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चंपाकली का रामरुपैया का टैगोर थियेटर में मंचन
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चंडीगढ़। अगर आपको नाटक लिखना है तो नाटक लिखने का क्राफ्ट सीखना होगा। यह कहना है प्रसिद्ध थियेटर कलाकार और लेखक अशोक राही का। टैगोर थियेटर में अपने खास नाटक ‘चंपाकली का रामरुपैया’ के मंचन के लिए पहुंचे अशोक राही ने कहा कि नाटकों को साहित्य के साथ जोड़ा जाता है क्योंकि ज्यादातर नाटक साहित्यकारों ने ही लिखे हैं पर नाटक में संवाद से ज्यादा दृश्य का महत्व होता है।
वास्तव में नाटक एक विजुअल आर्ट है, जिसके लिए नाटक के व्याकरण को समझना जरूरी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि नए नाटक नहीं आ रहे हैं। नए नाटक लिखे जा रहे हैं और उन्हें काफी पसंद भी किया जा रहा है। राही ने कहा कि उन्होंने करीब आधा दर्जन से ज्यादा नाटक और एक फिल्में लिखी हैं। इनमें खेजड़ी की बेटी, चंपाकली का रामरुपैया, रंगीली भागमती, जुआं द गैंबल, अजब चोर की गजब कहानी.. नाटकों के करीब करीब 50 से ज्यादा शो हो चुके हैं।
उन्होंने बताया कि चंपाकली का रामरुपैया नाटक उन्होंने 1995 में लिखा था, जिसको देश के कई सिटी में सराहा गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक फिल्म हंसुली लिखी थी, जिसको रामोजी राव स्टूडियो ने हैदराबाद में एक फिल्म के रूप में तैयार की। उन्होंने कहा कि हमेशा गुरु महत्वपूर्ण होता है, इसी वजह से हबीब तनवीर, केएन पानिकर, विजया मेहता जैसे नामचीन लोगों से शिक्षा हासिल की है। उन्होंने कहा कि थियेटर अब चेंज हो रहा है। इसमें पहले जहां कलाकारों को पैसे नहीं मिलते थे वहीं अब ऐसा नहीं रह गया है। अब थियेटर के आर्टिस्टों का वैल्यू ज्यादा हो गई है। उन्होंने कहा कि थियेटर से निकला हुआ कलाकार हमेशा मंझा हुआ कलाकार होता है। उन्होंने थियेटर ज्वाइन करने वाले युवाओं के लिए कहा कि उनको ज्यादा मेहनत करनी चाहिए, एक दिन में कोई भी स्टार नहीं बनता है, इसके लिए लगन और मेहनत की आवश्यकता होती है।
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वास्तव में नाटक एक विजुअल आर्ट है, जिसके लिए नाटक के व्याकरण को समझना जरूरी है। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि नए नाटक नहीं आ रहे हैं। नए नाटक लिखे जा रहे हैं और उन्हें काफी पसंद भी किया जा रहा है। राही ने कहा कि उन्होंने करीब आधा दर्जन से ज्यादा नाटक और एक फिल्में लिखी हैं। इनमें खेजड़ी की बेटी, चंपाकली का रामरुपैया, रंगीली भागमती, जुआं द गैंबल, अजब चोर की गजब कहानी.. नाटकों के करीब करीब 50 से ज्यादा शो हो चुके हैं।
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उन्होंने बताया कि चंपाकली का रामरुपैया नाटक उन्होंने 1995 में लिखा था, जिसको देश के कई सिटी में सराहा गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक फिल्म हंसुली लिखी थी, जिसको रामोजी राव स्टूडियो ने हैदराबाद में एक फिल्म के रूप में तैयार की। उन्होंने कहा कि हमेशा गुरु महत्वपूर्ण होता है, इसी वजह से हबीब तनवीर, केएन पानिकर, विजया मेहता जैसे नामचीन लोगों से शिक्षा हासिल की है। उन्होंने कहा कि थियेटर अब चेंज हो रहा है। इसमें पहले जहां कलाकारों को पैसे नहीं मिलते थे वहीं अब ऐसा नहीं रह गया है। अब थियेटर के आर्टिस्टों का वैल्यू ज्यादा हो गई है। उन्होंने कहा कि थियेटर से निकला हुआ कलाकार हमेशा मंझा हुआ कलाकार होता है। उन्होंने थियेटर ज्वाइन करने वाले युवाओं के लिए कहा कि उनको ज्यादा मेहनत करनी चाहिए, एक दिन में कोई भी स्टार नहीं बनता है, इसके लिए लगन और मेहनत की आवश्यकता होती है।
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