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नया ट्रेंड: कनाडा-भारत के बीच नहीं प्रत्यार्पण संधि, गैंगस्टर संगठित होकर कर रहे अपराध, नकेल कसना मुश्किल

Thu, 30 Nov 2023 03:11 PM IST
निवेदिता वर्मा सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब)
सुरिंदर पाल, अमर उजाला, जालंधर (पंजाब) Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 30 Nov 2023 03:11 PM IST
सार

पंजाब के प्रसिद्ध क्रिमिनल वकील मंदीप सचदेवा का कहना है कि भारत व कनाडा में संधि के तहत वहां से अपराधियों को पंजाब लाना काफी मुश्किल होता है। एक केस में प्रत्यार्पण करवाने के लिए 10 करोड़ की कम से कम राशि खर्च होती है, सरकार खर्च करने से कतराती है।

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Canada becoming safe haven for Khalistani terrorists and gangsters involved in criminal activities in India
गोल्डी बराड़ और सिद्धू मूसेवाला। - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

भारत में हत्या समेत कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल खालिस्तानी आतंकवादियों और गैंगस्टरों के लिए कनाडा सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। कनाडा व पंजाब के गैंगस्टर आपस में संगठित होकर वारदात कर रहे हैं। 

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पंजाब में वारदात कर गैंगस्टर कनाडा से जिम्मेदारी ले रहे हैं जबकि कनाडा में वारदात कर पंजाब से जिम्मेदारी ली जा रही है। दरअसल, कनाडा व भारत के बीच प्रत्यार्पण संधि नहीं है जिसका फायदा जमकर उठाया जा रहा है।
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गोल्डी बराड़ और लंडा जैसे कई गैंगस्टर कनाडा में बैठे
सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़, अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला और लखबीर सिंह संधू उर्फ लांडा सहित कई खूंखार गैंगस्टर कनाडा मैं बैठकर भारत में वारदात करवा रहे हैं। यह गैंगस्टर कनाडा के बैठकर भारत में हत्या और रंगदारी जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं। 
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पंजाब कांग्रेस के नेता बलविंदर सिंह बल्ली की हत्या पंजाब में शूटरों ने की लेकिन इसकी जिम्मेदारी किसी स्थानीय गैंगस्टर ने नहीं ली बल्कि जिम्मेदारी कनाडा से अर्शदीप डल्ला ने ली। सिद्धू मूसेवाला की हत्या पंजाब में शूटरों ने की लेकिन इसकी जिम्मेदारी कनाडा से गोल्डी बराड़ ने ली थी। कोटकपूरा में सिरसा डेरा अनुयायी और बरगाड़ी कांड मामले के आरोपी प्रदीप शर्मा की हत्या में स्थानीय शूटरों का इस्तेमाल किया गया लेकिन जिम्मेदारी कनाडा से गोल्डी बराड़ ने ली थी।

हाल ही में गायक गिप्पी ग्रेवाल की कोठी पर कनाडा में फायरिंग की गई है, जिसमें कनाडा के शूटरों का इस्तेमाल हुआ लेकिन इसकी जिम्मेदारी कनाडा से न लेकर लॉरेंस बिश्नोई ने ली है, वइ इस समय स्थानीय जेल में बंद है।

21 सितंबर को कनाडा से कनाडा विनिपेग में खालिस्तानी आतंकी सुखदूल सिंह उर्फ सुक्खू दुनेके की 20 गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। बेशक उसको कनाडा में शूटरों ने गोलियां मारी लेकिन उसकी जिम्मेदारी अहमदाबाद जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने ली। सुक्खा पर पंजाब और आसपास के राज्यों में 20 के करीब आपराधिक मामले दर्ज थे, जिनमें कुछ अंडर ट्रायल और कुछ मामले अंडर इंवेस्टिगेशन चल रहे थे।


एक केस पर आता है लगभग 10 करोड़ का खर्च
पंजाब के प्रसिद्ध क्रिमिनल वकील मंदीप सचदेवा का कहना है कि भारत व कनाडा में संधि के तहत वहां से अपराधियों को पंजाब लाना काफी मुश्किल होता है। एक केस में प्रत्यार्पण करवाने के लिए 10 करोड़ की कम से कम राशि खर्च होती है, सरकार खर्च करने से कतराती है। दूसरा यहां की एजेंसियों को कनाडा जाकर केस लड़ना पड़ेगा। यह आसान नहीं है। अब उदाहरण के तौर पर गिप्पी ग्रेवाल की कोठी पर गोलियां कनाडा में चली हैं, अपराध कनाडा में हुआ है। पुलिस यहां पर मामला दर्ज नहीं कर सकती है बेशक इसकी जिम्मेदारी भारत से ली गई है। अगर केस दर्ज हो भी जाता है तो इसकी प्रॉसिक्यूशन में दिक्कत होगी क्योंकि अपराध यहां पर नहीं हुआ है। सबूत कहां से लाएंगे, कैसे चालान तैयार होगा। निश्चित तौर पर इसका फायदा आपराधिक किस्म के लोग उठाते हैं।

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