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इलाज के नाम पर मजाक: चंडीगढ़ में आयुष डिस्पेंसरी भवन पर लगा कंडम का बैनर, तंबू में देखे जा रहे मरीज, प्रशासन बेखबर

Fri, 15 Jul 2022 09:30 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Fri, 15 Jul 2022 09:30 AM IST
सार

आयुष डिस्पेंसरी की दीवार में पीछे की तरफ दरार आ गई थी। अब इस बिल्डिंग को असुरक्षित घोषित कर बोर्ड भी लगा दिया गया है। इसी बोर्ड के ठीक सामने मरीजों को देखने के लिए टेंट लगा दिया गया है जहां डॉक्टर बैठेंगे और मरीजों को परामर्श देंगे।

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Building of AYUSH Department dispensary located in Chandigarh Sector-28 has been declared unsafe
आयुष डिस्पेंसरी की इमारत पर लगा असुरक्षित का बैनर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

चंडीगढ़ सेक्टर-28 स्थित आयुष विभाग की डिस्पेंसरी का भवन कंडम घोषित कर दिया गया है। हालात यह हैं कि अब डिस्पेंसरी के बाहर टेंट लगाकर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि यूटी प्रशासन को पता ही नहीं है कि डिस्पेंसरी के कंडम होने का बैनर किसने लगवाया। 

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आयुष विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगभग डेढ़ साल पहले प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग को भवन की हालत के बारे में जानकारी दे दी गई थी। प्रशासन के इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने भवन का निरीक्षण भी कर लिया, लेकिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। इस वजह से भवन के असुरक्षित घोषित किए जाने के बाद अब बारिश के मौसम में टेंट लगाकर मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है। स्मार्ट सिटी चंडीगढ़ में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के दावों की हकीकत सामने है। प्रशासन स्वास्थ्य सेवाएं तो छोड़िए मरीजों के बैठने तक की व्यवस्था नहीं करवा पा रहा है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। 
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आयुष डिस्पेंसरी की दीवार में पीछे की तरफ दरार आ गई थी। अब इस बिल्डिंग को असुरक्षित घोषित कर बोर्ड भी लगा दिया गया है। इसी बोर्ड के ठीक सामने मरीजों को देखने के लिए टेंट लगा दिया गया है जहां डॉक्टर बैठेंगे और मरीजों को परामर्श देंगे। आयुष विभाग का कहना है कि प्रशासन के पास डेढ़ साल से सुनवाई न होने से यह स्थिति बनी है। उधर स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग ने बिल्डिंग असुरक्षित होने का बैनर लगाने वाले के खिलाफ जांच भी शुरू कर दी है। उन्होंने कहा है कि ऐसा करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। 

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केवल यहीं हैं पंचकर्म सेंटर

शहर में संचालित आयुष डिस्पेंसरी में से सिर्फ सेक्टर-28 की डिस्पेंसरी में ही पंचकर्म सेंटर का संचालन किया जाता है। सेंटर में पंचकर्म के लिए एक अलग रूम होने के साथ मसाज बेड और अन्य जरूरी उपकरण व संसाधन उपलब्ध हैं। इसका दर्जनों मरीज लाभ उठा रहे थे। यहां पर एक एएनएम की भी तैनाती है, जो टीकाकरण करती है। ऐसे में बिल्डिंग कंडम घोषित हो जाने के बाद इन सारी सुविधाओं पर ताला लग गया है।

12 डिस्पेंसरी में देखे जाते हैं हजारों मरीज

शहर में संचालित अलग-अलग 12 आयुष डिस्पेंसरियों में आयुर्वेदिक, होम्योपैथी व अन्य चिकित्सा पद्धतियों के माध्यम से प्रतिदिन हजारों मरीजों का इलाज किया जाता है। अगर सेक्टर 28 की डिस्पेंसरी की बात की जाए तो यहां प्रतिदिन 50 से 60 मरीज इलाज कराने आते हैं। ऐसे में एक महत्वपूर्ण सेंटर होने के बावजूद अधिकारियों ने इसे नजरअंदाज किया और अब नौबत टेंट लगाकर मरीज देखने तक की आ गई है। आयुष विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि अगर प्रशासन इसे गंभीरता से लेता तो समय रहते इसे किसी अन्य जगह स्थानांतरित कर दिया गया होता लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।

यहां-यहां है आयुष डिस्पेंसरी

मनीमाजरा, मौलीजागरां, बढ़हेड़ी, कैंबवाला, सेक्टर 28, 45, 35, 33, 37, 25, 27 और 11।

लोग हैं परेशान

स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर आम लोगों की जान से खिलवाड़ करने का काम किया जा रहा है। जब बिल्डिंग कंडम घोषित की जा चुकी है तो फिर ओपीडी के लिए अब तक कोई वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई। इसका जवाब प्रशासन को देना होगा। - संतोष कुमार, मौलीजागरां

बिल्डिंग कंडम घोषित होने के बाद कम से कम जानमाल के नुकसान की नौबत नहीं आई। फिर भी यह शर्मनाक है कि जानकारी होने के बावजूद मरीजों के लिए बरसात के मौसम में टेंट लगाकर ओपीडी में इलाज कराने की व्यवस्था की गई है। अधिकारी खुद तो चेंबर में बैठते हैं लेकिन जनता की सुविधा ताक पर रख दी गई है। - संजय गुप्ता, हल्लोमाजरा



यह बिल्डिंग आयुष विभाग के अंतर्गत आती है, इसमें स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका नहीं है। - डॉ सुमन सिंह, निदेशक स्वास्थ्य

डिस्पेंसरी भवन के रिपेयर की जरूरत है। भवन गिरने वाला नहीं है। न जाने किसने असुरक्षित का बैनर लगाया है, उसकी हम जांच कर रहे हैं और नियमों के तहत उस पर कार्रवाई भी करेंगे। बिल्डिंग को रिपेयर कराने के लिए मैंने चीफ इंजीनियर से बात की है।  -यशपाल गर्ग, स्वास्थ्य सचिव

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