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पंजाबः बेअदबी कांड में डेरा प्रेमियों को सीबीआई की क्लीन चिट से कठघरे में शिअद

Sat, 27 Jul 2019 04:10 AM IST
ajay kumar सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: ajay kumar Updated Sat, 27 Jul 2019 04:10 AM IST
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CBI Closure Report On Bargari Case
सीबीआई (फाइल फोटो)

श्री गुरु ग्रंथ साहब की बेअदबी में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट में डेरा प्रेमियों को क्लीन चिट देने के मामले में अकाली दल बादल फिर कठघरे में है। डेरा सच्चा सौदा के साथ अपने मधुर संबंधों को लेकर अकाली दल 2012 से लगातार निशाने पर है। 2007 में डेरा सच्चा सौदा के गुरमीत राम रहीम की तरफ से कांग्रेस को समर्थन दिया गया था लेकिन इसके बाद से लगातार अकाली दल के साथ डेरे का चोली दामन का साथ रहा है। 

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2007 में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम पर श्री गुरु गोबिंद सिंह की वेशभूषा पहनकर उनकी नकल करने के मामले में केस दर्ज किया गया था। पंजाब पुलिस ने गुरु गोबिंद सिंह जी की नकल करने के मामले में 295ए और 153ए का केस दर्ज किया था लेकिन साढ़े चार साल में चालान पेश ही नहीं किया। 
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2012 में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार ने अदालत में गुरमीत राम रहीम पर दर्ज मामलों को रद्द करने की सिफारिश कर दी। यहीं से स्पष्ट हो गया था कि डेरा और अकाली दल के बीच दोस्ताना संबंध बनने शुरू हो गए हैं।
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2012 में डेरा सच्चा सौदा की तरफ से अकाली दल की हिमायत की गई और मालवा में डेरे का खासा वोट बैंक होने के कारण अकाली दल की सरकार दोबारा बन गई। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी डेरा द्वारा अकाली दल की डटकर हिमायत की गई। 

2007 में डेरा प्रमुख ने गुरु गोबिंद सिंह जी की नकल करने के मामले में श्री अकाल तख्त को अपना स्पष्टीकरण भेजा था, लेकिन जत्थेदार वेदांती ने उसे स्वीकार नहीं किया था। डेरा प्रमुख ने फिर से गलतफहमी में छिड़े विवाद का स्पष्टीकरण श्री अकाल तख्त साहिब को भेजा था। श्री अकाल तख्त ने उसी स्पष्टीकरण को माफीनामा समझ उन्हें माफ कर दिया। हालांकि डेरा प्रमुख ने स्पष्टीकरण में कहीं भी माफी शब्द का प्रयोग नहीं किया था।

पत्र को समाप्त करते हुए उन्होंने ‘क्षमा का प्रार्थी’ शब्द का प्रयोग किया था। ऐसी चर्चा आम थी कि इस माफी पत्र को सुखबीर बादल के आदेश पर अकाली दल के दिग्गज डॉ दलजीत सिंह चीमा खुद अमृतसर में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार के पास लेकर गए थे। ज्ञानी गुरबचन सिंह का कहना था कि तख्त के जत्थेदारों द्वारा पंथक परंपरा के अनुसार विचार-विमर्श करने के बाद भेजे गए क्षमा याचना व स्पष्टीकरण को स्वीकार किया गया है। 

इस फैसले के बाद पंजाब में तूफान खड़ा हो गया था। सिख संगत सड़कों पर आ गई। एक माह बाद डेरा मुखी को जाम-ए-इंसां पिलाने के मामले में दी गई माफी को रद्द कर दिया गया। जत्थेदार ज्ञानी गुरबचन सिंह ने कहा कि डेरा मुखी को माफ करने का जो फैसला 24 सितंबर को लिया गया था, उसे सिख संगत की भावनाओं को देखते हुए रद्द किया जाता है। इस माफी का सारा ठीकरा अकाली दल के सिर पर फोड़ा गया।

डेरा संचालक के रिश्तेदार को सरकारी पंप अलॉट किया 
अकाली दल के साथ डेरा सच्चा सौदा का रिश्ता इतना गहरा चुका था कि उनकी सरकार में डेरा संचालक के रिश्तेदार को जालंधर इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की जमीन पर पेट्रोल पंप अलॉट कर दिया गया। इस पंप को लेकर कई तरह की अनियमितताएं बरती गईं। उस समय जालंधर ट्रस्ट के चेयरमैन अकाली दल के वरिष्ठ नेता थे।

सूत्रों की माने तो ट्रस्ट की फाइल को बहुत तेजी से मूव करवाकर रातों रात पंप का कब्जा दिलाया गया। इस फाइल को काफी समय तक दबाकर रखा गया था। इसे लेकर काफी शिकायतबाजी भी हुई लेकिन शिअद भाजपा सरकार ने कार्रवाई नहीं की। इस फाइल की अगर जांच शुरू हुई तो कई नेताओं के चेहरे से नकाब उतरना तय है। 

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