{"_id":"5b69ebb74f1c1b9d3e8b5a31","slug":"bollywood-artist-to-attend-chandigarh-s-theater-festival","type":"story","status":"publish","title_hn":"थियेटर फेस्टिवलः टैगोर के मंच पर चमकेंगे सितारे, इस तारीख को उमड़ेंगी बॉलीवुड की हस्तियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
थियेटर फेस्टिवलः टैगोर के मंच पर चमकेंगे सितारे, इस तारीख को उमड़ेंगी बॉलीवुड की हस्तियां
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Wed, 08 Aug 2018 09:46 AM IST
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एकबार फिर से चंडीगढ़ का सांस्कृतिक विभाग आपको बॉलीवुड सितारों से सजे थियेटर फेस्टिवल से रोमांचित करेगा। इस फेस्टिवल में फिल्म कलाकार सौरभ शुक्ला से लेकर राकेश बेदी और अवतार गिल के साथ कश्मीरा शाह भी मंच पर कला का प्रदर्शन करेंगी। चंडीगढ़ के यूटी गेस्ट हाउस में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस के दौरान चंडीगढ़ के पर्यटन सचिव जतिंदर यादव और टैगोर थियेटर के डायरेक्टर कुलदीप शर्मा ने बताया कि इस फेस्टिवल का मंचन 23 अगस्त से 25 अगस्त तक किया जाएगा।
इसके अंतर्गत तीन नाटकों का मंचन होगा। साथ ही चंडीगढ़ के रॉक गार्डन में तीज फेस्टिवल का आयोजन 11 और 12 अगस्त को किया जाएगा। इसमें पंजाबी अर्टिस्ट परफारमेंस देंगे। इसके साथ ही यहां एनजेडसीसी का बैंड, पुलिस बैंड और अन्य सांस्कृतिक डांस का आयोजन किया जाएगा। 12 अगस्त को यहां पंजाबी गायक कार्यक्रम पेश करेंगे।
यह होंगे सिटी में नाटक
नाटक-रांग नंबर
ग्रुप-फैसिलिटी थियेटर, मुंबई
लेखक और निर्देशक-रमन कुमार
समयावधि-दो घंटा
कलाकार राकेश बेदी, अवतार गिल, राजेश पुरी, कश्मीरा शाह, राहुल भूचर, दिलनाज इरानी, किशवर मर्चेंट।
फेसिलिटी थियेटर के बैनर तले तैयार हास्य नाटक रांग नंबर भुलक्कड़ बॉस यशवंत सिंह (राकेश बेदी) और उसके आशिक मिजाज कर्मचारी अविनाश खन्ना (राहुल भुचर) के इर्दगिर्द घूमता है। असल में अविनाश का अपने बॉस की बीवी कामिनी (तनाज ईरानी) से अफेयर था। दोनों देर रात तक बाहर मस्ती करते थे। एक ओर कामिनी भुलक्कड़ पति की इस कमजोरी का फायदा उठाकर रोजाना कुछ न कुछ बहाना बना देती थी।
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दूसरी ओर अविनाश की पत्नी रंजना (दिलनाज ईरानी) का पति से इस हरकत पर रोजाना झगड़ा होता था। इस कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब नाटक में तीसरे दंपति नटवर (अवतार गिल) और पूनम (किश्वर मर्चेट) की इंट्री होती है। अविनाश अपनी पत्नी से बचने के लिए देर रात आने का कारण नटवर के साथ शराब पीना बताता है।
नाटक-बर्फ
ग्रुप-एजीपी वर्ल्ड मुंबई
लेखक और निर्देशक-सौरभ शुक्ला
समयावधि-दो घंटा
कलाकार-सौरभ शुक्ला, सादिया सिद्दीकी, सुनील पलवल।
सौरभ का नाटक बर्फ जीतेगा दिल
नाटककार और वरिष्ठ अभिनेता सौरभ शुक्ला का नाटक बर्फ कई सच्चाईयों पर सवाल दर्शकों के सामने रखता है। सवालों और सच के साथ ही कश्मीर अपने आतंकवाद की समस्या और राजनीति के साथ आ खड़ा होता है। सौरभ शुक्ला का यह नाटक किसी भी तरह की चालू मुहावरे की अलंकारिता, सबको तुच्छ समझने का बड़बोलापन और मध्यवर्गीय दया, सबसे मुक्त है। इस नाटक को जिंदगी के बीच रास्ता देने की कोशिश जरूर कह सकते हैं।
सौरभ के इस नाटक में बर्फ एक जिंदगी भी है। यह नाटक एक बिंदु से शुरू होता है और दूसरे बिंदु पर समाप्त हो जाता है। यह नाटक कोई फैसला नहीं सुनाता है पर खुद फैसला कर सकने की मनोदशा में लोगों को छोड़ देता है।
नाटक-आत्मकथा
ग्रुप-पदतिक थियेटर एंड रिख प्रेजेंटेशन
लेखक-महेश एल्कुंचवर
डिजाइन एंड डायरेक्शन-विनय शर्मा
समयावधि-दो घंटा बीस मिनट
कलाकार-कुलभूषण खरबंदा, चेतना जालान, अनुभा फतेहपुरिया, कल्पना झा।
आत्मकथा में दिखेगी लेखक की व्यथा
महेश एलकुंचवार लिखित नाटक ‘आत्मकथा’ भी एक लेखक की स्याह हकीकतों से वाकिफ करवाता है। ‘आत्मकथा’ की कहानी बहुत सरल है। एक बहुत सम्मानित लेखक हैं ‘राजध्यक्ष’ जो अपनी आत्मकथा अपने साहित्य के ऊपर रिसर्च कर रही युवती को लिखा रहे होते हैं। इसी बीच साहित्य में जीवन का सच और कल्पना के घालमेल पर दोनों में विवाद छिड़ जाता है क्योंकि लिखने वाले को लग रहा है कि लेखक सब कुछ गोल-माल कर रहा है और सही बात या तो छुपा रहा है या उस पर चुप है।
चर्चा लेखक के निजी जीवन, उसके संबंधों और उसके उपन्यास में उसके रूपांतरण तक पहुंचती है। लेखक हमेशा से सच और कल्पना का घालमेल करता आया है। नाटक के अंत में लेखक अपने को नई दुविधा में पाता है जब रिसर्चर उसके प्रेम में होने की घोषणा करती है और घर जाने से इंकार करती है। वह उसे जाने के लिए तो कहता है पर उसका मन उद्दिग्न रहता है।
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इसके अंतर्गत तीन नाटकों का मंचन होगा। साथ ही चंडीगढ़ के रॉक गार्डन में तीज फेस्टिवल का आयोजन 11 और 12 अगस्त को किया जाएगा। इसमें पंजाबी अर्टिस्ट परफारमेंस देंगे। इसके साथ ही यहां एनजेडसीसी का बैंड, पुलिस बैंड और अन्य सांस्कृतिक डांस का आयोजन किया जाएगा। 12 अगस्त को यहां पंजाबी गायक कार्यक्रम पेश करेंगे।
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यह होंगे सिटी में नाटक
नाटक-रांग नंबर
ग्रुप-फैसिलिटी थियेटर, मुंबई
लेखक और निर्देशक-रमन कुमार
समयावधि-दो घंटा
कलाकार राकेश बेदी, अवतार गिल, राजेश पुरी, कश्मीरा शाह, राहुल भूचर, दिलनाज इरानी, किशवर मर्चेंट।
फेसिलिटी थियेटर के बैनर तले तैयार हास्य नाटक रांग नंबर भुलक्कड़ बॉस यशवंत सिंह (राकेश बेदी) और उसके आशिक मिजाज कर्मचारी अविनाश खन्ना (राहुल भुचर) के इर्दगिर्द घूमता है। असल में अविनाश का अपने बॉस की बीवी कामिनी (तनाज ईरानी) से अफेयर था। दोनों देर रात तक बाहर मस्ती करते थे। एक ओर कामिनी भुलक्कड़ पति की इस कमजोरी का फायदा उठाकर रोजाना कुछ न कुछ बहाना बना देती थी।
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दूसरी ओर अविनाश की पत्नी रंजना (दिलनाज ईरानी) का पति से इस हरकत पर रोजाना झगड़ा होता था। इस कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब नाटक में तीसरे दंपति नटवर (अवतार गिल) और पूनम (किश्वर मर्चेट) की इंट्री होती है। अविनाश अपनी पत्नी से बचने के लिए देर रात आने का कारण नटवर के साथ शराब पीना बताता है।
नाटक-बर्फ
ग्रुप-एजीपी वर्ल्ड मुंबई
लेखक और निर्देशक-सौरभ शुक्ला
समयावधि-दो घंटा
कलाकार-सौरभ शुक्ला, सादिया सिद्दीकी, सुनील पलवल।
सौरभ का नाटक बर्फ जीतेगा दिल
नाटककार और वरिष्ठ अभिनेता सौरभ शुक्ला का नाटक बर्फ कई सच्चाईयों पर सवाल दर्शकों के सामने रखता है। सवालों और सच के साथ ही कश्मीर अपने आतंकवाद की समस्या और राजनीति के साथ आ खड़ा होता है। सौरभ शुक्ला का यह नाटक किसी भी तरह की चालू मुहावरे की अलंकारिता, सबको तुच्छ समझने का बड़बोलापन और मध्यवर्गीय दया, सबसे मुक्त है। इस नाटक को जिंदगी के बीच रास्ता देने की कोशिश जरूर कह सकते हैं।
सौरभ के इस नाटक में बर्फ एक जिंदगी भी है। यह नाटक एक बिंदु से शुरू होता है और दूसरे बिंदु पर समाप्त हो जाता है। यह नाटक कोई फैसला नहीं सुनाता है पर खुद फैसला कर सकने की मनोदशा में लोगों को छोड़ देता है।
नाटक-आत्मकथा
ग्रुप-पदतिक थियेटर एंड रिख प्रेजेंटेशन
लेखक-महेश एल्कुंचवर
डिजाइन एंड डायरेक्शन-विनय शर्मा
समयावधि-दो घंटा बीस मिनट
कलाकार-कुलभूषण खरबंदा, चेतना जालान, अनुभा फतेहपुरिया, कल्पना झा।
आत्मकथा में दिखेगी लेखक की व्यथा
महेश एलकुंचवार लिखित नाटक ‘आत्मकथा’ भी एक लेखक की स्याह हकीकतों से वाकिफ करवाता है। ‘आत्मकथा’ की कहानी बहुत सरल है। एक बहुत सम्मानित लेखक हैं ‘राजध्यक्ष’ जो अपनी आत्मकथा अपने साहित्य के ऊपर रिसर्च कर रही युवती को लिखा रहे होते हैं। इसी बीच साहित्य में जीवन का सच और कल्पना के घालमेल पर दोनों में विवाद छिड़ जाता है क्योंकि लिखने वाले को लग रहा है कि लेखक सब कुछ गोल-माल कर रहा है और सही बात या तो छुपा रहा है या उस पर चुप है।
चर्चा लेखक के निजी जीवन, उसके संबंधों और उसके उपन्यास में उसके रूपांतरण तक पहुंचती है। लेखक हमेशा से सच और कल्पना का घालमेल करता आया है। नाटक के अंत में लेखक अपने को नई दुविधा में पाता है जब रिसर्चर उसके प्रेम में होने की घोषणा करती है और घर जाने से इंकार करती है। वह उसे जाने के लिए तो कहता है पर उसका मन उद्दिग्न रहता है।