नजदीक इनकी रेहड़ी लगती है। संजू शर्मा ने बताया कि चना तैयार करने के लिए काबुली चना का इस्तेमाल किया जाता है और राइस भी बासमती होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ स्वादिष्ट चटनी, सलाद और रायता भी सर्व किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक भटूरे में डेढ़ सौ ग्राम का पेड़ा लगता है।
पहले दिन 40 पैसे की सेल
संजू शर्मा ने कहा कि उनके पिता सीताराम शर्मा ने 40 साल पहले जब काम शुरू किया तो इंडस्ट्रियल एरिया में कुछ भी नहीं था। छह बजे के बाद तो एकदम सन्नाटा हो जाता था। उन्होंने बताया कि पहले दिन 40 पैसे की दुकानदारी हुई थी। यह दुकानदारी एक सप्ताह के भीतर 40 रुपये तक पहुंच गई। अब तो यदि सुबह पैकिंग न करके रखी जाए तो डिलीवरी देना मुश्किल है।
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चार बजे उठ जाते हैं दोनों भाई
संजू शर्मा बताते हैं कि रात को चने भिगो दिए जाते हैं। चना बनाने के लिए उनके दोनों भाई सुबह चार बजे उठ जाते हैं। श्याम बाबू शर्मा और सुनील शर्मा दोनों ही मिलकर सुबह चने उबालने के लिए चढ़ा देते हैं। उनको उबालने में करीब चार घंटे का समय लगता है। इस बीच चना बनाने की तैयारी कर ली जाती है।
अपने पिसे हुए मसाले ही डालते हैं
संजू शर्मा ने कहा कि चने में स्वाद की प्रमुख वजह है उनके अपने घर में पिसे मसाले। उन्होंने कहा कि वह बाजार से साबुत मसाले लाते हैं और घर में ही उनकी पिसाई की जाती है। इससे क्वालिटी भी मेंटेन रहती है। इतना ही नहीं इनके मसाले एक विदेशी दंपति को इतना भाए कि अबकी बार वह मसाले इंग्लैंड ले गए।
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इसकी खूबी है कि 40 साल बीते पर स्वाद नहीं बदला। इंडस्ट्रियल एरिया सिटी इंपोरियम के नजदीक इनकी रेहड़ी लगती है। संजू शर्मा ने बताया कि चना तैयार करने के लिए काबुली चना का इस्तेमाल किया जाता है और राइस भी बासमती होते हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ स्वादिष्ट चटनी, सलाद और रायता भी सर्व किया जाता है। उन्होंने बताया कि एक भटूरे में डेढ़ सौ ग्राम का पेड़ा लगता है।
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पहले दिन 40 पैसे की सेल
संजू शर्मा ने कहा कि उनके पिता सीताराम शर्मा ने 40 साल पहले जब काम शुरू किया तो इंडस्ट्रियल एरिया में कुछ भी नहीं था। छह बजे के बाद तो एकदम सन्नाटा हो जाता था। उन्होंने बताया कि पहले दिन 40 पैसे की दुकानदारी हुई थी। यह दुकानदारी एक सप्ताह के भीतर 40 रुपये तक पहुंच गई। अब तो यदि सुबह पैकिंग न करके रखी जाए तो डिलीवरी देना मुश्किल है।
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चार बजे उठ जाते हैं दोनों भाई
संजू शर्मा बताते हैं कि रात को चने भिगो दिए जाते हैं। चना बनाने के लिए उनके दोनों भाई सुबह चार बजे उठ जाते हैं। श्याम बाबू शर्मा और सुनील शर्मा दोनों ही मिलकर सुबह चने उबालने के लिए चढ़ा देते हैं। उनको उबालने में करीब चार घंटे का समय लगता है। इस बीच चना बनाने की तैयारी कर ली जाती है।
अपने पिसे हुए मसाले ही डालते हैं
संजू शर्मा ने कहा कि चने में स्वाद की प्रमुख वजह है उनके अपने घर में पिसे मसाले। उन्होंने कहा कि वह बाजार से साबुत मसाले लाते हैं और घर में ही उनकी पिसाई की जाती है। इससे क्वालिटी भी मेंटेन रहती है। इतना ही नहीं इनके मसाले एक विदेशी दंपति को इतना भाए कि अबकी बार वह मसाले इंग्लैंड ले गए।