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BJP का हाल देखिए, हारे हुए सिपहसालारों के सहारे 2019 की जंग जीतने की तैयारी
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 10 May 2018 10:54 AM IST
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श्वेत मलिक
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बीजेपी का हाल देख लीजिए, प्रदेश भाजपा प्रधान श्वेत मलिक ने हारे सिपहसालारों के सहारे 2019 की लोकसभा की जंग जीतने की तैयारी की है। उनकी टीम में सात प्रमुख पदाधिकारी ऐसे हैं जो खुद या उनके पारिवारिक मेंबर चुनाव हारे हुए हैं। दो नेता तो लगातार दो बार से विधानसभा चुनाव हार रहे हैं। मलिक ने कार्यकारिणी के सबसे अहम पद महासचिव पर लुधियाना के प्रवीण बांसल को लिया है। बांसल पहले 2012 और फिर 2017 का विधानसभा चुनाव राकेश पांडे से हार चुके हैं।
प्रदेश कार्यकारिणी में उप प्रधान पर हंसराज हंस को लिया गया है। हंस 2009 में जालंधर से लोक सभा चुनाव मोहिंदर सिंह केपी से हारे थे। उसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। पूर्व विधायक अरुणेश शाकर की बहन उमेश शाकर को भी उप प्रधान बनाया गया है। उनके भाई अरुणेश शाकर 2017 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसी तरह पूर्वमंत्री भगत चुन्नी लाल के बेटे मोहिंदर भगत को भी उप प्रधान बनाया गया है। मोहिंदर भगत भी 2017 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।
अमृतसर के राकेश गिल को प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया है। वह भी 2012 और 2017 में डॉ. राजकुमार वेरका से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। एक और सचिव डॉ. परमिंदर शर्मा भी 2017 में विधानसभा चुनाव हारे थे। पार्टी ने उनके सियासी गुरु मदन मोहन मित्तल के बेटे की दावेदारी दरकिनार कर शर्मा को टिकट दिया था, पर वह कामयाब नहीं हो सके थे। इसी तरह लुधियाना से पूर्व डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसाईं का टिकट काट कर भाजपा ने गुरदेव शर्मा को लड़ाया था। लेकिन वह सुरिंदर डाबर से हार गए थे। गुरदेव शर्मा को प्रदेश कार्यकारिणी में ट्रेजरर बनाया गया है। वहीं, प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक भी अपना आखिरी नगर निगम चुनाव हारे थे, उसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
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कई नियुक्तियों पर सवाल
प्रदेश कार्यकारिणी में कई चेहरे ऐसे हैं जो लगातार तीसरी टीम में शामिल हुए हैं। लुधियाना के जीवन गुप्ता कमल शर्मा के साथ सचिव थे, विजय सांपला के समय महासचिव बने, अब मलिक के साथ उप प्रधान हैं। सुभाष शर्मा का भी यह तीसरा टर्म है, वह कमल, सांपला की टीम में भी सचिव थे, अब फिर बनाए गए हैं। राकेश राठौर, कमल के समय महासचिव, सांपला के समय उप प्रधान और अब फिर महासचिव बनाए गए हैं। हालांकि वह प्रधानगी के दावेदार थे। उमेश शारदा भी पिछली दोनों टीमों में थे।
बिल्कुल नए लोगों पर सवाल
श्वेत मलिक द्वारा कार्यकारिणी के एलान के भाजपा के एक बड़े वर्ग में इस बात को लेकर निराशा है कि कुछ बिल्कुल नए लोगों को शामिल कर लिया गया है। पार्टी का टारगेट किसी भी तरह 2019 का लोकसभा चुनाव जीतना है। लेकिन जिन लोगों को संगठन का बिल्कुल अनुभव ही नहीं है, वे कब सीखेंगे और कब काम शुरू करेंगे। भाजपाइयों ने मलिक द्वारा अपने कुछ करीबियों को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल करने पर भी सवाल उठाया है।
कुछ वर्ग नजरंदाज
पार्टी ने एलान किया था कि सूबे की टीम में कम से कम पांच महिलाओं को लिया जाएगा। लेकिन इस बार सिर्फ दो ही महिलाओं को पदाधिकारी बनाया गया है। सिख बाहुल्य राज्य में भाजपा ने सिर्फ चार सिख नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया है। बनिया वर्ग भाजपा का सबसे बड़ा वोट बैंक है। इस वर्ग से दो नेताओं को लिया गया है, लेकिन दोनों ही लुधियाना जिले से है। मालवा केकुछ जिलों में इस वर्ग का बड़ा वोट बैंक है, उन्हें दरकिनार कर दिया गया।
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प्रदेश कार्यकारिणी में उप प्रधान पर हंसराज हंस को लिया गया है। हंस 2009 में जालंधर से लोक सभा चुनाव मोहिंदर सिंह केपी से हारे थे। उसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है। पूर्व विधायक अरुणेश शाकर की बहन उमेश शाकर को भी उप प्रधान बनाया गया है। उनके भाई अरुणेश शाकर 2017 का विधानसभा चुनाव हार गए थे। इसी तरह पूर्वमंत्री भगत चुन्नी लाल के बेटे मोहिंदर भगत को भी उप प्रधान बनाया गया है। मोहिंदर भगत भी 2017 का विधानसभा चुनाव हार चुके हैं।
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अमृतसर के राकेश गिल को प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया है। वह भी 2012 और 2017 में डॉ. राजकुमार वेरका से विधानसभा चुनाव हार चुके हैं। एक और सचिव डॉ. परमिंदर शर्मा भी 2017 में विधानसभा चुनाव हारे थे। पार्टी ने उनके सियासी गुरु मदन मोहन मित्तल के बेटे की दावेदारी दरकिनार कर शर्मा को टिकट दिया था, पर वह कामयाब नहीं हो सके थे। इसी तरह लुधियाना से पूर्व डिप्टी स्पीकर सतपाल गोसाईं का टिकट काट कर भाजपा ने गुरदेव शर्मा को लड़ाया था। लेकिन वह सुरिंदर डाबर से हार गए थे। गुरदेव शर्मा को प्रदेश कार्यकारिणी में ट्रेजरर बनाया गया है। वहीं, प्रदेश प्रधान श्वेत मलिक भी अपना आखिरी नगर निगम चुनाव हारे थे, उसके बाद से उन्होंने कोई चुनाव नहीं लड़ा है।
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कई नियुक्तियों पर सवाल
प्रदेश कार्यकारिणी में कई चेहरे ऐसे हैं जो लगातार तीसरी टीम में शामिल हुए हैं। लुधियाना के जीवन गुप्ता कमल शर्मा के साथ सचिव थे, विजय सांपला के समय महासचिव बने, अब मलिक के साथ उप प्रधान हैं। सुभाष शर्मा का भी यह तीसरा टर्म है, वह कमल, सांपला की टीम में भी सचिव थे, अब फिर बनाए गए हैं। राकेश राठौर, कमल के समय महासचिव, सांपला के समय उप प्रधान और अब फिर महासचिव बनाए गए हैं। हालांकि वह प्रधानगी के दावेदार थे। उमेश शारदा भी पिछली दोनों टीमों में थे।
बिल्कुल नए लोगों पर सवाल
श्वेत मलिक द्वारा कार्यकारिणी के एलान के भाजपा के एक बड़े वर्ग में इस बात को लेकर निराशा है कि कुछ बिल्कुल नए लोगों को शामिल कर लिया गया है। पार्टी का टारगेट किसी भी तरह 2019 का लोकसभा चुनाव जीतना है। लेकिन जिन लोगों को संगठन का बिल्कुल अनुभव ही नहीं है, वे कब सीखेंगे और कब काम शुरू करेंगे। भाजपाइयों ने मलिक द्वारा अपने कुछ करीबियों को प्रदेश कार्यकारिणी में शामिल करने पर भी सवाल उठाया है।
कुछ वर्ग नजरंदाज
पार्टी ने एलान किया था कि सूबे की टीम में कम से कम पांच महिलाओं को लिया जाएगा। लेकिन इस बार सिर्फ दो ही महिलाओं को पदाधिकारी बनाया गया है। सिख बाहुल्य राज्य में भाजपा ने सिर्फ चार सिख नेताओं को प्रतिनिधित्व दिया है। बनिया वर्ग भाजपा का सबसे बड़ा वोट बैंक है। इस वर्ग से दो नेताओं को लिया गया है, लेकिन दोनों ही लुधियाना जिले से है। मालवा केकुछ जिलों में इस वर्ग का बड़ा वोट बैंक है, उन्हें दरकिनार कर दिया गया।