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कथित जमीन घोटाले में CBI ने हुड्डा से की पूछताछ, 8 घंटे तक चले सवाल -जवाब

Tue, 16 May 2017 09:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 16 May 2017 09:21 AM IST
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CBI questions BS Hooda over Manesar land scam
सीबीआई ऑफिस से निकलते हुड्डा - फोटो : अमर उजाला
कथित जमीन सौदों का आरोप हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुसीबतें बढ़ा रहा है। सीबीआई ने हुड्डा ने सुबह पूछताछ शुरु की, तो सवाल जवाब करते हुए शाम हो गई। करीब 8 घंटे तक हुड्डा CBI ऑफिस में ही रहे। सीबीआई की चंडीगढ़ यूनिट ने सोमवार को हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से मानेसर जमीन में कथित घोटाले को लेकर पूछताछ की। हुड्डा सोमवार सुबह करीब साढ़े ग्यारह बजे अकेले ही सीबीआई के सेक्टर 30 स्थित ऑफिस पहुंचे और शाम करीब साढ़े सात बजे वहां से निकले। सूत्रों के अनुसार सीबीआई ने उनसे मानेसर जमीन से जुड़े मामले में पूछताछ की। 
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इधर, जैसे ही हुड्डा के सीबीआई ऑफिस पहुंचने की सूचना फैली तो सीबीआई दफ्तर के बाहर मीडिया व कांग्रेसी कार्यकर्ता भी पहुंचने शुरु हो गए। हुड्डा शाम को करीब साढ़े सात बजे सीबीआई ऑफिस से बाहर निकले और किसी से बात किए बिना रवाना हो गए। 
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यहां ये बता दें  कि सीबीआई इस मामले में पिछले साल पूर्व मुख्यमंत्री हुड्डा व इस मामले से जुड़े रहे अफसरों पर शिकंजा कसने के बाद करीब 24 ठिकानों पर छापे मारे थे। सीबीआई की टीमों ने एक साथ रोहतक स्थित हुड्डा के आवास, दिल्ली, चंडीगढ़, गुड़गांव में दस्तावेज खंगाले थे। उस समय छापे हरियाणा के सीनियर आईएएस और उनके कार्यकाल में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव रहे एसएस ढिल्लों (इन दिनों एसीएस ट्रांसपोर्ट) और मुख्यमंत्री के ओएसडी रह चुके रणधीर सिंह के यहां भी डाले गए थे।
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ये है पूरा मामला

CBI questions BS Hooda over Manesar land scam
सीबीआई ऑफिस से निकलते हुड्डा - फोटो : अमर उजाला
ये पूरा मामला पिछली हुड्डा सरकार के वक्त का है, जिस पर अपने कार्यकाल के दौरान करीब 900 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर उसे बिल्डरों को कौड़ियों के भाव बेचने का आरोप है। इस पूरे मामले में करीब 1500 करोड़ रुपए के घोटाले का आरोप है। यह जमीन तीन गांवों की है। गांव के किसानों ने मामले में गुड़गांव के मानेसर पुलिस थाने में केस दर्ज करवाया था। इस पर बीजेपी सरकार ने 17 सितंबर 2015 को मामला सीबीआई के सुपुर्द कर दिया। 

CBI ने अपनी पड़ताल के बीच जमीन अधिग्रहण में कथित अनियमितता को लेकर प्रीवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट 1988 की धारा 420, 465, 467, 468, 471 तथा 120 बी के तहत मामला दर्ज किया। आरोप है कि पूरे मामले में हरियाणा सरकार के अधिकारियों व बिल्डरों के बीच साठगांठ थी। दरअसल, पिछली सरकार ने आईएमटी मानेसर की स्थापना के लिए 900 एकड़ जमीन को एक्वायर करने के लिए मानेसर, नौरंगपुर और लखनौला के ग्रामीणों को सेक्शन 4, 6 और 9 के नोटिस थमा दिए थे।

इसके बाद प्राइवेट बिल्डरों ने किसानों को अधिग्रहण का डर दिखाकर जमीनों के सौदे किए और जमीनों को कौड़ियों के भाव खरीद लिया। इसी दौरान डायरेक्टर इंडस्ट्रीज ने 24 अगस्त 2007 को सरकारी नियमों की अवहेलना करते हुए बिल्डर द्वारा खरीदी गई जमीन को अधिग्रहण प्रोसेस से रिलीज कर दिया।
 
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