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Punjab: पचवारा खान से प्राइवेट थर्मलों को कोयला नहीं दे सकेगा पंजाब, केंद्र ने नहीं दी मंजूरी, बढ़ेगा संकट
Sun, 30 Apr 2023 11:04 AM IST
निवेदिता वर्मा
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला (पंजाब)
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Sun, 30 Apr 2023 11:04 AM IST
सार
पावरकॉम अधिकारियों का कहना है कि इस समय पचवारा खान से पंजाब को रोजाना 3 से 4 रैक (प्रति रैक 4000 टन ) कोयले की सप्लाई हो रही है। जिसके चलते सरकारी थर्मलों रोपड़ में 34 दिनों का और लहरां मुहब्बत में साढ़े 28 दिनों के कोयले का स्टाक मौजूद है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
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विस्तार
केंद्र के बिजली मंत्रालय ने पंजाब सरकार को झारखंड स्थित अपनी पचवारा खान से कोयले की सप्लाई सूबे के नाभा पावर लिमिटेड राजपुरा और तलवंडी साबो को करने की मंजूरी नहीं दी है। दरअसल गरमी का सीजन शुरू होने से पहले मान सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर इस संबंधी मंजूरी मांगी थी।
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मौजूदा समय में इन दोनों थर्मलों में मात्र कुछ दिनों का कोयला शेष है। ऐसे में केंद्र के इनकार के बाद धान के सीजन में इन दोनों थर्मलों में कोयले के संकट से बिजली सप्लाई में बाधा आ सकती है। जबकि पंजाब बिजली की बड़ी मांग पूरा करने के लिए कुल 2680 मेगावाट की क्षमता वाले इन दोनों थर्मलों पर निर्भर है।
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पंजाब सरकार ने केंद्रीय बिजली मंत्रालय को पत्र लिखकर 700 मेगावाट की क्षमता वाले राजपुरा व 1980 मेगावाट के तलवंडी साबो थर्मलों को झारखंड स्थित अपनी पचवारा खान से कोयले की सप्लाई किए जाने संबंधी मंजूरी मांगी थी। पत्र में लिखा गया था कि समझौते के तहत राजपुरा व तलवंडी साबो थर्मल अपनी 100 प्रतिशत बिजली पंजाब को देने के लिए बाध्य है। ऐसे में इन थर्मलों में इस्तेमाल होने वाले कोयले का सारा खर्च पंजाब को ही वहन करना पड़ता है। अगर केंद्र इन थर्मलों में पचवारा से कोयले की सप्लाई करने की मंजूरी देता है, तो कोयला सस्ता पड़ने से आगे बिजली भी सस्ती पड़ेगी। सरकार ने लिखा था कि पचवारा से कोयले की नियमित सप्लाई होने से इन थर्मलों की अतिरिक्त जरूरत पूरी हो सकेगी। लेकिन केंद्र ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया है। जानकारी के मुताबिक इसे कोयले का बेचना बताया गया है।
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पावरकॉम अधिकारियों का कहना है कि इस समय पचवारा खान से पंजाब को रोजाना 3 से 4 रैक (प्रति रैक 4000 टन ) कोयले की सप्लाई हो रही है। जिसके चलते सरकारी थर्मलों रोपड़ में 34 दिनों का और लहरां मुहब्बत में साढ़े 28 दिनों के कोयले का स्टाक मौजूद है। थर्मलों में एक महीने के कोयले को स्टाक करने की ही जगह है। ऐसे में अगर पचवारा से प्राइवेट थर्मलों को कोयले की सप्लाई की मंजूरी मिल जाती, तो कई पहलुओं से लाभ हो सकता था।
जानकारी के मुताबिक खान से 1000 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी पर स्थित होने पर तय नियमों के मुताबिक थर्मल में 25 से 26 दिनों तक का कोयला होना जरूरी है। लेकिन इस समय राजपुरा थर्मल में 18 दिनों का और पंजाब के सबसे बड़े तलवंडी साबो थर्मल में मात्र तीन दिनों का कोयला शेष है। उधर गरमी लगातार बढ़ने से मांग में वृद्धि हो रही है और साथ ही धान सीजन भी नजदीक है। ऐसे में कोयले की कमी से बिजली सप्लाई में बाधा आ सकती है। जबकि इस बार पीक सीजन में बिजली की मांग 16000 मेगावाट तक जाने की संभावना है।
प्राइवेट पर निर्भरता कम करके सरकारी क्षेत्र में बढ़ाया जाए बिजली उत्पादन-इंजीनियर्स एसोसिएशन
इस संबंध में पीएसईबी इंजीनियर्स एसोएिशन के प्रधान इंजीनियर जसवीर सिंह धीमान व महासचिव इंजीनियर अजयपाल सिंह अटवाल ने कहा कि तलवंडी साबो सबसे बड़ा थर्मल है, बावजूद इसके पास कोयले की पर्याप्त लिंकेज नहीं है। जिस कारण अकसर खास तौर से तलवंडी में कोयले का संकट रहता है। अब केंद्र से मंजूरी न मिलने के चलते प्राइवेट थर्मलों में आने वाले दिनों में कोयला संकट बढ़ने की आशंका है। ऐसे में जरूरत है कि प्राइवेट थर्मलों पर निर्भरता कम करके सरकारी क्षेत्र में बिजली उत्पादन बढ़ाया जाए।