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अकाली सरकार में दर्ज झूठे केसों का निपटारा शुरु, अब तक 80 फीसदी FIR रद्द
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sun, 31 Dec 2017 09:43 AM IST
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Parkash singh badal & Sukhbir singh badal
- फोटो : File Photo
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पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के दौरान पुलिस द्वारा दर्ज किए गए झूठे केसों के निपटारे का काम शुरू हो गया है। इनका पता लगाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस मेहताब गिल के नेतृत्व में गठित आयोग द्वारा अब तक राज्य सरकार को सौंपी चार अंतरिम रिपोर्टों में जितने भी झूठे केसों को उजागर किया गया है, राज्य सरकार ने उनमें से 80 फीसदी एफआईआर को खारिज कर दिया है।
शेष 20 फीसदी वे केस हैं, जो विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। इनसे संबंध में भी सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं कि अदालत से स्टेटस दाखिल कर इन मामलों को खारिज कराएं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गृह विभाग ने जस्टिस गिल आयोग की अंतरिम रिपोर्टों में की गई सिफारिशों के आधार पर सूबे के डीजीपी को अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। इनके अंतर्गत उन पुलिस अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा गया है, जिनके लिए जस्टिस गिल आयोग ने अपनी रिपोर्टों में सिफारिशें की हैं।
इसके अलावा कई मामलों में आयोग ने दोषी पुलिस अफसरों से जुर्माना व हर्जाना वसूलने की सिफारिश भी की है। आयोग ने अपनी चारों अंतरिम रिपोर्टों में कई एफआईआर को सीधे रद्द करने, कई केसों को अदालत के जरिए निपटाने और कई केसों में पुलिस और शिकायतकर्ता दोनों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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शेष 20 फीसदी वे केस हैं, जो विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। इनसे संबंध में भी सरकार ने आदेश जारी कर दिए हैं कि अदालत से स्टेटस दाखिल कर इन मामलों को खारिज कराएं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गृह विभाग ने जस्टिस गिल आयोग की अंतरिम रिपोर्टों में की गई सिफारिशों के आधार पर सूबे के डीजीपी को अलग-अलग निर्देश जारी किए हैं। इनके अंतर्गत उन पुलिस अफसरों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को भी कहा गया है, जिनके लिए जस्टिस गिल आयोग ने अपनी रिपोर्टों में सिफारिशें की हैं।
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इसके अलावा कई मामलों में आयोग ने दोषी पुलिस अफसरों से जुर्माना व हर्जाना वसूलने की सिफारिश भी की है। आयोग ने अपनी चारों अंतरिम रिपोर्टों में कई एफआईआर को सीधे रद्द करने, कई केसों को अदालत के जरिए निपटाने और कई केसों में पुलिस और शिकायतकर्ता दोनों पर कार्रवाई करने की सिफारिश की है।
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लंगाह पर कार्रवाई और बैंस की एफआईआर रद्द करने की सिफारिश
जस्टिस मेहताब गिल आयोग को राज्य सरकार ने इस साल 31 जुलाई तक राज्य भर से मिलने वाली शिकायतों की जांच का जिम्मा सौंपा था। इस अवधि तक आयोग के पास 4371 शिकायतें पहुंची, जिनमें से 563 केसों का निपटारा चार अंतरिम रिपोर्टों के अंतर्गत किया जा चुका है।
बाकी केसों की जांच अभी जारी है और राज्य सरकार ने आयोग का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। आयोग ने पहली अंतरिम रिपोर्ट में 172 केसों की जांच करने के बाद 130 केसों में हर्जाना, दूसरी अंतरिम रिपोर्ट में 47 झूठे मामलों का विवरण दिया। 37 मामले रद्द करने, तीसरी अंतरिम रिपोर्ट में 101 शिकायतों की जांच करके 12 मामलों में एफआईआर रद्द करने की सिफारिश की। इसी तरह चौथी अंतरिम रिपोर्ट में 112 मामलों की जांचकर 82 शिकायतों को विभिन्न आधार पर खारिज कर दिया।
लंगाह पर कार्रवाई और बैंस की एफआईआर रद्द करने की सिफारिश
जस्टिस मेहताब गिल आयोग ने अपनी तीसरी अंतरिम रिपोर्ट में पूर्व अकाली मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह के साथ ही झूठा मामला दर्ज करने वाले एक आईओ के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की। आयोग ने लंगाह और आईओ एसएचओ सतपाल सिंह के विरुद्ध आईपीसी की धारा-182 के तहत कार्रवाई, आईओ की ज्यादती के शिकार हुए तरसेम राज को मुआवज़ा देने के लिए दोषी आईओ से वसूली की सिफारिश भी की।
आयोग ने माना कि पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह को आईओ के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के पुत्र को झूठे मामले में फसांने के लिए आईपीसी की धारा 120-बी के अधीन कार्रवाई करने को कहा। इसके साथ ही आयोग ने अदालत द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, लोक इंसाफ पार्टी के नेता व एमएलए सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ दर्ज एफआईआर को ख़ारिज करने की सिफ़ारिश भी की।
बाकी केसों की जांच अभी जारी है और राज्य सरकार ने आयोग का कार्यकाल एक वर्ष के लिए बढ़ा दिया है। आयोग ने पहली अंतरिम रिपोर्ट में 172 केसों की जांच करने के बाद 130 केसों में हर्जाना, दूसरी अंतरिम रिपोर्ट में 47 झूठे मामलों का विवरण दिया। 37 मामले रद्द करने, तीसरी अंतरिम रिपोर्ट में 101 शिकायतों की जांच करके 12 मामलों में एफआईआर रद्द करने की सिफारिश की। इसी तरह चौथी अंतरिम रिपोर्ट में 112 मामलों की जांचकर 82 शिकायतों को विभिन्न आधार पर खारिज कर दिया।
लंगाह पर कार्रवाई और बैंस की एफआईआर रद्द करने की सिफारिश
जस्टिस मेहताब गिल आयोग ने अपनी तीसरी अंतरिम रिपोर्ट में पूर्व अकाली मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह के साथ ही झूठा मामला दर्ज करने वाले एक आईओ के खिलाफ कार्रवाई करने की सिफारिश की। आयोग ने लंगाह और आईओ एसएचओ सतपाल सिंह के विरुद्ध आईपीसी की धारा-182 के तहत कार्रवाई, आईओ की ज्यादती के शिकार हुए तरसेम राज को मुआवज़ा देने के लिए दोषी आईओ से वसूली की सिफारिश भी की।
आयोग ने माना कि पूर्व मंत्री सुच्चा सिंह लंगाह को आईओ के साथ मिलकर शिकायतकर्ता के पुत्र को झूठे मामले में फसांने के लिए आईपीसी की धारा 120-बी के अधीन कार्रवाई करने को कहा। इसके साथ ही आयोग ने अदालत द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, लोक इंसाफ पार्टी के नेता व एमएलए सिमरजीत सिंह बैंस के खिलाफ दर्ज एफआईआर को ख़ारिज करने की सिफ़ारिश भी की।