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Chandigarh: क्रिकेट खिलाड़ियों की बेहतर होगी सुरक्षा, चोटिल होने से बचाएगा कैबलार और ग्रेफाइट हेलमेट

Sun, 05 Nov 2023 04:00 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़
वीणा तिवारी, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो Updated Sun, 05 Nov 2023 04:00 PM IST
सार

डॉ. महेन्द्र का कहना है कि अगर बात हेलमेट की हो तो अभी ढाई किलो का वजन खिलाड़ियों के लिए तमाम तरह से परेशानी उत्पन्न करता है। वे उसका बोझ उठाते-उठाते थक जाते हैं। इसके बावजूद अगर तेज बॉल सीधे उनके हेलमेट से टकराए तो वे चोटिल हो जाते हैं इसलिए भारी-भरकम हेलमेट को सबसे पहले हल्का करने का प्रयास किया गया।

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Cabalar and graphite helmet will protect Cricket players from injuries
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

दुनिया भर में क्रिकेट का जुनून छाया है। इस जुनून को कायम रखने वाले खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए कैबलार और ग्रेफाइट से तैयार हेलमेट वज्र का काम करेगा। इन धातुओं से तैयार हेलमेट जहां बेहद हल्के होंगे, वहीं मजबूती में कोई सानी नहीं होगा। यह शोध में साबित हो चुका है। ये बातें वर्ल्ड कांग्रेस ऑफ साइंस एंड मेडिसिन इन क्रिकेट में बतौर वक्ता गोवा के हड्डी रोग विशेषज्ञ, फुट एंड एंकल सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र कुडचडकर ने कहीं। बतौर क्रिकेट खिलाड़ी मैदान के खतरों को भली-भांति समझते हुए उन्होंने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर यह शोध किया है। 

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उन्होंने बताया कि अकेले ऑस्ट्रेलिया में 184 खिलाड़ी बॉल से चोटिल होकर जान गंवा चुके हैं। डॉ. महेन्द्र ने बताया खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए बदलाव बेहद जरूरी हो गया है क्योंकि वे खुद नहीं जानते कि उनकी सुरक्षा वाली किट में क्या-क्या कमियां हैं। डॉ. महेन्द्र ने बताया कि उन्होंने यह शोध फील्ड फैक्ट, लैब फैक्ट और लिखित साक्ष्यों के आधार पर किया है, जिसमें पुरुष खिलाड़ियों को शामिल किया गया।

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ढाई किलो नहीं एक किलो का हेलमेट

डॉ. महेन्द्र का कहना है कि अगर बात हेलमेट की हो तो अभी ढाई किलो का वजन खिलाड़ियों के लिए तमाम तरह से परेशानी उत्पन्न करता है। वे उसका बोझ उठाते-उठाते थक जाते हैं। इसके बावजूद अगर तेज बॉल सीधे उनके हेलमेट से टकराए तो वे चोटिल हो जाते हैं इसलिए भारी-भरकम हेलमेट को सबसे पहले हल्का करने का प्रयास किया गया लेकिन वजन कम होने से उसकी ताकत में कोई समझौता न हो इसका भी ख्याल रखा गया। कैबलार जैसे बुलेट प्रूफ मैटेरियल के साथ ग्रेफाइट जैसी हल्की धातु को मिलाकर हेलमेट के ग्रिल पर प्रयोग किया गया।

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ग्लव्स से लेकर पैड तक में किया बदलाव

डॉ. महेन्द्र ने बताया कि अभी खिलाड़ी जो हेलमेट, ग्लव्ज और पैड उपयोग कर रहे हैं, उसमें कई कमियां हैं। भारी-भरकम हेलमेट, पैड और ग्लव्ज सुरक्षा कम परेशानी ज्यादा दे रहे हैं इसलिए ग्लव्ज और पैड को भी हल्का बनाने का प्रयास किया। इसमें ग्लव्ज में एसबीओ मैटेरियल इंपेक्ट लगाया, क्योंकि यह इंपेक्ट के बाद तगड़ा हो जाएगा नहीं तो मुलायम रहेगा। इसका खिलाड़ी को लाभ मिलेगा। वहीं, पैड में पीबीए की जगह इवीए फोम के साथ बोरोन कारबाइड प्लेट लगाया, जिससे पैड हल्के और बेहद मजबूत बने।

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