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Hindi News ›   Chandigarh ›   Broken rule on first day of Puta election .. Uproar over bringing out ballot paper

पुटा चुनाव के पहले दिन टूटा नियम.. बैलेट पेपर बाहर लाने पर खड़ा हुआ हंगामा

Fri, 09 Oct 2020 01:54 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Fri, 09 Oct 2020 01:54 AM IST
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Broken rule on first day of Puta election .. Uproar over bringing out ballot paper
pu ke puta election mein vibhin dal polling station matdaan karte teachers....................photo/ajay verma - फोटो : CHANDIGARH
माई सिटी रिपोर्टर
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चंडीगढ़। पंजाब यूनिवर्सिटी टीचर्स एसोसिएशन (पुटा) के चुनाव के पहले दिन ही नियम तोड़ने पर हंगामा शुरू हो गया। एक शिक्षक की ओर से बैलेट पेपर बाहर लाया गया। उस दौरान चुनाव अधिकारी भी वहां गायब थे। खालिद-सिद्धू ग्रुप ने कड़ी आपत्ति जाहिर करते हुए नियम याद दिलाए। कुछ देर के लिए मतदान प्रभावित रहा। चुनाव अधिकारी को फोन के जरिए बुलाया गया। उस शिक्षक का वोट रद्द करने की मांग उठ गई। हालांकि दोपहर बाद चुनाव अधिकारी ने खालिद ग्रुप से कहा कि एक शिक्षक को अंदर कोई दिक्कत होने के कारण बाहर आने की अनुमति उन्होंने दी थी। इसलिए इस प्रकरण को शांत कर दिया जाए। उसके बाद मतदान फिर शुरू हो गए।
पुटा के चुनाव वीरवार की सुबह 8.30 बजे शुरू हुए थे। दोपहर 12 बजे के आसपास अंग्रेजी विभाग के एक शिक्षक लाल गाड़ी से पहुंचे और वह मतदान स्थल से बैलेट पेपर लेकर बाहर आ गए। वह अपनी गाड़ी में बैठकर बैलेट पेपर में प्रत्याशियों का चयन कर रहे थे। आरोप है कि आसपास एक ग्रुप के सदस्य भी खड़े थे जो देख रहे थे कि किसको मतदान किया जा रहा है। यह बात खालिद-सिद्धू ग्रुप को पता लगी तो उन्होंने विरोध किया। वे चुनाव अधिकारी के पास पहुंच गए, लेकिन वह नहीं मिले। प्रभारी चुनाव अधिकारी को इस प्रकरण के बारे में बताया, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद हंगामा खड़ा हो गया। चुनाव अधिकारी को फोन लगाया गया, लेकिन वहां भी पहले जवाब सही नहीं मिला। उसके बाद खालिद ग्रुप की एक प्रत्याशी ने बैलेट पेपर बाहर लेकर आने वाले शिक्षक से कहा कि उन्होंने गलत किया है। इसका विरोध दर्ज कराया। इसी बीच मृत्युंजय ग्रुप के भी एक-दो सदस्य वहां आ गए। बताया जाता है कि दोनों ग्रुपों में भी कुछ खींचतान हुई है, लेकिन दो से चार मिनट में ही मामला ठंडा हो गया।
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इसके बाद खालिद ग्रुप ने शिक्षकों को संदेश दिया कि लोकतंत्र की हत्या करने के लिए कुछ लोग लगे हैं। चुनाव अधिकारी भी उनसे मिले हुए हैं। यह आशंका पहले ही जाहिर की गई थी, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने एक वोट रद्द करने की मांग की। कुछ देर बाद चुनाव अधिकारी प्रो. विजय नागपाल आए तो उनके समक्ष प्रकरण रखा गया। बाद में चुनाव अधिकारी ने कहा कि उनकी अनुमति से ही शिक्षक बैलेट पेपर बाहर लेकर आए थे। उन्हें कोई दिक्कत हो रही थी। इसी को ध्यान में रखते हुए बाद में मामला रफा-दफा कर दिया गया।
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