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सियासी गणित: पंजाब में आधार मजबूत करने के लिए भाजपा की रणनीति, इस बार छह सीटों पर उतारे सिख चेहरे
Mon, 13 May 2024 02:27 PM IST
निवेदिता वर्मा
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
रिंपी गुप्ता, अमर उजाला, पटियाला
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Mon, 13 May 2024 02:27 PM IST
सार
पंजाब में जिन सीटों पर भाजपा ने सिख चेहरों को उतारा हैं, उनमें पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर, लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, अमृतसर से यूएस के राजनयिक रहे तरनजीत सिंह संधू, खडूर साहिब सीट से मनजीत सिंह मन्ना और फिरोजपुर से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी शामिल हैं। सभी जट्ट सिख हैं।
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पंजाब में भाजपा की रणनीति
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंजाब में राजनीतिक तौर पर अपना आधार मजबूत करने की कोशिश में लगी भाजपा ने इस बार छह लोकसभा सीटों पर सिख चेहरों पर दांव खेला है। पंजाब एक सिख बहुल राज्य है, ऐसे में एक बड़े वोट बैंक को भुनाने के लिए भाजपा ने एक हिंदू पार्टी होने की अपनी छवि के विपरीत जाकर सिख उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। हालांकि, इसके लिए भाजपा को कुछ सीटों पर अपने टकसाली नेताओं को भी नजरअंदाज करना पड़ा है।
पंजाब में जिन सीटों पर भाजपा ने सिख चेहरों को उतारा हैं, उनमें पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर, लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, अमृतसर से यूएस के राजनयिक रहे तरनजीत सिंह संधू, खडूर साहिब सीट से मनजीत सिंह मन्ना और फिरोजपुर से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी शामिल हैं। सभी जट्ट सिख हैं।
पंजाब में इस बार भाजपा 28 सालों के बाद अकाली दल के बगैर चुनाव लड़ने जा रही है। पिछले विधानसभा चुनावों को छोड़कर साल 1996 से भाजपा व अकाली दल ने एक साथ चुनाव लड़ा है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे को शहरी हिंदू वोट और पंथक सिख वोट ट्रांसफर करते रहे हैं, जिससे भाजपा और अकाली दल दोनों को फायदा हो जाता था और गठबंधन में इनकी सरकारें भी पंजाब में बनी हैं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं और तमाम अटकलों के बावजूद दोनों पार्टियों में दोबारा गठबंधन नहीं हो सका है।
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गौरतलब है कि खेती कानूनों को लेकर अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इस बार के लोकसभा चुनावों में पंजाब में पहली बार कांग्रेस, आप, अकाली दल व भाजपा में चौकोना मुकाबला देखने को मिल रहा है। पंजाब में भाजपा अब तक शहरों व कस्बों में हिंदू वोटरों तक ही सीमित रही है, लेकिन अब देश के अन्य राज्यों की तरह भाजपा पंजाब में भी अपने पैर जमाना चाहती है। इसके लिए भाजपा की नजर पंजाब के जट्ट सिख वोट बैंक पर है। पंजाब में जट्ट सिख वोट शेयर 21 फीसदी है।
यही वजह है कि भाजपा इस वोट शेयर को भुनाने के लिए पिछले कुछ समय से दूसरी पार्टियों के प्रमुख सिख नेताओं विशेषक जट्ट सिखों को अपने साथ जोड़ रही है। पटियाला से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू दोनों ही जाने-माने जाट सिख चेहरे हैं। इन्हें हाल ही में भाजपा ने पार्टी में ज्वाइन करवा कर टिकटें भी दे दी हैं। अमृतसर से तरनजीत सिंह संधू भी पंथक जट्ट सिख हैं। अमेरिका में भारत के राजदूत रहे संधू के दादा तेजा सिंह समुंदरी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संस्थापकों में से एक थे। इसका भी भाजपा को काफी फायदा मिल सकता है।
प्रदेश कार्यकारिणी में भी 17 सिख चेहरे
पंजाब भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में भी 17 सिख चेहरों को शामिल किया था, जिनमें से 14 जट्ट सिख थे। किसान लगातार भाजपा के उम्मीदवारों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन अपनी इस छवि को तोड़कर सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा ने इस बार कई सिख चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी को कितना फायदा मिलता है या नहीं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन भाजपा फिलहाल काफी उत्साहित है। यही नहीं भाजपा ही पंजाब में एकमात्र पार्टी है, जिसने तीन महिलाओं को टिकट दी है। इसमें पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से परमपाल कौर और होशियारपुर से पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की पत्नी अनिता सोमप्रकाश शामिल हैं।
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पंजाब में जिन सीटों पर भाजपा ने सिख चेहरों को उतारा हैं, उनमें पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से पूर्व आईएएस अधिकारी परमपाल कौर, लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू, अमृतसर से यूएस के राजनयिक रहे तरनजीत सिंह संधू, खडूर साहिब सीट से मनजीत सिंह मन्ना और फिरोजपुर से राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी शामिल हैं। सभी जट्ट सिख हैं।
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पंजाब में इस बार भाजपा 28 सालों के बाद अकाली दल के बगैर चुनाव लड़ने जा रही है। पिछले विधानसभा चुनावों को छोड़कर साल 1996 से भाजपा व अकाली दल ने एक साथ चुनाव लड़ा है। दोनों पार्टियां एक-दूसरे को शहरी हिंदू वोट और पंथक सिख वोट ट्रांसफर करते रहे हैं, जिससे भाजपा और अकाली दल दोनों को फायदा हो जाता था और गठबंधन में इनकी सरकारें भी पंजाब में बनी हैं, लेकिन इस बार समीकरण बदले हैं और तमाम अटकलों के बावजूद दोनों पार्टियों में दोबारा गठबंधन नहीं हो सका है।
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गौरतलब है कि खेती कानूनों को लेकर अकाली दल ने भाजपा से नाता तोड़ लिया था। इस बार के लोकसभा चुनावों में पंजाब में पहली बार कांग्रेस, आप, अकाली दल व भाजपा में चौकोना मुकाबला देखने को मिल रहा है। पंजाब में भाजपा अब तक शहरों व कस्बों में हिंदू वोटरों तक ही सीमित रही है, लेकिन अब देश के अन्य राज्यों की तरह भाजपा पंजाब में भी अपने पैर जमाना चाहती है। इसके लिए भाजपा की नजर पंजाब के जट्ट सिख वोट बैंक पर है। पंजाब में जट्ट सिख वोट शेयर 21 फीसदी है।
यही वजह है कि भाजपा इस वोट शेयर को भुनाने के लिए पिछले कुछ समय से दूसरी पार्टियों के प्रमुख सिख नेताओं विशेषक जट्ट सिखों को अपने साथ जोड़ रही है। पटियाला से पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की पत्नी परनीत कौर लुधियाना से सांसद रवनीत सिंह बिट्टू दोनों ही जाने-माने जाट सिख चेहरे हैं। इन्हें हाल ही में भाजपा ने पार्टी में ज्वाइन करवा कर टिकटें भी दे दी हैं। अमृतसर से तरनजीत सिंह संधू भी पंथक जट्ट सिख हैं। अमेरिका में भारत के राजदूत रहे संधू के दादा तेजा सिंह समुंदरी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के संस्थापकों में से एक थे। इसका भी भाजपा को काफी फायदा मिल सकता है।
प्रदेश कार्यकारिणी में भी 17 सिख चेहरे
पंजाब भाजपा की प्रदेश कार्यकारिणी में भी 17 सिख चेहरों को शामिल किया था, जिनमें से 14 जट्ट सिख थे। किसान लगातार भाजपा के उम्मीदवारों का विरोध कर रहे हैं, लेकिन अपनी इस छवि को तोड़कर सिख मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए भाजपा ने इस बार कई सिख चेहरों को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी को कितना फायदा मिलता है या नहीं, यह तो समय ही बताएगा, लेकिन भाजपा फिलहाल काफी उत्साहित है। यही नहीं भाजपा ही पंजाब में एकमात्र पार्टी है, जिसने तीन महिलाओं को टिकट दी है। इसमें पटियाला से परनीत कौर, बठिंडा से परमपाल कौर और होशियारपुर से पूर्व केंद्रीय कैबिनेट मंत्री की पत्नी अनिता सोमप्रकाश शामिल हैं।