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बोर्ड ने निजी प्रकाशकों पर कसा शिकंजा, मनमर्जी से नहीं छापेंगे किताब

Tue, 03 Jan 2017 12:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली।
ब्यूरो/अमर उजाला, मोहाली। Updated Tue, 03 Jan 2017 12:24 AM IST
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Board tightened the screws on private publishers, not by whims and fancies Chhapenge book
‌किताबें - फोटो : demo pic

पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड (पीएसईबी) ने निजी प्रकाशकों पर शिकंजा कस दिया है। बोर्ड ने साफ किया है कोई भी प्रकाशक अपनी मर्जी से किताबें छापकर नहीं बेच पाएगा। सीनियर सेकेंडरी कक्षाओं की करीब 35 किताबों के लिए बोर्ड ने प्राइवेट पब्लिशर को छापने के लिए मंजूरी देने का फैसला किया है। 

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वहीं, अब इन पुस्तकों को छापने के लिए बोर्ड से परमिशन लेनी होगी। इसके लिए बोर्ड ने फीस प्लान तैयार किया है। उसके मुताबिक पब्लिशरों को पूरी कार्रवाई करनी होगी। 
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बोर्ड ने जिन किताबों को छापने के लिए पब्लिशर को मंजूरी देने का फैसला लिया है। उसकी लिस्ट बनाकर वेबसाइट पर अपलोड कर दी है। साथ ही लोगों से सहयोग देने की अपील की है। 

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किताबें हैं आमदनी का स्त्रोत

Board tightened the screws on private publishers, not by whims and fancies Chhapenge book
स्कूल - फोटो : demo

जिक्रयोग है कि कुछ समय पहले एक पब्लिशर ने अपनी मर्जी से किसी विषय की किताबें छापकर बाजार में उतार दी थी। इसके बाद बोर्ड ने उक्त प्रकाशक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसके खिलाफ जहां फेज-8 थाने में केस दर्ज करवाया था। वहीं, उसे अपने रिकॉर्ड में ब्लैक लिस्ट कर दिया था।

किताबें हैं आमदनी का स्त्रोत
पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की आमदनी का प्रमुख स्रोत बोर्ड परीक्षाओं में अपीयर होने वाले छात्रों की दाखिला फीस, पुस्तकों से होने वाली आय व प्राइवेट स्कूलों से परमिशन संबंधी आने वाली फीस है।

लगातार रिव्यू करता है किताबें
शिक्षा बोर्ड अब सीबीएसई और आईसीएसई बोर्ड की तर्ज पर हर साल किताबों को रिव्यू करता है। उसमें नवीनतम जानकारी को अपडेट किया जाता है। इस काम के लिए बोर्ड की एक कमेटी बनी हुई है। इसमें कई विभागों के अधिकारियों को शामिल किया गया है।

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