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Chandigarh News: ट्रांसफर-पोस्टिंग से खाद्यान्न नीति तक, ईडी ने गोहल से पूछे सवाल
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सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले में पूछताछ; गोहल ने राजनीतिक संपर्कों के चलते अधिकारियों के अनुरोध मिलने की बात कही
मोबाइल में मिले ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े संदेशों पर भी सवाल; 24 जनवरी 2024 की खाद्यान्न नीति की पीपीटी नागरा को भेजने को लेकर मांगी गई जानकारीमाई सिटी रिपोर्टर
माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन समेत अन्य आरोपियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित बिचौलिए नितिन गोहल से सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडरों की शर्तों में बदलाव, खाद्यान्न नीति से जुड़े दस्तावेज, यात्रा-होटल बुकिंग और कथित नकद भुगतान को लेकर पूछताछ की थी। फैसले में दर्ज पूछताछ के दौरान गोहल ने कई मामलों में अपने राजनीतिक संपर्कों का हवाला दिया, जबकि कुछ सवालों के जवाब बाद में देने की बात कही।
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ईडी ने गोहल के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पंजाब सरकार के विभिन्न अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े संदेश मिलने पर सवाल किया कि जब वह इस संबंध में सक्षम अधिकारी नहीं थे तो ऐसे अनुरोध उन्हें क्यों भेजे जाते थे। गोहल ने बताया कि ओएसडी राजबीर सिंह धीमान उनके करीब 22 साल पुराने दोस्त हैं और वह उनके कार्यालय/चैंबर में आते-जाते रहते थे। इसी वजह से अधिकारी, कर्मचारी और विधायक उन्हें अनुरोध भेज देते थे। गोहल के अनुसार, वह केवल एक्सेल में सूचियां तैयार कर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने का काम करते थे।
नागरा ने मांगी थी सरकारी काम में मदद
आरएस नागरा के साथ संबंधों को लेकर गोहल ने बताया कि उनकी मुलाकात 2022-23 में साझा मित्र अजीत पाल सिंह के जरिए हुई थी। उनके अनुसार, नागरा के पास राइस शेलर्स थे और वह राज्य सरकार से जुड़े खाद्य टेंडरों आदि के काम में मदद चाहते थे। गोहल ने कहा कि पंजाब सरकार में उनके राजनीतिक संपर्कों के कारण नागरा ने उनसे मदद मांगी। इसके बाद नागरा ने कई बार अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े अनुरोध वाट्सऐप पर भेजे।
खाद्यान्न नीति की पीपीटी भी चर्चा में
ईडी ने 24 जनवरी 2024 की स्टेट पॉलिसी फॉर फूडग्रेन्स लैबर एंड कारटेज 2024 नाम की पीपीटी का भी जिक्र किया। गोहल ने माना कि यह पीपीटी उनके और नागरा के बीच साझा हुई थी। उनके अनुसार, नागरा खाद्यान्न आपूर्ति के कारोबार में थे और राज्य की खाद्यान्न नीति में अपने कारोबार के अनुकूल बदलाव चाहते थे।
ईडी ने पूछा कि यह दस्तावेज गोहल को किस अधिकारी ने भेजा था और क्या उन्हें इसे देखने या प्राप्त करने की अनुमति थी। गोहल ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि पीपीटी किस अधिकारी ने भेजी थी और वह पांच दिन में जानकारी देने को तैयार थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह न सरकारी कर्मचारी हैं और न राजनेता, इसलिए उन्हें सामान्य तौर पर ऐसे गोपनीय दस्तावेज तक पहुंच की अनुमति नहीं थी। हालांकि, अधिकारियों से अपने संपर्कों के कारण उन्हें यह दस्तावेज मिला।
यात्रा बुकिंग और नकद भुगतान पर भी सवाल
ईडी ने मोहाली की हर्षिल ट्रेवल के साथ गोहल के लेन-देन पर भी सवाल किए। गोहल ने बताया कि वह करीब दो-तीन वर्षों से परिवार और परिचितों के लिए घरेलू और विदेशी यात्राओं के एयर टिकट, होटल और टूर पैकेज की बुकिंग इस एजेंसी से कराते रहे हैं। लेजर में वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बड़ी रकम के लेन-देन को उन्होंने यात्रा और होटल बुकिंग से संबंधित बताया। गोहल ने कहा कि वह करीब 12-15 वर्षों से परिचितों के अनुरोध पर टिकट, होटल और टूर बुक करते रहे हैं।
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मोबाइल में मिले ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े संदेशों पर भी सवाल
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माई सिटी रिपोर्टर
चंडीगढ़। सीएम के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन समेत अन्य आरोपियों से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित बिचौलिए नितिन गोहल से सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी टेंडरों की शर्तों में बदलाव, खाद्यान्न नीति से जुड़े दस्तावेज, यात्रा-होटल बुकिंग और कथित नकद भुगतान को लेकर पूछताछ की थी। फैसले में दर्ज पूछताछ के दौरान गोहल ने कई मामलों में अपने राजनीतिक संपर्कों का हवाला दिया, जबकि कुछ सवालों के जवाब बाद में देने की बात कही।
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ईडी ने गोहल के मोबाइल फोन की जांच के दौरान पंजाब सरकार के विभिन्न अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े संदेश मिलने पर सवाल किया कि जब वह इस संबंध में सक्षम अधिकारी नहीं थे तो ऐसे अनुरोध उन्हें क्यों भेजे जाते थे। गोहल ने बताया कि ओएसडी राजबीर सिंह धीमान उनके करीब 22 साल पुराने दोस्त हैं और वह उनके कार्यालय/चैंबर में आते-जाते रहते थे। इसी वजह से अधिकारी, कर्मचारी और विधायक उन्हें अनुरोध भेज देते थे। गोहल के अनुसार, वह केवल एक्सेल में सूचियां तैयार कर संबंधित व्यक्ति तक पहुंचाने का काम करते थे।
नागरा ने मांगी थी सरकारी काम में मदद
आरएस नागरा के साथ संबंधों को लेकर गोहल ने बताया कि उनकी मुलाकात 2022-23 में साझा मित्र अजीत पाल सिंह के जरिए हुई थी। उनके अनुसार, नागरा के पास राइस शेलर्स थे और वह राज्य सरकार से जुड़े खाद्य टेंडरों आदि के काम में मदद चाहते थे। गोहल ने कहा कि पंजाब सरकार में उनके राजनीतिक संपर्कों के कारण नागरा ने उनसे मदद मांगी। इसके बाद नागरा ने कई बार अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़े अनुरोध वाट्सऐप पर भेजे।
खाद्यान्न नीति की पीपीटी भी चर्चा में
ईडी ने 24 जनवरी 2024 की स्टेट पॉलिसी फॉर फूडग्रेन्स लैबर एंड कारटेज 2024 नाम की पीपीटी का भी जिक्र किया। गोहल ने माना कि यह पीपीटी उनके और नागरा के बीच साझा हुई थी। उनके अनुसार, नागरा खाद्यान्न आपूर्ति के कारोबार में थे और राज्य की खाद्यान्न नीति में अपने कारोबार के अनुकूल बदलाव चाहते थे।
ईडी ने पूछा कि यह दस्तावेज गोहल को किस अधिकारी ने भेजा था और क्या उन्हें इसे देखने या प्राप्त करने की अनुमति थी। गोहल ने कहा कि उन्हें याद नहीं कि पीपीटी किस अधिकारी ने भेजी थी और वह पांच दिन में जानकारी देने को तैयार थे। उन्होंने यह भी कहा कि वह न सरकारी कर्मचारी हैं और न राजनेता, इसलिए उन्हें सामान्य तौर पर ऐसे गोपनीय दस्तावेज तक पहुंच की अनुमति नहीं थी। हालांकि, अधिकारियों से अपने संपर्कों के कारण उन्हें यह दस्तावेज मिला।
यात्रा बुकिंग और नकद भुगतान पर भी सवाल
ईडी ने मोहाली की हर्षिल ट्रेवल के साथ गोहल के लेन-देन पर भी सवाल किए। गोहल ने बताया कि वह करीब दो-तीन वर्षों से परिवार और परिचितों के लिए घरेलू और विदेशी यात्राओं के एयर टिकट, होटल और टूर पैकेज की बुकिंग इस एजेंसी से कराते रहे हैं। लेजर में वित्त वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान बड़ी रकम के लेन-देन को उन्होंने यात्रा और होटल बुकिंग से संबंधित बताया। गोहल ने कहा कि वह करीब 12-15 वर्षों से परिचितों के अनुरोध पर टिकट, होटल और टूर बुक करते रहे हैं।