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घरेलू हिंसा के खिलाफ औरत-आदमी दोनों को बोलने की जरूरत
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चंडीगढ़। आधुनिक शादियों में बंद दरवाजे के अंदर अवसाद, घृणा और हिंसा बहुत बढ़ रही है। आदमी और औरत दोनों ही ऐसे मामलों में अपने लिए बोलने की बजाय चुप्पी साधकर अपराध का हिस्सा बने रहते हैं, जो रिश्तों को और बिगाड़ देता है। घरेलू हिंसा के खिलाफ औरत और आदमी दोनों को बोलने की जरूरत है, जब हम तक हम बोलेंगे नहीं, तब तक समाज घर के अंदर होने वाले अपराध को अपराध नहीं समझेगा। ये सब बातें लेखिका मेघना पंत ने किताब बॉयज डॉन्ट क्राई की यात्रा के बारे में चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित चर्चा में की।
चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित किताब चर्चा का संचालन लेखक विवेक अत्रे ने किया। लेखिका मेघना ने एक सवाल में बताया कि किताब स्वयं के अनुभवों पर आधारित है। काफी समय अपमानजनक रिश्ते में गुजारा। शुरुआत में मैं खुद के लिए बोल ही नहीं पाई। देश में अधिकतर औरतों के साथ ऐसा होता है, पढ़ा-लिखा और जागरूक होने के बावजूद वे उनके साथ हो रहे अपराधों के खिलाफ नहीं बोल पाती। किताब में इन्हीं सब अनुभवों को साझा किया। इन अनुभवों को शब्दों में ढालना मुश्किल था, इसलिए इसे लिखने में आठ साल लगे।
लेखन ने किया उपचार की तरह काम
लेखन मेरे लिए एक तरह से उपचार की तरह काम करता है। इसने मुझे जिंदगी के सबसे कठिन समय में बचाया है, जब मैं खुलकर अपने परिवार के साथ भी समस्याएं साझा नहीं कर सकती थीं। किताब पर फिल्म बनने की तैयारिया हो रही हैं। कई प्रोडक्शन हाउस के फोन आ रहे हैं।
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चंडीगढ़ साहित्य अकादमी की ओर से आयोजित किताब चर्चा का संचालन लेखक विवेक अत्रे ने किया। लेखिका मेघना ने एक सवाल में बताया कि किताब स्वयं के अनुभवों पर आधारित है। काफी समय अपमानजनक रिश्ते में गुजारा। शुरुआत में मैं खुद के लिए बोल ही नहीं पाई। देश में अधिकतर औरतों के साथ ऐसा होता है, पढ़ा-लिखा और जागरूक होने के बावजूद वे उनके साथ हो रहे अपराधों के खिलाफ नहीं बोल पाती। किताब में इन्हीं सब अनुभवों को साझा किया। इन अनुभवों को शब्दों में ढालना मुश्किल था, इसलिए इसे लिखने में आठ साल लगे।
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लेखन ने किया उपचार की तरह काम
लेखन मेरे लिए एक तरह से उपचार की तरह काम करता है। इसने मुझे जिंदगी के सबसे कठिन समय में बचाया है, जब मैं खुलकर अपने परिवार के साथ भी समस्याएं साझा नहीं कर सकती थीं। किताब पर फिल्म बनने की तैयारिया हो रही हैं। कई प्रोडक्शन हाउस के फोन आ रहे हैं।
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