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पर्दे पर जीवंत हो उठी नैनसुख की कहानी
ब्यूरो/अमर उजाला,चंडीगढ़
Updated Mon, 24 Mar 2014 11:36 AM IST
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ललित कला अकादमी चंडीगढ़ की ओर से बायोग्राफिकल फिल्म ‘नैनसुख’ की स्क्रीनिंग रविवार को चंडीगढ़ के गवर्नमेंट म्यूजियम एंड आर्ट गैलरी सेक्टर-10 में की गई।
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इस बायोग्राफिकल फिल्म को अमित दत्ता ने डायरेक्ट किया और प्रोड्यूस किया है स्विस एंथ्रोपोलोजिस्ट डॉ. एब्रहार्ड फिशर ने।
70 मिनट की फिल्म की शुरूआत होती है 18वीं शताब्दी के मिनिएचर पेंटर नैनसुख से। नैनसुख गुलेर (कांगड़ा) के रहने वाले हैं। नैनसुख को कला के पारखी राजा बलवंत सिंह बुलाते हैं।
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राजा जानते हैं कि नैनसुख एक अद्भुत पेंटर है। नैनसुख राजा बलवंत सिंह का जीवन चित्रित करते हैं। राजा का महल ज्यादा बड़ा नहीं होता पर नैनसुख की पेंटिंग उसको ऐसा भव्य दिखाती है जिससे राजा बहुत खुश होता है।
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फिल्म के निर्देशक अमित दत्ता ने बताया कि उन्होंने इस फिल्म की ज्यादातर शूटिंग जसरोट में की। यहीं राजा बलवंत सिंह का महल था।
इस कहानी को फिल्माने के लिए उन्होंने कांगड़ा के गुलेर से काफी सामग्री एकत्र की। फिल्म की कहानी प्रोफेसर बीएन गोस्वामी की नैनसुख पर लिखी किताब से है।
अमित ने कहा कि नैनसुख की पेंटिंग्स फिल्म में दिखाई गई हैं। फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान चंडीगढ़ ललित कला अकादमी के चेयरमैन दीवान माना भी मौजूद रहे।
इस दौरान प्रोफेसर सुरेश छाबड़िया और अमित दत्ता के बीच फिल्म में नैनसुख और राजा बलवंत पर चर्चा भी हुई। नैनसुख का कैरेक्टर प्ले किया मनीष सैनी ने। मनीष भी नैनसुख की तरह ही मीनिएचर पेंटर हैं।