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जमीन के सीएलयू के लिए घूसखोरी, मामला पहुंचा हाईकोर्ट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 19 Feb 2016 10:55 PM IST
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हरियाणा में हुड्डा सरकार के दौरान जमीन के सीएलयू के लिए घूसखोरी के मामले में लोकायुक्त की ओर से पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंचा है।
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मामले में आरोपी विधायक की ओर से एफआईआर के आदेश से रोक हगाने पर पुनर्विचार की मांग की गई है। विधायकों की अर्जी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। केस की सुनवाई दो मार्च को होगी।
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विधायकों के खिलाफ लोकायुक्त ने एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी। इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। पूर्व विधायकों विनोद भ्याणा, राव नरेंद्र सिंह, नरेश सेलवाल, जरनैल सिंह व राम निवास घोड़िल्ला की ओर से एडवोकेट राजीव आत्मा राम ने एकल बेंच का ध्यान आकर्षित किया था कि नियमानुसार एफआईआर के लिए प्राथमिक सबूत पुख्ता होते हैं।
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सेकेंडरी सबूत के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती। कहा था कि इन पांच पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के लिए सेकेंडरी सबूत ही हैं। जिस सीडी को सबूत मानकर एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया, वह सेकेंडरी सबूत है।
कहा था कि मामले में प्राथमिक सबूतों के लिए इस्तेमाल होने की बात कही जा रही है, उन्हें हैदराबाद की फोरेंसिंग लैब ने खाली करार दिया गया है। सीडी मुख्य सबूतों से ही बन सकती है, लेकिन जब प्राथमिक सबूत ही नहीं हैं, तो सेकेंडरी सबूत सीडी के आधार पर एफआईआर दर्ज नहीं की जा सकती।
एडवोकेट ने यह भी कहा था कि सीडी बनाने के लिए पहले एचडी कार्ड कंप्यूटर में डाला जाता है और इसके बाद यदि कंप्यूटर में डाटा डिलिट भी हो जाए तो कंप्यूटर में ऐसा डाटा दोबारा ढूंढा जा सकता है। इन दलीलों के साथ पैरवी की गई कि लोकायुक्त ने फैसला देते वक्त ऐसे तथ्यों पर गौर नहीं किया, लिहाजा एफआईआर दर्ज करने का आदेश रद्द किया जाना चाहिए।
बेंच ने अगली सुनवाई तक एफआईआर के निर्देश पर रोक लगा दी थी। एकल बेंच के इस अंतरिम आदेश को सरकार ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी। जस्टिस हेमंत गुप्ता की डिवीजन बेंच ने एकल बेंच की ओर से एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश पर लगाई रोक हटा दी थी। इस प्रकार पूर्व विधायकों के खिलाफ एफआईआर का रास्ता साफ हो गया था।