हरियाणा की कैबिनेट बैठक, शराब के शौकीनों को तगड़ा झटका
हरियाणा के मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सरकार ने कई अहम फैसले लिए। इसमें वर्ष 2016-17 की नई आबकारी नीति को स्वीकृति प्रदान की गई। नई नीति में शराब पर वैट की दरें आठ से बढ़ाकर 10 प्रतिशत किया गया है।
सरकार ने शराब की ढुलाई के लिए ऑनलाइन पास और परमिट्स की सुविधा शुरू की है। अंग्रेजी शराब और बियर ब्रांड्स या स्टाइल्स के अधिकतम खुदरा मूल्य को बाजार की जरूरतों के मुताबिक नियत किया गया है। ड्राउट बीयर और तैयार पेय पदार्थों के आबकारी शुल्क को माइल्ड बियर के बराबर कर दिया गया लेकिन आबकारी शुल्क में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। शराब के ठेकों की ई-नीलामी के जरिये की जाएगी। प्रदेश में देसी और भारत में बनी विदेशी शराब के कुल ठेकों की संख्या 3500 ही रहेगी।
एक हजार से कम आबादी वाली ग्राम पंचायतों में ग्राम पंचायत की पूर्व सहमति से ही सब-वेंड्स की अनुमति होगी। उपभोक्ताओं के लिए अच्छी सुविधाओं और मशीन जेनरेटेड प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) वाली आधुनिक दुकानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। वर्ष 2010-11 के बाद अधिकतम मूल कोटा में पहली बार बढ़ोतरी की गई है।
देसी शराब का मूल कोटा 900 से बढ़ाकर 950 लाख प्रूफ लीटर कर दिया गया है, जबकि आईएमएफएल का मूल कोटा 500 से बढ़ाकर 550 लाख प्रूफ लीटर किया गया है।
देसी शराब पर अतिरिक्त आबकारी शुल्क को तर्कसंगत बनाते हुए इसे 12 रुपये प्रति प्रूफ लीटर से बढ़ाकर 18 रुपये प्रति प्रूफ लीटर जबकि आईएमएफएल के लिए 30 रुपये प्रति प्रूफ लीटर से बढ़ाकर 45 रुपये प्रति प्रूफ लीटर किया गया है।
कोटा ट्रांसफर की सीमा तय
उचंती सेल की प्रवृत्ति को रोकने के लिए कोटा हस्तांतरण की सुविधा शुरू की गई है। इससे विभिन्न क्षेत्रों में मांग को तर्कसंगत बनाने सहित कारोबारियों की सहुलियतें बढ़ जाएंगी। थोक विक्रेता की लाइसेंस फीस बढ़ाई गई है।
एल-13 के मामले में इसे पांच लाख रुपये से बढ़ाकर 10 लाख रुपये जबकि एल-1 के लिए 40 लाख रुपये से बढ़ाकर 50 लाख रुपये लाख रुपये किया गया है। अधिकतम राजस्व प्राप्त करने के लिए विकास क्षमता के अनुसार निर्यात शुल्क को तर्कसंगत बनाते हुए बढ़ाया गया है। वर्तमान बाजार रूझानों के अनुसार फ्रेंचाइजी फीस और बॉटलिंग फीस को भी तर्कसंगत बनाया गया है।
बार लाइसेंसों के फीस ढांचे को भी बाजार रूझानों के अनुसार तर्कसंगत एवं री-ओरियंटेड बनाया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक्वेट हाल में बार्स को एल-टू लाईसेंसों की अनुमति दी गई है।